2019 चुनावों के लिए नहीं है वाट्सएप की हेल्पलाइन सर्विस

मीडिया स्किल स्टार्टअप प्रोटो के अनुसार, चेकपॉइंट टिपलाइन सेवा हेल्पलाइन नहीं, बल्कि फेसबुक की तरफ से किया जा रहा सर्वे है.

नई दिल्ली: हाल ही में फेसबुक की तरफ से लोकसभा चुनावों से पहले सोशल मैसेजिंग साइट वाट्सएप ने फेक न्यूज और अफवाहों को रिपोर्ट करने और उसकी जांच करने के लिए एक नई टिपलाइन शुरू करने की घोषणा की थी. इस टिपलाइन सर्विस को लेकर नई बातें सामने आई हैं.

व्हाट्सएप की ‘चेकपॉइंट टिपलाइन’ सेवा भारतीय यूजर को फर्जी खबर की रिपोर्ट करने में मदद करने वाला कोई हेल्पलाइन नंबर नहीं है, बल्कि यह फेसबुक के खुद के लिए डेटा संग्रह का एक सर्वे है, जिससे फेसबुक को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि गलत सूचना किस प्रकार फैलती है.

प्रोटो ने वेबसाइट पर एक एफएक्यू पोस्ट किया है, जिसमें उसने कहा, “चेकपॉइंट टिपलाइन का इस्तेमाल मुख्य रूप से शोध के लिए डेटा सेव करने के लिए किया जाता है. यह कोई हेल्पलाइन नहीं है कि उससे हर यूजर को जवाब दिया जाएगा.”

व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने बजफीड न्यूज को इसकी पुष्टि की है कि घोषणा का यह मतलब नहीं था कि प्रत्येक अनुरोध पर जवाब दिया जाएगा. भारत में लोग गलत सूचना या अफवाह के बारे में व्हाट्सएप के चेकपॉइंट टिपलान को 91-9643-000-888 पर अपना अनुरोध सौंप सकते हैं.

क्या है टिपलाइन सर्विस ?
टिप लाइन को हम वेटर को दी जाने वाली टिप की तरह समझ सकते हैं. जिस तरह हम वेटर को टिप देते हैं उसकी सर्विस से खुश होकर ये कुछ वैसा ही है लेकिन यहां कोई खुशी नहीं होती बल्कि ये एक नंबर होता है जो किसी मैसेज या किसी कंटेंट की जांच करने के लिए उपलब्ध कराया जाता है. जिस भी मैसेज की जांच करनी हो उसे इस नंबर पर भेजकर उसकी जांच करवाई जा सकती है. कंटेंट भेजे जाने वाले की पहचान गुप्त रखी जाती है.

किसी यूजर को लगता है कि कोई खबर या डाटा गलत है या फिर वो किसी संदेहास्पद मैसेज की सत्यता की जांच करना चाहता है, वह चाहे टैक्स्ट मैसेज हो, फोटो हो या वीडियो लिंक हो, तो इस टिपलाइन सर्विस के जरिए फेसबुक को बता सकता है. यह सुविधा अंग्रेजी भाषा के अलावा हिंदी, तेलुगु, बंगाली और मलयालम में भी मिलेगी.