कोरोनावायरस पैनडेमिक के बाद दुनिया पर मंडराया इन्फोडेमिक का खतरा, ऐसे करें बचाव

वैज्ञानिकों की मानें तो कई देशों में ऐसे लोग हैं जो कोरोनावायरस से जुड़ी भ्रामक जानकारियों पर विश्वास कर रहे हैं और ये सकता है कि वैक्सीन बनने के बाद ये लोग उसपर भी विश्वास न करें

एक तरफ जहां सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस को लेकर जागरूकता फैलाई जा रही है वहीं भ्रामक जानकारियों की भी भरमार लगी है. वैज्ञानिकों की मानें तो कुछ देशों के एक तिहाई लोग ऐसे हैं जो कोरोनावायरस से जुड़ी गलत जानकारी पर विश्वास कर रहे हैं और ये हो सकता है कि वे इसकी वैक्सीन बनने के बाद वैक्सीनेशन भी न करवाएं.

ब्रिटेन और नीदरलैंड के रिसर्चर्स ने लंदन, अमेरिका, आयरलैंड, मैक्सिको और स्पेन में एक सर्वे किया जिसमें पाया कि ज्यादातर लोगों ने Covid-19 से जुड़े षड्यंत्र के सिद्धांतो को खारिज कर दिया था, लेकिन इनमें कुछ झूठी कहानियों ने एक बड़े तबके की आबादी के दिमाग में घर कर लिया है.

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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी इसको लेकर चेतावनी दे चुका है कि इस महामारी के साथ हानिकारक ‘इन्फोडेमिक’ ने भी जन्म ले लिया है जिससे गलत जानकारी के साथ लोगों के लिए जीवन काटना कठिन हो रहा है.

ऐसे हो रहे हैं ‘इन्फोडेमिक’ के शिकार

लंदन, अमेरिका, आयरलैंड, मैक्सिको और स्पेन में हुए इस सर्वे में शामिल होने वाले ज्यादातर लोगों का मानना है कि यह वायरस चीन के वुहान शहर में एक लैबोरेटरी में तैयार हुआ था. लंदन और अमेरिका में 22-23 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इस दावे को सही माना वहीं यह मैक्सिको और स्पेन में 33 प्रतिशत और 37 प्रतिशत तक बढ़ गया.

इसके अलावा 5G फोन नेटवर्क द्वारा Covid-19 के लक्षणों को और खराब करने वाले फर्जी दावे को मैक्सिको और स्पेन के 16 प्रतिशत लोगों ने सच माना वहीं आयरलैंड में 12 प्रतिशत, लंदन और अमेरिका में 8 प्रतिशत लोगों ने इसे सही होने की बात कही.

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जर्नल रॉयल सोसायटी ओपन साइंस में छपी स्टडी के को ऑथर और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी सोशल डिसिजन-मेकिंग लैब के डायरेक्टर सैंडर वैन डेर लिंडेन ने कहा कि इस स्टडी में लोगों के कोरोनावायरस से जुड़ी भ्रामक जानकारी पर विश्वास करने के पुख्ते सबूत मिले हैं. उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ वैक्सीन बनाना काफी नहीं, सरकार और टेक्नोलॉजी कंपनियों को सोशल मीडिया इन झूठे दावों को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए और भी तरीके ढूंढने होंगे.

सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही जानकारी से ऐसे करें बचाव

  • अगर आपसे कोई वॉट्सऐप, फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया के जरिए ऐसी जानकारी शेयर करता जिसमें एक दोस्त के डॉक्टर फ्रेंड या वैज्ञानिक द्वारा कही जाने वाली बात लिखी है तो तुरंत उसकी जांच करें.
  • रोज बात करने वालों पर हम सबसे ज्यादा विश्वास करते हैं लेकिन अगर उनमें से कोई आपके साथ ऐसी जानकारी शेयर कर रहा है जिसमें ग्रामर, गलत स्पेलिंग या कोई और गलती है तो उसकी तुरंत जांच करें
  • अगर आपको सोशल मीडिया पर ऐसी कोई जानकारी मिली है जो आपको अचानक से खुश कर दे रही है या फिर गुस्सा दिला रही है तो आप तुरंत उसकी जांच करें वो जानकारी गलत भी हो सकती है.
  • अगर आपको कोई जानकारी सिर्फ एक जगह पर ही मिल रही है तो तुरंत उसपर विश्वास न करें, अन्य जगहों पर उसकी तलाश करें और किसी विश्वसनीय जगह से जानकारी मिलने पर सच माने.
  • सोशल मीडिया पर फर्जी हैंडल्स के जरिये भी गलत जानकारी शेयर की जाती है तो किसी भी पोस्ट पर विश्वास करने से पहले उसके अकाउंट की जरूर जांच करें.
  • ध्यान रहे कि सोशल मीडिया पर लोग पैसे कमाने के लिए भी कई तिकड़म लगाते हैं इसलिए अगर आपसे कोई किसी तरह के सनसनीखेज जानकारी को शेयर करने को कह रहे हैं तो उसकी जांच-परख करने के बाद ही उसे आगे भेजें.
  • अगर आपको लगता है कोई खबर भ्रामक जानकारी दे रही है तो तुरंत फैक्ट चेक वेबसाइट पर जाएं और उसे चेक करें. इससे आपको तुरंत सच्चाई का पता चल जाएगा.

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