WhatsApp यूजर्स की जासूसी मामले में केंद्र सरकार ने मांगा जवाब, दिया 4 नवंबर तक का वक्त

WhatsApp ने NSO Group और Q Cyber Technologies के खिलाफ मुकदमा किया है. दावा है कि सिर्फ मिस्डर कॉल्सA के जरिए स्माoर्टफोन्सC को निशाना बनाया गया.
whatsapp spyware issue, WhatsApp यूजर्स की जासूसी मामले में केंद्र सरकार ने मांगा जवाब, दिया 4 नवंबर तक का वक्त

WhatsApp के हालिया सनसनीखेज खुलासे के मुताबिक इजरायल (Israel) की एक कंपनी ने Pegasus नाम के spyware का इस्‍तेमाल कर भारतीय पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी की. केंद्र सरकार ने इस मामले में WhatsApp से जवाब मांगा है. इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने WhatsApp को 4 नवंबर तक का समय दिया है.

इस मामले पर बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि लोग जिस वक्त जासूसी का शिकार हुए तभी सामने क्यों नहीं आए. WhatsApp ने जासूसी के शिकार हुए लोगों को मैसेज भेजा है, WhatsApp को उन लोगों के नाम का खुलासा करना चाहिए.

इस मामले पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट किया, ‘भारत सरकार मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर भारत के नागरिकों की गोपनीयता भंग होने से चिंतित है. हमने WhatsApp से कहा है कि वह इस तरह के उल्लंघन पर सफाई दे और ये बताए कि लाखों भारतीय नागरिकों की प्राइवेसी को सुरक्षित रखने के लिए क्या कर रहा है?’

वहीं कांग्रेस ने ‘स्नूपिंग’ के आरोप लगाते हुए SC से केंद्र को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने भारत में पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की निगरानी का लक्ष्य रखा है. SC को इससे तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और भाजपा को नोटिस जारी करना चाहिए.”

बता दें कि WhatsApp ने अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा दायर किया है. कंपनी का आरेाप है कि इजरायली NSO ग्रुप ने Pegasus के जरिए करीब 1,400 यूजर्स को निशाना बनाया.

WhatsApp ने भारत में सर्विलांस का शिकार हुए लोगों की पहचान नहीं जाहिर की है. हालांकि कंपनी उन यूजर्स के संपर्क में है. द इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम दो दर्जन शिक्षाविदों, वकीलों, दलित एक्टिविस्‍ट्स और पत्रकारों से WhatsApp ने संपर्क किया. उन्‍हें बताया गया कि मई 2019 तक उनका फोन सर्विलांस पर था.

Pegasus कैसे करता है काम 

टारगेट यूजर से एक लिंक पर क्लिक कराया जाता है. इससे Pegasus ऑपरेटर कोफोन के सिक्‍योरिटी फीचर्स से छेड़छाड़ का एक्‍सेस मिल जाता है. फिर बिना यूजर को पता चले फोन में Pegasus इंस्‍टॉल कर दिया जाता है.

एक बार फोन में Pegasus इंस्‍टॉल हो गया तो वह ऑपरेटर की कमांड के मुताबिक, कोई भी डेटा इधर-उधर कर सकता है. कॉल्‍स, मैसेजेस, कॉन्‍टैक्‍ट्स भेजना तो बेहद आसान काम है. ऑपरेटर चाहे तो यूजर के कैमरा और माइक को एक्टिव कर हरकत पर नजर भी रख सकता है.

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