92 वर्षीय बंगाली पादरी को मिला फ्रांस का यह प्रतिष्ठित सम्मान

92 वर्षीय पादरी फादर फ्रानोइस लाबोर्दे को फ्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘लेजन द ऑनर’ से सम्मानित किया है. फादर फ्रानोइस लाबोर्दे विकलांग बच्चों के लिए लंबे समय से काम करते रहे हैं. लाबोर्दे के काम को देखते हुए फ्रांस ने बुधवार(06 फरवरी) को हावड़ा में उन्हें सम्मानित किया. इस अवसर पर भारत में फ्रांसीसी […]

92 वर्षीय पादरी फादर फ्रानोइस लाबोर्दे को फ्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘लेजन द ऑनर’ से सम्मानित किया है. फादर फ्रानोइस लाबोर्दे विकलांग बच्चों के लिए लंबे समय से काम करते रहे हैं. लाबोर्दे के काम को देखते हुए फ्रांस ने बुधवार(06 फरवरी) को हावड़ा में उन्हें सम्मानित किया.

इस अवसर पर भारत में फ्रांसीसी राजदूत अलेक्सांद्र जेगलर भी मौजूद रहे. उन्होंने कहा कि देश हावड़ा साऊथ प्वाइंट बनाने वाले फादर लाबोर्दे को सम्मानित करके प्रसन्न है. यह संगठन विकलांग बच्चों, निराश्रित और समाज के सबसे वंचित वर्गों के विकास के लिए काम करने वाली एक संस्था है.

फादर फ्रानोइस लाबोर्दे पिछले 60 सालों से विकलांग और निराश्रित बच्चों के लिए काम कर रहे हैं. जेगलर ने भी अपने सम्बोधन में इस बात का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि वह(फ्रानोइस लाबोर्दे) विकलांग और निराश्रित बच्चों के लिए 60 सालों से काम कर रहे हैं. वह इस उम्र में भी काम कर रहे हैं, वह हमारे लिए एक प्रेरणा हैं.

फादर फ्रानोइस लाबोर्दे ने भी इस अवसर पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं. उन्होंने कहा, “वह यह सम्मान बच्चों को समर्पित कर रहे हैं, जिनके लिए वह इतने सालों से काम करते आए हैं.” इस मौके पर एक प्रदर्शनी भी लगाई गई थी. इसमें फादर द्वारा बच्चों के लिए किए गए कार्यों की झलकियां दिखाई गई थीं. फादर ने इस प्रदर्शनी को भी देखा और काफी प्रसन्न हुए.

फ्रानोइस लाबोर्दे भारत के ऐसे तीसरे सज्जन हैं जिन्हें फ्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘लेजन द ऑनर’ से सम्मानित किया गया है. इससे पहले यह सम्मान फिल्मकार सत्यजीत रे और अभिनेता सौमित्र चटर्जी को दिया जा चुका है. सत्यजीत रे को यह सम्मान साल 1987 में और सौमित्र चटर्जी को पिछले साल(2018) में दिया गया था.

बता दें कि पादरी फादर फ्रानोइस लाबोर्दे फ्रांसीसी मूल के हैं लेकिन उन्होंने भारत की नागरिकता ग्रहण कर ली है.