मॉनसून का दिखा असर, खरीफ फसल की बुवाई में आई लगभग 9 फीसदी की गिरावट

मंत्रालय की ओर से जानकारी मिली है कि खरीफ की प्रमुख फसल चावल, पिछले साल की तुलना में कम बोए गए हैं. अन्य फसलों की बुवाई, जैसे दाल और गन्ना में भी पिछले साल की तुलना कमी दर्ज की गई है.

नई दिल्ली: कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय किसानों ने इस साल गर्मियों की फसल की बुवाई पिछली साल की तुलना 8.6 प्रतिशत कम की है. इस साल खरीफ की फसलों की बुवाई 41 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र पर ही हुई है. हालांकि मॉनसून की बारिश के कारण पिछले सप्ताह से बुवाई में थोड़ा-बहुत अंतर जरूर आ सकता है.

मॉनसून की बारिश आने की उम्मीद में किसान खरीफ की फसलों की बुवाई 1 जून से शुरू कर देते हैं. हालांकि फिर भी लगभग आधे किसानों की फसल में सिंचाई की कमी आ ही जाती है. जुलाई के आखिर तक आमतौर पर बुवाई जारी रहती है. मॉनसून दस्तक दे चुका है और कृषि मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़े भी चिंतित कर देने वाले हैं.

मंत्रालय की ओर से जानकारी मिली है कि बुधवार को खरीफ की प्रमुख फसल चावल, पिछले साल की तुलना में कम बोए गए हैं. पिछले साल इस समय तक 11 मिलियन हेक्टेयर में बुवाई हो गई थी. जबकि इसी समय अवधि में सिर्फ 9.8 मिलियन हेक्टेयर में ही बुवाई हुई है. मकई (4.1 मिलियन हेक्टेयर) और कपास (7.8 मिलियन हेक्टेयर) के रोपण में कुछ खास बदलाव नहीं आया है.

मुख्य ग्रीष्मकालीन तिलहनी फसल सोयाबीन की बुवाई पिछले साल इस समय अवधि में 6.4 मिलियन हेक्टेयर जमीन पर हुई थी. जो इस साल 5.2 मिलियन हेक्टेयर जमीन पर ही हो सकी है. अन्य फसलों की बुवाई, जैसे दाल और गन्ना में भी पिछले साल की तुलना कमी दर्ज की गई है. मंत्रालय के मुताबिक ये आंकडे़ अभी संशोधन के अधीन हैं क्योंकि अपडेट जून-सितंबर मॉनसून के मौसम की प्रोग्रेस के साथ आते हैं.

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