फोन पर वक्त बिताने से नहीं पड़ता मेंटल हेल्थ पर खास असर, न हों परेशान

टेक्नोलॉजी के अत्यधिक उपयोग के खिलाफ सलाह देते हुए एक्सपर्ट्स ने इसका उपयोग जिम्मेदारी के साथ करने पर जोर दिया.

आमतौर पर स्मार्टफोन के उपयोग के नकारात्मक प्रभावों के बारे में लोगों को बात करते देखा जाता है, लेकिन हाल ही में रिसर्चर्स ने कुछ ऐसा पाया है जिसके मुताबिक टीनएजर्स का अपने फोन पर या ऑनलाइन वक्त बिताना मेंटल हेल्थ के लिए उतना भी बुरा नहीं है. नॉर्थ कैरोलिना विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर माइकेलिन जेन्सन ने कहा है, “आम धारणा के विपरीत कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया युवक-युवतियों के मेंटल हेल्थ पर निगेटिव इफेक्ट डाल रहा है, हम इस विचार के लिए ज्यादा सपोर्ट नहीं देख रहे हैं कि फोन और ऑनलाइन बिताए गए वक्त का संबंध मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम के बढ़े जोखिम से है.”

क्लिनिकल साइकोलॉजिकल साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के लिए रिसर्चर्स ने 10 से 15 वर्ष तक के आयु वर्ग के बीच 2,000 से अधिक टीन एजर्स पर रिसर्च की.

रिसर्चर्स ने दिन में तीन बार इन तीन एजर्स के मेंटल हेल्थ से संबंधित लक्षणों के रिपोर्ट को इकट्ठा किया और इसके साथ ही हर रोज वो फोन या ऑनलाइन जितना समय बिताते थे उसके बारे में भी रात को रिपोर्ट तैयार किया जाता था.

इन रिपोर्ट को जब बाद में देखा गया तो रिसर्चर्स ने पाया कि डिजिटल टेक्नोलॉजी के अधिक उपयोग का संबंध खराब मेंटल हेल्थ से नहीं है.

रिसर्चर्स ने कहा कि रिपोर्ट में जिन युवाओं के अधिक टेक्सट मैसेज भेजने की सूचना मिली वे उन युवाओं की तुलना में अच्छा महसूस कर रहे थे जिन्होंने कम मैसेज भेजा.

टेक्नोलॉजी के अत्यधिक उपयोग के खिलाफ सलाह देते हुए एक्सपर्ट्स ने इसका उपयोग जिम्मेदारी के साथ करने पर जोर दिया.

मनोवैज्ञानिक और नोएडा में फोर्टिस मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के निदेशक समीर पारेख के मुताबिक, एक युवा की जिंदगी इनडोर और आउटडोर गतिविधियों के साथ अच्छी तरह से संतुलित होना चाहिए. पढ़ाई और मस्ती के बीच भी संतुलन का होना बेहद आवश्यक है.

उन्होंने बताया, “टीवी, इंटरनेट, सोशल मीडिया का इस्तेमाल लिमिट में किया जाना आवश्यक है और यह कभी भी दोस्तों से बातचीत, फैमिली टाइम, खेल या पढ़ाई पर भारी नहीं पड़ना चाहिए. इनमें संतुलन होना चाहिए. दोस्तों से बात करने के लिए फोन का इस्तेमाल करना अच्छा है, लेकिन छात्रों को सामने से मिलकर दोस्तों से बात करने को भी महत्व देना चाहिए.”

उन्होंने आगे कहा, “सोशल मीडिया का इस्तेमाल पॉजिटिविटी के साथ विचारों को व्यक्त करने के लिए किया जा सकता है. इसके साथ ही सोशल मीडिया से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बच्चों को कुछ स्किल्स की जानकारी होना चाहिए.”

बड़ों को एक बेहतर रोल मॉडल बनकर बच्चों के सामने जीवनशैली को एक बेहतर रूप देने में उनकी मदद करनी चाहिए.

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