WhatsApp की जासूसी करने वाले Pegasus के बारे में जानें कैसे करता है काम, हो जाएं सावधान

व्हाट्सऐप ने आरोप लगाया कि भारत में हुए आम चुनाव में इजराइली स्पाइवेयर द्वारा पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर नजर रखी गई.
know about Israeli spyware Pegasus, WhatsApp की जासूसी करने वाले Pegasus के बारे में जानें कैसे करता है काम, हो जाएं सावधान

व्हाट्सऐप ने खुलासा किया है कि भारत में लोकसभा चुनाव के दौरान पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर नजर रखने के लिए इजराइल में बने स्पाइवेयर पेगासस (Pegasus) का प्रयोग किया गया. व्हाट्सऐप ने आरोप लगाया कि NSO group और Q-Cyber नाम की कंपनियों ने ये स्पाइवेयर बनाया जिसका इस्तेमाल व्हाट्सऐप यूजर्स का डेटा चुराने के लिए किया गया.

सैन फ्रांसिस्को में एक अमेरिकी संघीय अदालत में मंगलवार को दर्ज किए गए मुकदमे के बाद ये खुलासा हुआ जिसमें व्हाट्सऐप ने आरोप लगाया कि 1400 व्हाट्सऐप यूजर्स को पेगासस (Pegasus) ने निशाना बनाया. ये एक ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जो कंप्यूटर और मोबाइल से निजी जानकारी चुरा सकता है.

कैसे काम करता है Pegasus

किसी यूजर पर नजर रखने के लिए पेगासस (Pegasus) ऑपरेटर एक लिंक जनरेट करता है और यूजर को मजबूर करता है कि वह किसी तरह से उस लिंक पर क्लिक करे. लिंक पर क्लिक करते ही फोन को हैक करने की अथॉरिटी ऑपरेटर के पास चली जाती है और वह पेगासस को यूजर के फोन में बिना उसकी इजाजत या जानकारी के इंस्टॉल कर देता है.

फोन हैक करके पेगासस इंस्टॉल करने के बाद ऑपरेटर मैसेजिंग ऐप्स का सहारा लेता है. इस तरह से वह गुप्त पासवर्ड, कॉन्टैक्ट लिस्ट, टेक्स्ट मैसेज, कैलेंडर नोट्स-इवेंट्स और वॉइस कॉल की लाइव जानकारी तक हासिल कर सकता है. यूजर की पूरी जानकारी लेने के लिए वह फोन का कैमरा और माइक भी ऑन कर सकता है.

इस जासूसी में नहीं पड़ी लिंक की जरूरत

व्हाट्सऐप ने शिकायत की है कि इस बार निगरानी के लिए जो तरीका अपनाया गया उसमें किसी तरह का लिंक देने की जरूरत भी नहीं थी. एक मिस्ड वीडियो कॉल से काम हो गया, यानी कॉल रिसीव करने की जरूरत भी नहीं पड़ी. व्हाट्सऐप ने कहा कि मई में ऐसे एक हैकिंग अटैक को रोका गया जिसमें स्पाइवेयर ने मालवेयर इंस्टॉल करने के लिए वीडियो कॉलिंग का सहारा लिया.

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