ईरान से चीन की बढ़ती नजदीकी का असर, चाबहार रेल प्रोजेक्ट से छूटा भारत का साथ

यह प्रोजेक्ट भारत के अफगानिस्‍तान और अन्‍य मध्‍य एशियाई देशों तक एक वैकल्पिक मार्ग मुहैया कराने के लिए तैयार किया गया था. इसके लिए ईरान, भारत और अफगानिस्‍तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ था. चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) से ये रेल लाइन ईरान की सीमा पार करके अफगानिस्तान के जारांज तक जाएगी.
Iran Chabahar rail project India, ईरान से चीन की बढ़ती नजदीकी का असर, चाबहार रेल प्रोजेक्ट से छूटा भारत का साथ

ईरान सरकार ने चाबहार बंदरगाह के रेल प्रोजेक्ट से भारत को अलग कर दिया है. ईरान ने इस फैसले के पीछे भारत की तरफ से प्रोजेक्ट की फंडिंग और इसे शुरू करने में हो रही देरी का हवाला दिया है. भारत ने चार साल पहले 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान इस प्रोजेक्ट के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

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यह प्रोजेक्ट भारत के अफगानिस्‍तान और अन्‍य मध्‍य एशियाई देशों तक एक वैकल्पिक मार्ग मुहैया कराने के लिए तैयार किया गया था. इसके लिए ईरान, भारत और अफगानिस्‍तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ था. चाबहार बंदरगाह से ये रेल लाइन ईरान की सीमा पार करके अफगानिस्तान के जारांज तक जाएगी.

नेशनल डेवलपमेंट फंड की रकम लगाएगा ईरान

रेल लाइन बनाने के इस प्रोजेक्ट में भारत भी शामिल था. इस पर करीब 1.6 अरब डॉलर का निवेश होना तय था. भारत की सरकारी रेलवे कंपनी इरकान इसमें निर्माण का जिम्मा संभालने वाली थी. ईरान ने कहा है क‍ि वह इस रेल लाइन प्रोजेक्ट में भारत की मदद के बिना आगे बढ़ेगा. इसके लिए ईरान अपने नेशनल डेवेलपमेंट फंड के 40 करोड़ डॉलर की रकम लगाएगा.

चीन-ईरान के बीच 25 साल का रणनीतिक समझौता

न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान और चीन के बीच 25 साल के रणनीतिक समझौते पर बातचीत पूरी हो चुकी है. अपने साझे दुश्मन अमेरिका से तनाव के बीच ईरान और चीन जल्‍द ही पश्चिम एशिया में एक महाडील पर समझौता कर सकते हैं. इसके तहत चीन ईरान से बेहद सस्‍ती दरों पर तेल खरीदेगा और इसके बदले वहां 400 अरब डॉलर का निवेश भी करेगा. इसके अलावा ड्रैगन ईरान की सुरक्षा और घातक आधुनिक हथियार देने में भी मदद करेगा.

बाद में भी प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकता है भारत

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान इस प्रोजेक्ट को मार्च 2022 तक पूरा करने की योजना पर काम कर रहा है. वहां के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत इस प्रोजेक्ट में बाद में भी शामिल हो सकता है. भारत ने ईरान के बंदरगाह चाबहार के विकास पर अब तक अरबों रुपये खर्च किए हैं. चाबहार व्यापारिक के साथ-साथ सामरिक तौर पर भी बेहद अहम है. यह चीन की मदद से डेवलप किए गए पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से महज 100 किलोमीटर दूर है.

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