ये है ‘सरकारी वर्दी में छिपी टीएमसी सुपरकॉप’ की BJP ज्वाइन करने की स्टोरी

bharti ghosh, ये है ‘सरकारी वर्दी में छिपी टीएमसी सुपरकॉप’ की BJP ज्वाइन करने की स्टोरी

नई दिल्ली

वक़्त वक़्त की बात है. एक समय अच्छी लड़की रही अब खराब हो चुकी है. जिसे मां कहकर पुकारा जाता था, अब वो दुश्मन नंबर एक बन चुकी है. यहाँ बात हो रही है ‘सरकारी वर्दी में छिपी टीएमसी की उस कार्यकर्ता की’, जो अब बीजेपी का दामन थाम चुकी है. पूर्व पुलिस अधिकारी भारती घोष को ये तमगा उन्हीं के डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने दिया था.

हाल में बीजेपी ज्वाइन करने वाली भारती घोष पर पश्चिम बंगाल में जबरन वसूली और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज है. कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की क़रीबी रहीं घोष पर अभी फिरौती का एक मामला भी चल रहा है. ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल फरवरी में चंदन मांझी ने भारती के खिलाफ वसूली और आपराधिक साज़िश रचने का इल्ज़ाम लगाया था. यह मामला अभी सीआईडी की जांच के दायरे में हैं. उनके पति राजू हिरासत में हैं.

तृणमूल को फायदा दिलाने के आरोप
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और मुकुल रॉय की मौजूदगी में सोमवार को भारती घोष को पार्टी में शामिल किया गया. पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद ही घोष ने वही बात बोली जो भाजपा नेता पिछले कई दिनों से रट्टा लगाए हुए हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र खत्म हो चुका है. भारती पर 2014 के लोकसभा चुनावों और 2016 के विधानसभा चुनावों में अपने पद का इस्तेमाल करते हुए तृणमूल को फायदा कराने के भी आरोप लगे थे.

2.5 करोड़ रुपये नकद हुए थे बरामद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले साल सीआईडी ने घोष के घर छापा मारकर 2.5 करोड़ रुपये नकद बरामद किये थे. जांच में सहयोग न करने पर जांच एजेंसी ने घोष को ‘मोस्टवांटेड’ तक करार दिया था. इतना ही नहीं सीआईडी ने कोर्ट के आदेश पर अवैध वसूली के एक मामले में भारती घोष के खिलाफ जांच शुरू की थी. इस जांच के दौरान ही सीआईडी को भारती घोष के घर से 300 करोड़ रुपये की ज़मीन खरीदने के दस्तावेज़ मिले थे. इसी सिलसिले में सीआईडी भारती घोष से पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन जब उनका कोई पता नहीं लगा तो सीआईडी ने उन्हें मोस्टवांटेड घोषित कर दिया था.

जब बीते अच्छे दिन
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब मुकुल रॉय ने बीजेपी ज्वाइन कर ली और वो पार्टी की जड़ें फैलाने में जुट गए. रॉय की करीबी होने का दंश भारती को भी झेलना पड़ा. पश्चिमी मिदनापुर की सबांग सीट में दिसम्बर में उपचुनाव होने के बाद भारती पर ये आरोप लगा कि उन्होंने बीजेपी का साथ दिया. उन पर आरोप लगा कि उनकी वजह से बीजेपी का वोट शेयर बढ़ा और शुरू हो गए अच्छी लड़की के बुरे दिन. दीदी के अलावा कई लोग उन पर शक करने लगे कि सुपरकॉप भी अब बीजेपी की बोली बोलने लगी हैं. ‘आरोपों’ से आजिज आकर तीस जनवरी को भारती ने होम मिनिस्ट्री को एक लेटर लिखकर इस्तीफा देने की अपनी मंशा जता दी थी.

ममता के दो प्यारे, जिनमें एक हुआ किनारे

भारती को भगाया
1- भारती जादवपुर विश्वविद्यालय से एमबीए और बर्दवान विश्वविद्यालय से एलएलबी हैं.
2- घोष ने हावर्ड यूनिवर्सिटी के समर स्कूल में इंटरनेशनल मार्केटिंग एंड साइको-एनालिटिकल थ्योरी का अध्ययन किया.
3- घोष ने यूके सरकार की शेवनिंग गुरुकुल फैलोशिप जीती और प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में अध्ययन किया.
4- इन्होंने चाड, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, इथियोपिया और सोमालिया सहित कई जगहों पर संयुक्त राष्ट्र के तहत काम किया.
5- वह कोसोवो में एक बहु ब्रिगेड बल की संयुक्त राष्ट्र कमांडर भी थी. उन्होंने वैश्विक संस्था के साथ अपने कार्यकाल के दौरान संयुक्त राष्ट्र के छह पदक जीते.
6- भारती ने 2011 में पश्चिम बंगाल आपराधिक जांच विभाग के साथ काम करना शुरू किया. तृणमूल कांग्रेस ने वाम दलों को सत्ता से बाहर करने में कामयाबी हासिल की और ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनीं.
7- बनर्जी ने घोष को माओवादियों से प्रभावित पश्चिम मिदनापुर जिले में तैनात कर दिया था, जो 2008 से वामपंथी उग्रवाद का गवाह रहा था.
8- माओवादी नेता कोटेश्वर राव को एक मुठभेड़ में मार दिया गया, जबकि छोटे माओवादियों को सामान्य जीवन के आश्वासन के साथ हिंसा से दूर किया गया. घोष ने पश्चिम मेदिनीपुर के पुलिस अधीक्षक पद से तबादले के बाद पुलिस महानिदेशक को अपना इस्तीफा सौंप दिया था.

राजीव का हौसला बढ़ाया
1- 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार उत्तर प्रदेश से हैं और आईआईटी रुड़की से कंप्यूटर साइंस में ग्रैजुएट हैं.
2- 2016 में प. बंगाल विधानसभा चुनावों में राजीव कुमार पर फोन टेप करने का आरोप लगा था.
3- 2011 चुनावों के बाद ममता बनर्जी राजीव कुमार को बाहर करना चाहती थीं लेकिन बड़े अधिकारियों की सलाह मानते हुए उन्होंने राजीव कुमार को बाहर नहीं किया.
4- मई 2016 तक राजीव कुमार ने ममता बनर्जी का भरोसा जीत लिया था और उन्हें कोलकाता पुलिस कमिश्नर बना दिया.
5 – कुछ आईपीएस अधिकारी जो शारदा चिट फंड मामले की जांच के लिए गठित टीम का हिस्सा थे वे सीबीआई के रडार पर हैं और उन्हें पूछताछ के लिए भी बुलाया गया था. इसी टीम के प्रमुख के रूप में राजीव कुमार को भी पूछताछ के लिए भी बुलाया गया था.
6- एसटीएफ की कमान संभालने के अलावा राजीव कुमार ने एसपी (बीरभूम), स्पेशल एसपी (प्रवर्तन शाखा), डिप्टी कमिश्नर (कोलकाता पुलिस) और उप महानिरीक्षक (सीआईडी) के पद भी संभाले हैं.
7- राजीव कुमार ने उस समय अपनी क्षमता साबित की जब टीएमसी सरकार माओवादियों को निशाने पर ले रही थी.
8- छत्रधर महतो और अन्य माओवादी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद इनका कद और बढ़ गया.

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