राष्ट्रपति महोदय कृपया राज्यपाल तथागत रॉय की 'विभाजनकारी' राय पर ध्यान दें.., राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री!!! कश्मीर पर ऐसे बयान देने वाले राज्यपाल की बर्खास्तगी क्यों न हो?
राष्ट्रपति महोदय कृपया राज्यपाल तथागत रॉय की 'विभाजनकारी' राय पर ध्यान दें.., राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री!!! कश्मीर पर ऐसे बयान देने वाले राज्यपाल की बर्खास्तगी क्यों न हो?

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री!!! कश्मीर पर ऐसे बयान देने वाले राज्यपाल की बर्खास्तगी क्यों न हो?

राष्ट्रपति महोदय कृपया राज्यपाल तथागत रॉय की 'विभाजनकारी' राय पर ध्यान दें.., राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री!!! कश्मीर पर ऐसे बयान देने वाले राज्यपाल की बर्खास्तगी क्यों न हो?

‘दो साल तक अमरनाथ यात्रा मत जाइए, सर्दियों में आने वाले कश्मीरियों से सामान ना खरीदें,  कश्मीर की हर एक चीज़ का बहिष्कार करें’

ये बात पुलवामा आतंकी हमले के बाद आक्रोशित किसी सोशल मीडिया ट्रोल या मोहल्ले में खड़े लोगों के बीच नहीं कही गई, बल्कि ये भावनाएं ट्विटर पर मेघालय के महामहिम राज्यपाल महोदय तथागत रॉय ने ज़ाहिर की हैं. उन्होंने एक रिटायर्ड मेजर के ट्वीट को रिट्वीट किया जिसमें कश्मीरियों के बहिष्कार का साफ-साफ आह्वान था, और बाद में उस ट्वीट से अपनी सहमति जताते हुए लिखा कि ‘मैं इस बात से सहमत हूं.’

ये पहली बार होगा जब राज्यों में राष्ट्रपति के सीधे नुमाइंदे माने जानेवाले राज्यपाल ने किसी सूबे के निवासियों के बहिष्कार की अपील की हो. संविधान के रक्षक राज्यपाल की ऐसी असंवैधानिक अपील ना सिर्फ चौंकाती है बल्कि निराश भी करती है. उन्होंने ये बातें ऐसे वक्त में लिखीं जब देशभर से कश्मीरी लोगों पर हमले की झूठी-सच्ची खबरें आ रही हैं, पुलवामा हमले के बदले में सोशल मीडिया पर कश्मीरियों के बहिष्कार की अपील की जा रही है, राज्य सरकारें कश्मीरियों के प्रति गुस्से में घटने वाली घटनाओं पर लगाम कसने की कोशिश कर रही हैं. राज्यपाल तथागत रॉय का ऐसा उकसावे भरा ट्वीट उन तत्वों का हौसला बढ़ाएगा जो देशभर में बेकसूर कश्मीरियों पर उस एक आतंकी का गुस्सा निकाल रहे हैं जिसका ताल्लुक पुलवामा से था. पिछले दिनों देखा गया कि सोशल मीडिया पर बाकायदा एक फौज कश्मीरियों पर हमले की खबरों और बहिष्कार को नकारने में जुट गई थी, लेकिन अब तो तथागत रॉय ने इन्हें अपने ट्वीट से अच्छी खासी हवा दे दी है.

राष्ट्रपति महोदय कृपया राज्यपाल तथागत रॉय की 'विभाजनकारी' राय पर ध्यान दें.., राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री!!! कश्मीर पर ऐसे बयान देने वाले राज्यपाल की बर्खास्तगी क्यों न हो?

ये बात कोई भी सभ्य व्यक्ति आसानी से समझ सकता है कि किसी एक कश्मीरी की करतूत का बदला आप घाटी में रहनेवाले सत्तर लाख कश्मीरियों का हुक्का-पानी बंद करके नहीं ले सकते. अगर आप ऐसा सोचते हैं तो फिर आप घाटी को किस मुंह से भारत का अभिन्न अंग कहते हैं?  बिना शक घाटी भारत की है, लेकिन वहां रहनेवाले भी उतने ही भारतीय हैं जितने तथागत रॉय. राज्यपाल महोदय ने सारी संवेदनशीलता तो ताक पर रख ही दी है, लेकिन उससे ज़्यादा खतरनाक है एक राज्यपाल का गैर-ज़िम्मेदार हो जाना. अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को बिना देर किए इस ट्वीट का संज्ञान लेना चाहिए था. उनके देरी करने से कश्मीरियों के प्रति विरोधी भावनाएं भड़का रहे लोगों तक ये संदेश जा सकता है कि उनकी करतूतों पर किसी का ध्यान ही नहीं है.

राज्यपाल तथागत रॉय के ट्वीट पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा,’ ये कट्टरपंथी विचार ही कश्मीर को रसातल में ले जा रहे हैं और तथागत अगर आप ऐसा चाह ही रहे हैं तो कश्मीर से निकलने वाली नदियों के पानी को क्यों नहीं रोक देते जिससे आप बिजली पैदा करते हैं?’

इसी तरह की और प्रतिक्रियाएं भी तथागत रॉय की टिप्पणी के खिलाफ आई मगर राज्यपाल महोदय तो इसके बाद एक और ट्वीट करके और आगे निकल गए. उन्होंने लिखा- ‘रिटायर्ड कर्नल के सुझाव से सहमति जताने पर मीडिया और अन्य जगहों पर काफी कड़ी प्रतिक्रिया आ रही है मगर जिस तरह से साढे तीन लाख कश्मीरी पंडितों को बाहर निकाला गया और हमारे सैकड़ों जवानों को मारा गया, उसके जवाब में तो यह सुझाव पूरी तरह से अहिंसक प्रतिक्रिया है.’

हठधर्मिता की हद देखिए कि राज्यपाल को अपनी भड़काऊ बातों के सामने ये बारीकी समझ ही नहीं आ रही कि कश्मीरी पंडितों के पलायन या सैकड़ों जवानों की शहादत का बदला वो सारे कश्मीरियों को बैन करके ले नहीं पाएंगे. इसके उलट ऐसे आह्वान अलगाववादी और आतंकवादी ताकतों को मौका देते हैं कि वो बाकी कश्मीरियों को भी देश के प्रति भड़का दें. उम्मीद की जानी चाहिए कि हमेशा विवादों पर सवार रहनेवाले तथागत रॉय को देश की जनता गंभीरता से नहीं लेगी, लेकिन पीएम और राष्ट्रपति ज़रूर उनके हद लांघते ट्वीट्स को गंभीरतापूर्वक लेंगे. देश को

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