महंगे होंगे Reliance Jio के टैरिफ प्लान, ये रही वजह…

इससे पहले देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों भारती एयरटेल व वोडाफोन ने एक दिसंबर से अपने टैरिफ में बढ़ोतरी करने का फैसला कर चुकी हैं.

दूरसंचार संकट का असर अब आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है. टेलिकॉम कंपनी Reliance Jio की अनाउंसमेंट के मुताबिक अगले हफ्ते से यूजर्स के लिए टैरिफ प्लान महंगे हो जाएंगे. गौरतलब है कुछ दिन पहले ही Jio की तरफ से दूसरे नेटवर्क पर कॉलिंग के लिए आईयूसी वाउचर की पेशकश की गई थी और अब कंपनी टैरिफ प्लान महंगे करने जा रही है.

दरअसल Reliance Jio के भरपूर सब्सक्राइबर होने के बावजूद कंपनी लगातार घाटे में जा रही है. Jio एवरेज रेवन्यू मामले में वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल से काफी पीछे है. सितंबर में Jio का एवरेज रेवन्यू 3% प्रति कस्टमर घटकर 118 रुपये पहुंच गया. जिसके बाद हालात सुधारने के लिए Jio ने टैरिफ प्लान महंगे करने की घोषणा की है.

इससे पहले देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों भारती एयरटेल व वोडाफोन ने एक दिसंबर से अपने टैरिफ में बढ़ोतरी करने का फैसला कर चुकी हैं. कंपनियों के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के लंबित बेहद भारी भरकम बकाए के बाद यह फैसला सामने आया है. हालांकि, दोनों कंपनियों ने अभी यह नहीं बताया है कि आम लोगों की जेब पर उनके फैसले का कितना असर पड़ने जा रहा है.

क्‍या है Adjusted Gross Revenue?

टेलीकॉम ऑपरेटर्स रेवेन्‍यू शेयर के रूप में केंद्र सरकार को लाइसेंस फीस और स्‍पेक्‍ट्रम यूसेज चार्जेस (SUC) का भुगतान करते हैं. इस शेयर को कैलकुलेट करने के लिए जो रेवेन्‍यू अमाउंट इस्‍तेमाल होता है, वह AGR यानी Adjusted Gross Revenue कहलाता है. ये वो इनकम है जिसे स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शंस के लिए एडजस्‍ट किया जाता है.

DoT के मुताबिक, AGR में कंपनी का सारा रेवेन्‍यू शामिल होना चाहिए, भले ही उसे नॉन-टेलीकॉम से कमाया गया है. कंपनियों का तर्क है कि AGR में सिर्फ वो इनकम होनी चाहिए जो टेलीकॉम ऑपरेशंस से आई है. रेंट या किसी एसेट की सेल से हुई इनकम इसमें ना जोड़ी जाए. अभी टेलीकॉम कंपनियां अपने AGR का 3-6 स्‍पेक्‍ट्रम यूसेज और 8% लाइसेंस फीस के रूप में देती हैं.

सरकार और टेलीकॉम कंपनियों के बीच 2005 से ही AGR पर लड़ाई चल रही है. पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के हक में फैसला सुनाया.

किस कंपनी पर कितना बकाया?

Vodafone Idea का अनुमान है सितंबर 2019 तक उसका 27,610 करोड़ रुपये बतौर लाइसेंस फीस और 16,540 करोड़ रुपये SUC बकाया है. भारतीय एयरटेल ने 16,815 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस बकाया होने का अंदाजा लगाया है. उसने SUC के लिए 11,635 करोड़ रुपये अलग से निकाल कर रखे हैं.

रिलायंस जियो पर करीब 13 करोड़ रुपये का बकाया होने का अनुमान है. दिवालियेपन से गुजर रहीं रिलायंस कम्‍युनिकेशंस और Aircel पर 32,403.47 करोड़ रुपये बकाया है. BSNL और MTNL पर 10,675.18 करोड़ रुपये बकाया हैं.