यूजर को फंसाने के लिए हैकर्स भेज रहे लुभावने ऑफर, ऑनलाइन शॉपिंग में ऐसे बचें जालसाजों से

जैसे ही आप किसी फेक वेबपेज पर क्लिक करते हैं आपका डाटा हैकर तक पहुंच जाता है. हो सकता है ट्रांजेक्शन करते वक़्त जो अमाउंट आपको दिखाया जा रहा है, उसकी बजाय एक मोटा अमाउंट आपके खाते से उड़ा दिया जाए.
online shopping offers, यूजर को फंसाने के लिए हैकर्स भेज रहे लुभावने ऑफर, ऑनलाइन शॉपिंग में ऐसे बचें जालसाजों से

नामी कंपनियों के नाम से वाट्सएप और दूसरे मैसेंजर एप पर शब्दों के जाल में फंसाने वाले सेल के ऑफर आपके पास आ रहे हैं तो थोड़ा सावधान हो जाइये. नहीं तो आप किसी भी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं.

पिछले कुछ दिनों एक मैसेज वायरल हुआ था वो यह है- “भाई सुन जल्दी से ऑर्डर कर…अमेज़ॉन पर सब कुछ 99 परसेंट डिस्काउंट पर मिल रहा है.” इस मैसेज के साथ आने वाले लिंक पर क्लिक करने पर आपको लुभावने ऑफर वाली वेबसाइट दिखती है, जिसमें बहुत ही कम दामों में जेबीएल का स्पीकर, पेनड्राइव, टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान मिल रहे होते हैं. इसके अलावा फ्लिपकार्ट जीएसटी सेल, पेटीएम में सवालों के जवाब दो- पैसे जीतो टाइप मैसेज भी खूब आते रहते हैं.

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तो क्या सच में सब इतना सस्ता मिल जाता है?

आपके सवाल का जवाब है, नहीं. ऑनलाइन सेल लगती है, चीजें सस्ती भी मिलती हैं. लेकिन कोई भी कंपनी इतनी कम कीमत में सामान नहीं बेचेगी कि वो खुद ही किसी लायक न रह जाए. आपके इनबॉक्स में आने वाले इस तरह के सारे मैसेज झूठे होते हैं. मैसेज से जुड़ी लिंक आपको जिस वेबसाइट पर रिडायरेक्ट करती है, वो भी फेक होती है. दरअसल हैकर्स, नामी ई-कॉमर्स वेबसाइटों से मेल खाता एक नकली वेब पेज बनाते हैं, ताकि यूजर आसानी से उनके झांसे में आ जाएं. ऐसे नकली वेब पेज बनाने को फिशिंग कहते हैं.

एक क्लिक और मुसीबत को न्योता

बात सिर्फ यहां ख़त्म नहीं होती कि ये वेबसाइट नकली होती हैं. इन वेबसाइट में ढेरों वायरस भरे पड़े होते हैं. वायरस समझते हैं? वही सॉफ्टवेयर प्रोग्राम जो आपके सिस्टम और डाटा को उथल-पुथल कर देता है. जैसे ही आप किसी फेक वेबपेज पर क्लिक करते हैं आपका डाटा हैकर तक पहुंच जाता है. क्लिक करने तक तो फिर भी ठीक है, अगर झमेले में पड़कर आप कुछ खरीदने के चक्कर में पड़ते हैं और पेमेंट कर देते हैं तो भारी नुकसान हो सकता है. एक तो जिस सामान की कीमत अदा करते हैं वो आप तक पहुंचता नहीं है, दूसरा आपके पैसे भी कट जाते हैं. तीसरा सबसे बड़ा नुकसान, पेमेंट करने के दौरान दी गई जानकारी के जरिए आपका बैंक अकाउंट भी हैक हो सकता है.

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हो सकता है ट्रांजेक्शन करते वक़्त जो अमाउंट आपको दिखाया जा रहा है, उसकी बजाय एक मोटा अमाउंट आपके खाते से उड़ा दिया जाए. इस तरह के मैसेज की पहचान इनका यूआरएल है, किसी भी तरह की शॉपिंग वेबसाइट सिर्फ गूगल पर सर्च करके ही ओपन करें. अगर कोई सेल होगी तो वेबसाइट पर आपको दिख ही जाएगी. बाकी इस तरह के मैसेजेस को इग्नोर करें और दूसरों को फॉरवर्ड करने से भी बचें.

कुछ तरीके हैं जो आपको ऑनलाइन जालसाजों से बचा सकते हैं…

  • हो सके तो किसी भरोसेमंद ई-कॉमर्स वेबसाइट से ही खरीददारी करें. इन वेबसाइट की मर्चेंट सर्विस और चीजें दोनों ही विश्वसनीय होते हैं.
  • अगर किसी नई वेबसाइट से कुछ खरीद रहे हैं तो ऑनलाइन पेमेंट न करें. ऐसे में सबसे सही विकल्प कैश ऑन डिलीवरी ही होता है.
  • कंपनी की रिटर्न पॉलिसी ठीक तरह से पढ़ लें. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि आर्डर किया सामान आप तक पहुंचता तो है, पर जब आप पैकिंग खोलते हैं तो जो सामान आपके हाथ लगता है वो खराब क्वालिटी का निकल जाता है. इसके बाद आप सामान लौटाना भी चाहें तो कंपनी पॉलिसी का हवाला देकर आपको टाल दिया जाता है.
  • ऐसी कोई भी वेबसाइट जिसके यूआरएल में https:// की बजाय सिर्फ http:// लगा होता है, सुरक्षित नहीं होती हैं. यहां पर s का मतलब सिक्योरिटी से है. उदाहरण के तौर पर फेसबुक सुरक्षित है क्योंकि इसका लिंक https://facebook.com है.
  • किसी दूसरे के मोबाइल या लैपटॉप से शॉपिंग कर रहे हैं और ऑनलाइन पेमेंट करने जा रहे हैं तो कार्ड डिटेल्स सेव न करें. भविष्य में आपकी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.

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