मिशन चंद्रयान-2 पर नहीं रुकेगा ISRO, सूर्य से लेकर शुक्र तक पहुंचेगा भारत

इसरो चंद्रयान-2 मिशन में जुटा है लेकिन आने वाले वक्त में इसरो कई ऐसे मिशन लॉन्च करने जा रहा है जो दुनिया को हैरानी में डाल देंगे. आइए जानते हैं उनके बारे में.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने चांद फतह करने के लिए पहला कदम रखने की तारीख तय कर ली है. 22 जुलाई को चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग होगी. ये भारत का दूसरा मून मिशन है.

क्या है मिशन चंद्रयान
चंद्रयान उपग्रह को 22 जुलाई के दिन दोपहर 2.43 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से छोड़ा जाना है. अनुमान है कि 6-7 सितंबर को वो चंद्रमा के धरातल पर उतरेगा.  ये चांद के दक्षिणी हिस्से में उतर कर छानबीन करेगा. लैंडिंग में इसे 15 मिनट लगने हैं. पहली बार भारत चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ़्ट लैंडिंग’ करेगा जो सबसे मुश्किल काम माना जाता है. लैंडिंग के लिए दक्षिणी हिस्से का चयन करने के पीछे इसरो ने वजह बताई कि जितने प्रकाश और समतल जगह की ज़रूरत है वो वहीं मिल सकता है.

Chandrayaan 2, मिशन चंद्रयान-2 पर नहीं रुकेगा ISRO, सूर्य से लेकर शुक्र तक पहुंचेगा भारत

इसरो के मुताबिक लैंडिंग के बाद रोवर का दरवाज़ा खुलेगा और यह क्षण महत्वपूर्ण होगा. लैंडिंग के बाद रोवर के निकलने में चार घंटे का समय लगेगा. इसके 15 मिनट के भीतर ही इसरो को लैंडिंग की तस्वीरें मिल सकती हैं. इसरो ने कहा- हम वहां की चट्टानों को देख कर उनमें मैग्निशियम, कैल्शियम और लोहे जैसे खनिज को खोजने का प्रयास करेंगे. इसके साथ ही वहां पानी होने के संकेतों की भी तलाश होगी और चांद की बाहरी परत की भी जांच की जाएगी.

इसकी कुल लागत 600 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है. 3.8 टन वज़नी चंद्रयान-2 को यानी जीएसएलवी मार्क-तीन के ज़रिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. चंद्रयान-2 बेहद खास उपग्रह इसलिए है क्योंकि इसमें एक ऑर्बिटर है, एक ‘विक्रम’ नाम का लैंडर है और एक ‘प्रज्ञान’ नाम का रोवर है. दुनिया की नज़र इस मिशन पर है. दस साल में दूसरी बार चंद्रमा पर भारत उपग्रह भेज रहा है.

Chandrayaan 2, मिशन चंद्रयान-2 पर नहीं रुकेगा ISRO, सूर्य से लेकर शुक्र तक पहुंचेगा भारत

सिर्फ यहीं नहीं रुकेगा ISRO
मिशन चंद्रयान-2 के बाद भी इसरो थमनेवाला नहीं है. अगले 5-7 साल में इसरो कई अभियानों को अंजाम तक पहुंचाएगा. ऐसे ही कुछ अभियानों के बारे में जानिए-

चंद्रयान 3-  चांद पर उतारा जाएगा भारतीय रोबोट
इसरो चीफ डॉ. कैलाशावादिवू सिवन ने कहा है कि चंद्रयान-2 के बाद हम एक और यान चांद पर भेजेंगे. ये तीसरा चंद्र मिशन 2020 के अंत तक पूरा हो जाएगा. सबसे खास बात है कि इस मिशन में भारतीय रोबोट को चांद की सतह पर उतारा जा सकता है.

शुक्रयान- 5वां देश होगा भारत, जो शुक्र पर भेजेगा मिशन
Indian Venusian orbiter MISION यानी शुक्रयान. इसरो इस मिशन को 2023 तक पूरा करने की कोशिश करेगी. आज तक अमेरिका, रूस, जापान और यूरोपियन यूनियन ने ही शुक्र पर कामयाबी के साथ अपने मिशन भेजे हैं. अब भारत इस कतार में खड़ा है. शुक्रयान में 100 किलोग्राम का पेलोड हो सकता है. इसमें करीब एक दर्जन यंत्र लगे होंगे जो अध्ययन करेंगे.

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मंगलयान 2- मंगल ग्रह पर उतरेगा लैंडर-रोवर
2014 में इसरो ने मंगलयान मिशन में कामयाबी हासिल की और अब मंगलयान-2 की बारी है. इस बार मंगलयान मंगल ग्रह के चक्कर ही नहीं लगाएगा बल्कि लैंड़र और रोवर मंगल की सतह पर उतर कर प्रयोग में जुटेंगे. कहा जा रहा है कि 2021-22 कर मिशन लॉन्च होगा. इस काम में फ्रांस इसरो का मददगार होगा.

गगनयान- अब अंतरिक्ष में होगा इंसानों का पर्यटन
इसरो का प्रयास है कि 2022 तक मिशन गगनयान पूरा हो जाए. इसके अंतर्गत तीन यात्रियों को सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. इससे पहले दिसंबर 2020 और जुलाई 2021 में बिना इंसान के गगनयान का प्रक्षेपण किया जाएगा ताकि मिशन की सुरक्षा और सटीकता की जांच हो जाए. भारतीय वायुसेना 3 अंतरिक्ष यात्री इसके लिए उपलब्ध कराएगी. भारत का नंबर ऐसे मिशन के मामले में रूस, अमेरिका और चीन के बाद आएगा.

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आदित्य L1- सूर्य से इसरो मिलाएगा नज़रें
इसरो अपनी बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना पर 2019-20 में अमल करने जा रहा है. सूर्य के विभिन्न आयामों की जांच करने के लिए सोलर प्रोब मिशन आदित्य-L1 छोड़ा जाएगा. 400 किलो वजन के आदित्य को धरती से 15 लाख किमी ऊपर स्थित हैलो ऑर्बिट में लग्रांज-1 बिंदु के पास स्थापित किया जाएगा. इसमें सिर्फ एक पेलोड होगा जो सूर्य के कोरोना, सौर लपटों, तापमान, चुबंकीय क्षेत्र समेत अन्य आयामों और उनसे पृथ्वी पर होने वाले प्रभावों की जांच करके बताएगा. यूं तो इस मिशन को 2012-13 में ही लॉन्च करने की योजना थी पर तकनीकी कारणों से इसमें देर हो गई.

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NISAR- नासा संग मिलकर दुनिया की सबसे महंगी अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट
इस प्रोजेक्ट का नाम है – Nasa-Isro Synthetic Aperture Radar (Nisar). इसे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी नासा मिलकर पूरा करेंगे. इसकी संभावित लागत करीब 10 हजार करोड़ रुपए होगी. उम्मीद जताई जा रही है कि यह मिशन 2021 तक लॉन्च किया जाएगा. माना जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे महंगा अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट होगा. इसे जीएसएलवी-एमके 2 रॉकेट से छोड़ा जा सकता है.

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