जम्‍मू जेल में कैदियों का ब्रेनवॉश कर रहे पाकिस्‍तानी आतंकी, J&K सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट में जम्मू-कश्मीर सरकार के वकील शोएब आलम ने बताया कि जम्मू जेल में बंद अलग-अलग संगठनों के आतंकियों को जम्मू-कश्मीर के बाहर शिफ्ट करने की जरूरत है. उनके यहां रहने से कश्मीरी कैदियों का ब्रेनवॉश हो रहा है.

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर सरकार ने जम्मू जेल में बंद 7 पाकिस्तानी आतंकियों को तिहाड़ जेल में शिफ्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. राज्य सरकार ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि ये सातों आतंकी स्थानीय कैदियों की सोच में बदलाव करके उन्हें आतंक के रास्ते पर धकेलने में जुटे हैं. इस याचिका पर न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है

तिहाड़ जेल नहीं तो पंजाब-हरियाणा जेल में ही शिफ्ट किया जाए

कोर्ट में जम्मू-कश्मीर सरकार के वकील शोएब आलम ने बताया कि जम्मू जेल में बंद अलग-अलग संगठनों के आतंकियों को जम्मू-कश्मीर के बाहर शिफ्ट करने की जरूरत है. उनके यहां रहने से कश्मीरी कैदियों का ब्रेनवॉश हो रहा है. शोएब आलम ने कहा कि इन पाकिस्तानी आतंकियों को दिल्ली के तिहाड़ जेल में शिफ्ट किया जाए. अगर तिहाड़ जेल में शिफ्ट करना संभव नहीं है तो फिर उन्हें पंजाब और हरियाणा में शिफ्ट किया जाए. बेंच जम्मू-कश्मीर की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई है. उसने शोएब आलम से नोटिस की कॉपी सातों आतंकियों को भी भेजा जाना सुनिश्चित करने के लिए कहा है.

कैदियों को मिल रहा है स्थानीय समर्थन

राज्य सरकार के अनुसार उन्हें यह भी पता चला है कि कैदियों और दूसरे लोगों को स्थानीय समर्थन भी प्राप्त है और इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि उन्हें आतंक से जुड़ी गतिविधियां करने के लिए सूचनाएं,संसाधन और दूसरी मदद भी मिल रही है.

दूसरे कैदियों को गुमराह कर रहे हैं आतंकी संगठन

वहीं, जम्मू कश्मीर सरकार ने 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों के शहीद होने की घटना के बाद लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकवादी जाहिद फारूक को जम्मू जेल से अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिये शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी. फारूक को 19 मई, 2016 को सुरक्षा बलों ने उस वक्त गिरफ्तार किया था जब वह सीमा पर लगी बाड़ से घुसने का प्रयास कर रहा था. राज्य सरकार ने कहा था कि प्राप्त खुफिया जानकारी से संकेत मिला है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के आतंकवादी जेल में बंद दूसरे कैदियों को गुमराह कर रहे हैं.