महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य शरद पवार पर भारी पड़े ‘दादा’ अजित पवार

हमारी रिपोर्टर शिवांगी ठाकुर के मुताबिक देवेंद्र फड़नवीस ने राजनीतिक शह मात के गेम में जो दहला मारा है वो अजित पवार के कारण ही संभव हुआ. अजित पवार के साथ एनसीपी के 22 से ज्यादा विधायकों का समर्थन माना जा रहा है.
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अजित पवार ( Ajit Pawar ) महज दो महीने पहले राजनीति से संन्यास लेने वाले थे. महाराष्ट्र विधानसभा ( Maharashtra Assembly )से इस्तीफा दे दिया था. शरद पवार ( Sharad Pawar ) ने कहा था कि अजित पवार Maharashtra Cooperative Bank घोटाले में नाम आने से परेशान हैं. इसके उलट 23 नवंबर, 2019 की अहेल सुबह अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के दादा बन कर उभरे हैं. रातोंरात Nationalist Congress Party ( NCP ) का समर्थन लेकर वो Bhartiya Janata Party के नेता Devendra Fadnavis के पास पहुंचते हैं.

कुछ घंटों के भीतर ही भारती की राजनीति का सबसे बड़ा भूचाल सामने आता है. देवेंद्र फड़नवीस दोबारा सीएम पद की शपथ लेते हैं. अजित पवार डिप्टी सीएम बनते हैं. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के शपथ दिलाने तक किसी को कानोकान भनक तक नहीं लगती है.

शिव सेना ( Shiv Sena ) सकते में है. संजय राउत को कुछ सूझ नहीं रहा. आखिर शरद पवार, सोनिया गांधी ( Sonia Gandhi ) और शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ( Udhbhav Thackeray ) के पैरों तले जमीन खिसक गई.

Congress के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी कहते हैं, मुझे लगा कोई फेक न्यूज चल रहा है. अब लग रहा है जिस तरह से NCP, Congress , Shiv Sena ने बातचीत लटकाई, तीन दिनों तक चर्चा होती रही, उससे बीजेपी को मौका मिल गया.

हमारी रिपोर्टर शिवांगी ठाकुर के मुताबिक देवेंद्र फड़नवीस ने राजनीतिक शह मात के गेम में जो दहला मारा है वो अजित पवार के कारण ही संभव हुआ. अजित पवार के साथ एनसीपी के 22 से ज्यादा विधायकों का समर्थन माना जा रहा है.

एनसीपी के 54 विधायक हैं. कहा जा रहा है कि शिव सेना के कुछ विधायक भी बीजेपी के संपर्क में हैं. अभी तक ये पता नहीं है कि क्या NCP के पितामह शरद पवार भी अजित पवार के साथ थे.

अजित पवार खुले तौर पर शरद के उत्तराधिकारी माने जाते हैं. अब इस पॉलिटिकल सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एनसीपी पर उनकी पकड़ और मजबूत हो सकती है.

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