राजनीतिक नजरअंदाजी झेल रहे नीतीश कुमार, क्या फिर छोड़ देंगे एनडीए का साथ?

साल 2014 के लोकसभा चुनावों में करारी हार मिलने के बाद नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और महादलित समुदाय के जीतनराम मांझी को अपना उत्तराधिकारी बनाया.
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नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राजनीति का सुपरस्टार राजेश खन्ना कहा जा सकता है. जिस तरह राजेश खन्ना कभी भी सुपरस्टार का तमगा नहीं खोना चाहते थे उसी तरह से नीतीश कुमार कभी भी राजनीति में ख़ुद को किनारे होते नहीं देखना चाहते.

मोदी कैबिनेट में जेडीयू को मनमाफिक संख्या नहीं मिलने से नीतीश कुमार नाराज़ हैं. नीतीश की नाराज़गी का असर यह हुआ कि बिहार में रविवार को जब आठ नए मंत्रियों ने पद व गोपनीयता की शपथ ली तो उसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) का कोई विधायक शामिल नहीं हुआ.

दरअसल गुरुवार को नरेंद्र मोदी ने जब बतौर प्रधानमंत्री दूसरी बार शपथ ली तो उनके साथ 57 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ लिया लेकिन इनमें से कोई भी जेडीयू का नहीं था. नीतीश कुमार बुधवार से ही दिल्ली में थे और इस दौरान वो सांसदों की संख्या के आधार पर कैबिनेट में जगह देने की मांग कर रहे थे. आख़िरी समय तक जब संख्या को लेकर बात नहीं बनी तो नीतीश ने एक भी मंत्री पद लेने से मना कर दिया.

हालांकि मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया कि उन्हें कोई नाराज़गी नहीं है लेकिन वो सांकेतिक भागीदारी नहीं अनुपातिक भागीदारी चाहते हैं. उन्होंने आगे कहा, ‘जेडीयू के लोकसभा में 16 सांसद और राज्यसभा में छह सांसद हैं. पार्टी नेताओं का भी कहना है कि हमें सिम्बॉलिक रिप्रेजेंटेशन (सांकेतिक भागीदारी) की जरूरत नहीं. गठबंधन में होने के नाते जेडीयू बीजेपी के साथ खड़ी है.’

हालांकि तब मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने किसी तरह की नाराज़गी की बात भले ही ख़ारिज़ कर दी हो लेकिन उसका असर रविवार को बिहार कैबिनेट के विस्तार में देखने को मिला.

इतना ही नहीं बाद में रविवार (2 जून) को ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना स्थित हज हाउस में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था जिसमें बीजेपी का कोई नेता नहीं दिखा. साथ ही बीजेपी की इफ़्तार पार्टी में भी जेडीयू का कोई नेता नहीं दिखा.

हालांकि एनडीए की सहयोगी एलजेपी की ओर से रामविलास पासवान और उनके बेटे चिराग पासवान भी इस पार्टी में शामिल हुए थे, इतना ही नहीं महागठबंधन के बैनर तले लोकसभा का चुनाव लड़ चुके बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए.

बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार की गर्मजोशी से हुई इस मुलाक़ात के बाद राजनीतिक गलियारे में अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो गया है. जिसके बाद बीजेपी के पूर्व सहयोगी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने बीजेपी को चेताया हुए कहा है कि नीतीश कुमार विश्वासघात कर सकते हैं.

उन्‍होंने भगवा पार्टी से कहा क‍ि नीतीश कुमार ‘विश्‍वासघात’ करेंगे और उसे ‘धोखा नंबर 2’ के लिए तैयार रहना चाहिए. उन्‍होंने पटना में पत्रकारों से कहा, “मैं बीजेपी के लोगों को बताना चाहता हूं कि नीतीश कुमार जनमत का अपमान करने के लिए जाने जाते रहे हैं. लोगों के फैसले और गठबंधन के सहयोगियों को धोखा देना उनकी पुरानी आदत है… बीजेपी को धोखा नंबर 2 के लिए तैयार रहना चाहिए.”

कुशवाहा ने कहा, “ऐसा कोई सगा नहीं जिसको नीतीश ने ठगा नहीं.” उन्‍होंने कहा कि जल्‍द ही यह मुहावरा सच होगा और इसलिए बीजेपी को चौकन्‍ना रहना चाहिए. कुशवाहा हाल ही में संपन्‍न हुए लोकसभा चुनावों पर पार्टी की बैठक के बाद मीडिया से बात कर रहे थे.

आपको याद होगा साल 2013 में जब नरेंद्र मोदी को बीजेपी ने पीएम उम्मीदवार घोषित किया तो नीतीश एनडीए गठबंधन से अलग हो गए थे. जिसके बाद नीतीश ने बिहार में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चलाई.

साल 2014 के लोकसभा चुनावों में करारी हार मिलने के बाद नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और महादलित समुदाय के जीतनराम मांझी को अपना उत्तराधिकारी बनाया. हालांकि मांझी ज़्यादा समय तक सीएम नहीं रहे बाद में नीतीश कुमार ने उन्हें हटाकर एक बार फिर से सीएम की कुर्सी संभाली.

2015 विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने अपने कट्टर राजनीतिक दुश्मन लालू यादव के साथ मिलकर महागठबंधन की नींव रखी. इस गठबंधन में कांग्रेस को भी शामिल किया गया. फिर महागठबंधन की सरकार बनी और नीतीश कुमार एक बार फिर से सीएम बने.

हालांकि नीतीश कुमार ने जब देखा की राजानीति के मैदान में उनको हासिए पर ढकेला जा रहा है और लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव नए नेता के तौर पर बिहार के लोगों के सामने निखर कर सामने आ रहे हैं तो उन्होंने तेजस्वी पर करप्शन के आरोपों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया और एक बार फिर से बीजेपी के साथ मिलकर बिहार की सत्ता संभाली.

नीतीश कुमार को एक बार फिर से राजनीति में नज़रअंदाज किया जा रहा है और यही वजह है कि वो खुल्लमखुल्ला बीजेपी का विरोध कर रहे हैं.

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