ऑटो सेक्‍टर की सेहत खराब, 2008-09 में देखी गयी थी इतनी बड़ी गिरावट

अप्रैल-जून 2019-20 की तिमाही के दौरान गाड़‍ियों की बिक्री में 12 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. इससे पहले इतनी बड़ी गिरावट 2008-09 की तीसरी तिमाही (अक्‍टूबर-दिसंबर) में देखी गई थी.

नई दिल्‍ली: देश के ऑटोमोबाइल सेक्‍टर की हालत खराब है. अप्रैल-जून के बीच इतनी कम गाड़‍ियां बिकीं, उससे कम 2008-09 में आई वैश्विक मंदी के समय बिकी थीं. पिछली 41 तिमाहियों में वाहनों की बिक्री का सबसे कम आंकड़ा अप्रैल-जून में रहा. इसके पीछे धीमी होती अर्थव्‍यवस्‍था, क्रेडिट क्रंच और बढ़ती बेरोजगारी को वजह माना जा रहा है.

ऑटो इंडस्‍ट्री इसे ‘अभूतपूर्व संकट’ के रूप में देख रही है. कंपनियों ने प्रोडक्‍शन और नए इनवेस्‍टमेंट कम कर दिए हैं, जिसकी वजह से नौकरियां घटने लगी हैं. ग्रामीण बाजार के कमजोर होने से समस्‍या और बढ़ गई है. सामान्‍य तौर पर अर्थव्‍यवस्‍था की दिक्‍कतों से ऑटो इंडस्‍ट्री को ग्रामीण इलाकों में नुकसान नहीं झेलना पड़ता. दो और तीन पहिये वाली गाड़‍ियों की बिक्री में ग्रामीण बाजार की हिस्‍सेदारी करीब 50 फीसदी है.

अप्रैल-जून 2019-20 की तिमाही में विभिन्‍न कैटेगरीज में गाड़‍ियों की बिक्री में 12 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. इससे पहले इतनी बड़ी गिरावट 2008-09 की तीसरी तिमाही (अक्‍टूबर-दिसंबर) में देखी गई थी जब सेल में 17% की कमी आई थी.

घरेलू बाजार में यात्री कार की बिक्री जून 2018 के दौरान बेची गई 183,885 कारों के मुकाबले 139,628 कारों पर आ गई है. अन्य यात्री वाहनों में भी भारत में बिकने वाले यूटिलिटी वाहनों की संख्या जून 2019 में 0.99 फीसदी घटकर 72,917 रह गई. पिछले महीने कुल 13,187 वैन बेची गई. इसमें जून-2018 के मुकाबले 18.7 फीसदी की कमी दर्ज की गई. कुल मिलाकर, यात्री वाहन की बिक्री जून में 17.54 फीसदी घटकर 273,748 वाहनों के मुकाबले 225,732 वाहन रह गई है.

GST कम करने की उठ रही मांग

ऑटो इंडस्‍ट्री की संस्‍था, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्‍चरर्स (SIAM) के प्रमुख राजन वढेरा ने टाइम्‍स ऑफ इंडिया से कहा, “यह शायद सबसे बुरा (दौर) है. मैंने इतनी लंबी बंदी कभी नहीं देखी. नौकरियों में कटौती शुरू हो गई है, डीलरशिप्‍स बंद हो रही हैं. हम लंबे समय तक सर्वाइव नहीं कर सकते.” ऑटो इंडस्‍ट्री की ओर से GST की दर 28% से कम करने की मांग हो रही है.

पैसेंजर व्‍हीकल्‍स की बात करें तो अप्रैल-जून की तिमाही में 18% की गिरावट देखी गई. इससे पहले 2000-01 की तीसरी तिमाही में इनकी सेल्‍स में 23% की गिरावट दर्ज की गई थी.

नए सुरक्षा और उत्‍सर्जन नियमों (BSVI) के लागू होने से गाड़‍ियों के दाम और बढ़ेंगे. इंडस्‍ट्री के लिए दिक्‍कत की बात ये है कि नए मॉडल्‍स, डिस्‍काउंट्स और मुफ्त आइटम्‍स के ऑफर के बावजूद सेल्‍स में गिरावट हो रही है.

टू-व्‍हीलर्स की सेल्‍स में नौ साल बाद ऐसी गिरावट देखी गई है. अप्रैल-जून की तिमाही के दौरान सेल्‍स में 12% की गिरावट रही, जो कि 2008-09 की तीसरी तिमाही में देखी गई 15% की कमी के बाद सबसे खराब प्रदर्शन है.

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