facebook-is-paying-to-users-for-installing-research-app, क्यों इस एप को डाउनलोड करने पर फेसबुक देता है पैसे
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क्यों इस एप को डाउनलोड करने पर फेसबुक देता है पैसे

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नयी दिल्ली
जरा सोचिए किसी एप को डाउनलोड करने भर से हर महीने कुछ पैसे कमाए जा सकें तो आप क्यों न करेंगे. फेसबुक द्वारा बनाए ‘फेसबुक रिसर्च एप’ युवा जोरशोर से डाउनलोड कर रहे हैं. कारण है एप के जरिए हो रही कमाई. फेसबुक अपने यूजर को यह एप डाउनलोड करने पर हर महीने 20 डॉलर तो अदा करता ही है, साथ में दोस्तों को रिफेरल लिंक भेजकर एप डाउनलोड करवाने पर एक्स्ट्रा पैसे भी देता है.

बताए गए आंकडों के मुताबिक लगभग 48,000 भारतीयों ने इस एप को इनस्टॉल किया है. उदाहरण के तौर पर एक यूजर जो 2018 से फेसबुक का रिसर्च एप इस्तेमाल कर रहा है, रेफेरल कोड के जरिए 700 लोगों को एप डाउनलोड करा चुका है. यही नहीं यूजर ने इस एप के जरिए अब तक 5,00,000 रुपये कमाए हैं.

आखिर क्यों है फेसबुक इतना मेहरबान ?
जो लोग इस एप को डाउनलोड कर बड़े खुश हो रहे हैं, या पैसे मिलने की बात जानकर एप डाउनलोड करने का मन बना रहे हैं. वो आगे लिखी बातों पर थोड़ा ध्यान दें. पहली बात तो दुनिया में कोई भी चीज फ्री नहीं होती, बदले में कुछ न कुछ तो देना ही पड़ता है. ऐसा ही इस एप के साथ भी है. एप डाउनलोड करते ही यूजर के फोन को ट्रैक किया जाने लगता है. इसमें यूजर कहां जाता है, उसके फोन में कौन-कौन से एप डाउनलोड हैं, उसकी शॉपिंग कार्ट में क्या क्या मौजूद है, जैसी चीजें शामिल हैं. कायदे से फेसबुक इस रिसर्च एप के जरिए लोगों का डाटा चुरा रहा है.

फेसबुक को नहीं ठहरा सकते दोषी
फेसबुक भले आपका डाटा एक्सेस कर रहा हो, लेकिन इसके लिए आप उसे ब्लेम नहीं कर सकते. वजह है, सारी बातें एप की टर्म्स एंड कंडीशन में लिखी होती हैं. इसे लापरवाही कहें या आपको फर्क नहीं पड़ता इसलिए लोग इग्नोर कर जाते हैं. बाद में किसी भी तरह के नुकसान पर फेसबुक की कोई जवाबदेही नहीं होगी, क्योंकि आपको पहले ही वार्न किया गया था. एक टीनएज ग्रुप की बात करें तो ज्यादातर बच्चे मनी अर्निंग एप को आसानी से इनस्टॉल कर लेते हैं. यही वजह है कि इस एप को डाउनलोड करने वालों में 13 से 25 साल के यूजर की गिनती ज्यादा है.

यूजर की सिक्योरिटी के चक्कर में एप स्टोर और प्ले स्टोर जैसी जगहों में इस रिसर्च एप को नहीं रखा गया है. फिर भी अलग-अलग सोशल प्लेटफॉर्म में इस एप की लिंक शेयर की जा रही है. फिलहाल इस एप को एंड्राइड एप के लिए ही बनाया गया है. बता दें की इससे पहले भी फेसबुक डाटा लीक के मामले में विवादों में रहा है.

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