kesar da dhaba, मां की दाल के लिए मशहूर है यह अमृतसरी ढाबा, रोजाना लगता है 30 किलो घी
kesar da dhaba, मां की दाल के लिए मशहूर है यह अमृतसरी ढाबा, रोजाना लगता है 30 किलो घी

मां की दाल के लिए मशहूर है यह अमृतसरी ढाबा, रोजाना लगता है 30 किलो घी

kesar da dhaba, मां की दाल के लिए मशहूर है यह अमृतसरी ढाबा, रोजाना लगता है 30 किलो घी

अमृतसर

कई लोग खाने के बहुत शौकीन होते हैं और ऐसे में उन्हें लज़ीज खाना मिल जाए तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं होता. आज हम आपको एक ऐसे ही ढाबे के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कि खाने के प्रेमियों को लज़ीजदार खाना परोसता है. हम बात कर रहे हैं अमृतसर के ढाबे केसर द ढाबा की. यह ढाबा 100 साल से भी पुराना है. इस ढाबे पर दूर-दूर से लोग मां की दाल और लच्छा परांठा का लुत्फ उठाने के लिए आते हैं. केसर द ढाबा रोजाना खाना बनाने के लिए 30 किलोग्राम घी खर्च करता है.

इस ढाबे का इतिहास बहुत ही दिलचस्प है. यह ढाबा 1916 में पाकिस्तान के शेखपुरा में खोला गया था. यह वह वक्त था जब देश का बंटवारा नहीं हुआ था. देश का बंटवारा होने के बाद इस ढाबे के मालिक लाला केसर मल भारत के अमृतसर में आकर बस गए और यहीं पर उन्होंने फिर से केसर द ढाबा खोल लिया. लाला लाजपत राय, पंडित जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी, राजेश खन्ना और यश चोपड़ा जैसी महान हस्तियों ने भी इस ढाबे के खाने का स्वाद चखा हुआ है. वहीं इनके अलावा कई अन्य हस्तियां भी इस ढाबे की मशहूर मां की दाल और लच्छे परांठे का आनंद ले चुके हैं.

सुबह 11 बजे से रात के 11 बजे तक इस ढाबे पर मां की दाल और लच्छा परांठा खाने वाले लोगों की भीड़ लगी रहती है. मां की दाल और लच्छा परांठा तो इस ढाबे की खासियत है ही लेकिन इसके अलावा यहां पर पालक पनीर, सरसों का साग, राजमा भी लोगों को काफी पसंद आते हैं. एक सदी से पुराने इस ढाबे की खाने की रेसिपी कहीं से भी आपको उपलब्ध नहीं होगी. अब इस ढाबे को लाला केसर मल के पौते विजय मल चलाते हैं. विजय मल का कहना है कि केसर द ढाबे पर बनने वाले खाने की रेसिपी केवल परिवार के लोग ही जानते हैं.

kesar da dhaba, मां की दाल के लिए मशहूर है यह अमृतसरी ढाबा, रोजाना लगता है 30 किलो घी
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