Facebook के लिब्रा करेंसी प्रोजेक्ट को पेपाल, मास्टरकार्ड, ईबे ने कहा टाटा-बाय-बाय

भविष्य में लिब्रा करेंसी बिटक्वाइन को चुनौती दे सकती है. 2020 के शुरुआती 6 महीने में इसे शुरू किया जा सकता है.

कुछ महीने पहले ही सोशल प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी कंपनी फेसबुक ने लिब्रा करेंसी प्रोजेक्ट पेश किया था. भारत जैसे देशों में डिजिटल करेंसी बैन होने के कारण इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी बवाल मचा था. लिब्रा क्रिप्टोकरेंसी के लिए फेसबुक ने 27 कंपनियों से पार्टनरशिप की है जिनमे पेपाल,वीजा, ऊबर जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं. अब फेसबुक के इस प्रोजेक्ट को कई पार्टनर्स ने बाय-बाय कह दिया है.

लिब्रा प्रोजेक्ट से हाथ खींचने वाली कंपनियों में पेपाल,वीजा, मास्टरकार्ड, स्ट्राइप और ईबे का नाम शामिल है. ये कंपनियां डिजिटल करेंसी सिस्टम को सपोर्ट तो करती हैं लेकिन इसका हिस्सा नहीं बनना चाहतीं.

इस वजह से पार्टनर कंपनियों ने बनाई फेसबुक से दूरी

मास्टरकार्ड और ईबे खुद की डिजिटल करेंसी पर काम कर रही हैं इसलिए ये कंपनियां किसी दूसरी कंपनी के प्रोजेक्ट में काम करने के बजाय अपने प्रोजेक्ट में फोकस करना चाहती हैं. मास्टरकार्ड लेन-देन में लोगों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है और वीजा के मुताबिक फेसबुक लिब्रा के साथ पार्टनरशिप लिब्रा के नियम-कानून पर डिपेंड है. जब कंपनी लिब्रा के नियम से संतुष्ट होगी तभी पार्टनरशिप करेगी.

वहीं मैसेंजिंग कंपनी टेलीग्राम को अमेरिकी रेगुलेटरों ने क्रिप्टोकरेंसी-ग्राम जारी करने से रोकने का अस्थायी आदेश दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी लिब्रा करेंसी को आधारहीन बताया है.

माना जा रहा है कि भविष्य में लिब्रा करेंसी बिटक्वाइन को चुनौती दे सकती है. 2020 के शुरुआती 6 महीने में इसे शुरू किया जा सकता है. इसे यूज करने के लिए यूजर को स्मार्टफोन के वर्चुअल वॉलेट पर जाना होगा. इस वॉलेट को कैलिब्रा नाम दिया गया है.