WhatsApp पर कैसे जासूसी का शिकार हुए 1400 यूजर? जानें इससे बचने का तरीका

एक बार फोन में Pegasus इंस्टॉसल हो गया तो वह ऑपरेटर की कमांड के मुताबिक, कोई भी डेटा इधर-उधर कर सकता है. कॉल्स, मैसेजेस, कॉन्टै क्ट्सा भेजना तो बेहद आसान काम है.
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हाल ही में एक मीडिया जर्नलिस्ट के डाटा से छेड़छाड़ की गई. उसके स्मार्टफोन पर Pegasus Spyware अटैक हुआ. नतीजन एक खुफिया साइबर कंपनी को उसके फोन का रिमोट एक्सेस मिल गया और इसके बाद शुरू हुई उसकी जासूसी. जब तक जर्नलिस्ट को इस बात की जानकारी मिली उसकी निजी जानकारी साइबर कंपनी के हाथ लग चुकी थी.

साइबर कंपनी के हत्थे चढ़ने वाला ये शख्स अकेला नहीं था. WhatsApp के दावे के मुताबिक इस साइबर कंपनी ने कुल 1400 लोगों को टारगेट किया.

दरअसल फेसबुक के स्वामित्व वाले WhatsApp ने गुरुवार को पुष्टि की कि इजरायल की साइबर खुफिया कंपनी NSO ग्रुप की ओर से Pegasus नाम के spyware का इस्‍तेमाल कर भारतीय मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकारों को टारगेट कर उनकी जासूसी की गई. WhatsApp ने इस सप्ताह इजरायल की साइबर खुफिया कंपनी NSO ग्रुप पर मुकदमा दायर किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने आरोप लगाया है कि इसने वैश्विक स्तर पर 1,400 सलेक्टेड यूजर्स की जासूसी की है.

कैसे काम करता है Pegasus

  • टारगेट यूजर से एक लिंक पर क्लिक कराया जाता है. इससे Pegasus ऑपरेटर को फोन के सिक्‍योरिटी फीचर्स से छेड़छाड़ करने का एक्‍सेस मिल जाता है. फिर बिना यूजर को पता चले फोन में Pegasus इंस्‍टॉल कर दिया जाता है.
  • एक बार फोन में Pegasus इंस्‍टॉल हो गया तो वह ऑपरेटर की कमांड के मुताबिक, कोई भी डेटा इधर-उधर कर सकता है. कॉल्‍स, मैसेजेस, कॉन्‍टैक्‍ट्स भेजना तो बेहद आसान काम है. ऑपरेटर चाहे तो यूजर के कैमरा और माइक को एक्टिव कर आपकी सभी हरकतों पर नजर भी रख सकता है.
  • WhatsApp का दावा है कि NSO Group और Q Cyber Technologies ने सिर्फ मिस्‍ड कॉल्‍स के जरिए Pegasus ने स्‍मार्टफोन्‍स को निशाना बनाया.
  • कुल मिलाकर WhatsApp में जासूसी का शिकार हुए यूजर्स को लिंक या मिस्ड कॉल किए गए, जिससे इजरायल की साइबर खुफिया कंपनी को यूजर्स के स्मार्टफोन का रिमोट एक्सेस मिल गया.

Spyware अटैक से कैसे बचें?

  • WhatsApp या दूसरे मैसेंजर पर अननोन लिंक्स पर क्लिक करने से परहेज करें. WhatsApp की बात की जाए तो इनबॉक्स में सस्पीशियस लिंक वाला मैसेज आने पर रेड कलर का अलर्ट मार्क बन जाता है. गलती से भी इस तरह के लिंक को ओपन न करें.
  • आमतौर पर ज्यादातर यूजर अपने पर्सनल मोबाइल या लैपटॉप पर लॉग इन पासवर्ड सेव करके रखते हैं. कई बार ये खतरनाक साबित होता है. खासकर बैंकिंग के मामले में. ऐसे में ट्रोजन और Spyware के दौरान बैंक फ्रॉड और दूसरे अकाउंट को हैक होने से बचाया जा सकता है.
  • WhatsApp के मुताबिक 1400 यूजर्स पर मिस्ड कॉल के जरिए Spyware अटैक किया गया. इससे बचने के लिए ट्रू-कॉलर या दूसरे फोन कॉल डिटेक्ट करने वाले एप का इस्तेमाल किया जा सकता है. इन एप्लीकेशन्स के जरिए स्पैम नंबर्स को ब्लॉक कर Spyware या दूसरे फ्रॉड से बचा जा सकता है.
  • कई बार अनऑफिसियल वेबसाइट से फोटो, गाने और वीडियो डाउनलोड करते हैं. ऐसा ही प्ले स्टोर के बाहर से डाउनलोड किए गए एप के साथ भी है. इस तरह के अन-अथोराइज्ड एप को डाउनलोड करने से आपके फोन में Spyware या दूसरे वायरस को एक्सेस मिलना बेहद आसान हो जाता है. इसलिए किसी भी तरह की डाउनलोडिंग के पहले उस प्लेटफॉर्म के बारे में ठीक से पता कर लें.

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