WhatsApp का तोड़ सिर्फ ₹1 हजार में, हजारों को मेसेज फॉरवर्ड कर रहे BJP, कांग्रेस वर्कर

बाजार में ऐसे टूल्‍स उपलब्‍ध हैं जिनकी मदद से WhatsApp फॉरवर्ड्स पर लगी लिमिट को बाईपास किया जा सकता है.
WhatsApp, WhatsApp का तोड़ सिर्फ ₹1 हजार में, हजारों को मेसेज फॉरवर्ड कर रहे BJP, कांग्रेस वर्कर

नई दिल्‍ली: भारत के आम चुनाव में इस बार भी WhatsApp का जमकर इस्‍तेमाल हो रहा है. पिछली बार WhatsApp से संदेश फॉरवर्ड करने पर कोई लिमिट नहीं थी, मगर 2019 आते-आते एक संदेश को सिर्फ पांच लोगों को फॉरवर्ड करने की सीमा तय कर दी गई. एक रिपोर्ट में पता चला है कि महज 1,000 रुपये में उपलब्‍ध WhatsApp क्‍लोन्‍स और सॉफ्टवेयर्स की मदद से भारतीय डिजिटल मार्केटर्स और पॉलिटिकल एक्टिविस्‍ट्स इन सीमाओं को बाईपास कर जा रहे हैं.

19 मई को आम चुनाव के मतदान का आखिरी चरण खत्‍म हो रहा है. न्‍यूज एजंसी Reuters ने BJP और कांग्रेस सूत्रों, डिजिटल कंपनियों के हवाले से कहा है इन चुनावों के दौरान ऐसे टूल्‍स की मांग बढ़ गई जो WhatsApp के प्रतिबंधों को तोड़ने में मदद करते हैं.

Reuters ने पाया कि राजनैतिक प्रचार के लिए भारत में तीन तरीकों से WhatsApp का दुरुपयोग हुआ. इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्‍ध क्‍लोन एप्‍स के जरिए कुछ BJP और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर मेसेज फॉरवर्ड किए. कुछ टूल्‍स WhatsApp संदेशें की ऑटोमेटिक डिलीवरी की सुविधा भी देते हैं. कुछ फर्में ऐसी भी हैं जो अपनी वेबसाइट पर राजनैतिक कार्यकर्ताओं को गुमनाम नंबर्स के जरिए बल्‍क मेसेजेस भेज पाने की छूट देती हैं.

क्‍यों तय हुई थी WhatsApp फॉरवर्ड्स की लिमिट?

पिछले साल भारत में मॉब लिंचिंग के कई मामले सामने आए थे. इनमें ऐसे केसेज भी थे जहां फर्जी सूचनाएं WhatsApp पर साझा की गईं, जिसके बाद भीड़ ने किसी को निशाना बना लिया. इसी के बाद कंपनी ने एक संदेश को सिर्फ पांच लोगों को फॉरवर्ड कर सकने की लिमिट तय कर दी. जिन सॉफ्टवेयर्स टूल्‍स का इस्‍तेमाल हो रहा है, वे इस लिमिट को तोड़ हजारों यूजर्स तक एक साथ मेसेज भेजने की छूट देते हैं.

फेसबुक के स्‍वामित्‍व वाली WhatsApp के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है. यहां इसके 20 करोड़ से भी ज्‍यादा यूजर्स हैं.

एजंसी ने दावा किया कांग्रेस के दो और BJP के एक सूत्र से उन्‍हें बताया कि उन्‍होंने GBWhatsApp और JTWhatsApp जैसी क्‍लोन एप्‍स का इस्‍तेमाल किया. इन दोनों एप्‍स का इंटरफेस WhatsApp से काफी हद तक मिलता-जुलता है. ये एप्‍स Google के आधिकारिक एप स्टोर पर नहीं मिलतीं, मगर दर्जनों टेक्‍नोलॉजी ब्‍लॉग्‍स पर मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्‍ध हैं.

यूजर्स को बैन कर देता है WhatsApp मगर उसका भी तोड़ मौजूद

WhatsApp ऐसे एप्‍स को ‘अनाधिकारिक’ बताकर कहती है कि इनके यूजर्स को बैन किया जा सकता है. यानी जिस नंबर से WhatsApp अकाउंट चल रहा है, उसे प्रतिबंधित किया जा सकता है. हालांकि राजनैतिक वर्कर्स नए नंबर्स से WhatsApp अकाउंट बनाकर दुरुपयोग जारी रख लेते हैं. Reuters ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि BJP और कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से अपने कार्यकर्ताओं को ऐसी एप्‍स का इस्‍तेमाल करने को कहा है.

नई दिल्‍ली के एक डिजिटल मार्केटर ने Reuters से कहा कि वह महीने भर की सर्विस के डेढ़ लाख रुपये लेगा. इसके बदले वह मोबाइल नंबर्स का डेटाबेस मुहैया कराएगा और तीन लाख WhatsApp मेसेज भेजेगा. वह Business Sender नाम के एक सॉफ्टवेयर का इस्‍तेमाल करता है, जो 1 हजार रुपये में बेचने भी तैयार है.

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