1 जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू; ड्रोन से होगी निगरानी, बार कोड स्लिप से पता चलेगा कहां हैं आप

पिछली बार की तरह इस बार भी यात्रियों की गाड़ी में रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेटिफिकेशन टैग (आरआईएफडी) लगाए जाएंगे, ताकि उन्हें ट्रैक किया जा सके.

नई दिल्ली: एक जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए इस साल जम्मू-कश्मीर को अतिरिक्त केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल उपलब्ध कराया गया है.

इस साल यह यात्रा 15 अगस्त तक चलने वाली है. बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालओं का पहला जत्था 30 जून को सुबह जम्मू से पहलगाम और बालटाल के लिए रवाना होंगे और एक जुलाई को पवित्र गुफा के दर्शन करेंगे.

अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने पुलवामा हमले की वजह से इस बार यात्रा के दौरान अब तक के सबसे कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं. यात्रा को शांतिपूर्ण और दुर्घटना रहित बनाने के लिए आधुनिक तकनीक की भी मदद ली जा रही है. इस साल हाई रिजॉल्युशन कैमरों से लैस ड्रोन से भी यात्रा मार्ग की निगरानी की जाएगी.

इतना ही नहीं यात्रा मार्ग पर 24 घंटे निगरानी के लिए आईपी आधारित हाई रिजॉल्यूशन वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. जिससे कि कंट्रोल रूम में बैठे-बैठे यात्रियों पर निगरानी रखी जा सके.

यात्रियों की पहचान और लोकेशन जानने के लिए उनकी यात्रा स्लिप में बारकोड होगा. इस स्लिप में यात्री संबंधित पूरी जानकारी मौजूद होगी, मसलन वो कहां से आए, मोबाइल नंबर क्या है, फोटो आदि.

इससे कितने यात्री श्राइन पहुंचे, इसकी प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी हो सकेगी. स्लिप की 3 प्रतियां होंगी, जिसे यात्री चैकिंग के दौरान दिखाएंगे.

पिछली बार की तरह इस बार भी यात्रियों की गाड़ी में रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेटिफिकेशन टैग (आरआईएफडी) लगाए जाएंगे, ताकि उन्हें ट्रैक किया जा सके. श्रद्धालुओं के वाहन जम्मू से बेस कैंप तक अर्द्धसैनिक बल के काफिले के साथ ही जाएंगे.

अमरनाथ यात्रा को देखते हुए यात्रा खत्म होने तक पुलिस अफसरों को छुट्टी कैंसिल कर दी गई है. नेशनल हाईवे के अधीन आने वाले सभी पुलिस स्टेशनों के एसएचओ को निर्देश दिए गए हैं कि वह 24 घंटे अपने क्षेत्र में मौजूद रहेंगे.

पुलिस महानिरीक्षक एम के सिन्हा ने बताया कि इस बार पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा बल उपलब्ध कराए जाने से घुसपैठ रोधी ग्रिड को मजबूत करने में, पूरे राजमार्ग पर किसी तरह का अवरोध दूर करने वाले दस्ते की तैनाती और तीर्थयात्रियों के शिविरों के आसपास सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिली है.

सिन्हा ने कहा, “यात्रा पर किसी तरह के खतरे के बारे में कोई विशिष्ट सूचना नहीं मिली है. लेकिन तीर्थयात्रा के दौरान चूंकि ऐसी आशंकाएं बढ़ जाती हैं इसलिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं. हमें पिछले सालों की तुलना में इस बार अतिरिक्त केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल मिला है और उसी अनुसार पक्के इंतजाम किए गए हैं.”

उन्होंने कहा कि पुलिस, एसडीआरएफ और मजिस्ट्रेट वाले छह विशेष दलों को रामबण जिले में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास तैनात किया जाएगा जिससे भूस्खलन आशंकित क्षेत्र में यात्रा के दौरान कम से कम अवरोध उत्पन्न हो.

यात्री निवास के बाहर सुरक्षा बलों की तैनाती हो गई है. यात्रा मार्गो से बर्फ हटाने का काम अंतिम चरण में अमरनाथ यात्रा के दोनों मार्गों बालटाल और पहलगाम से बर्फ हटाने का काम तेजी के साथ जारी है.

अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर जम्मू रेलवे स्टेशन पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सभी आने और जाने वाली ट्रेनों तथा यात्रियों के सामान की जांच की जाएगी. विस्फोटकों का पता लगाने के काम में विशेष रूप से प्रशिक्षित श्वान दल को लगाया गया है.

कुल 46 दिन तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा दो रास्तों से शुरू हो रही है. इनमें से पहला अनंतनाग जिले में परंपरागत पहलगाम मार्ग और दूसरा गंदेरबल जिले का बालटाल मार्ग है जो पहलगाम मार्ग से छोटा है.

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