LIVE: बागी विधायकों से मिले विधानसभा स्पीकर, कहा- मेरा काम किसी को बचाना नहीं

संसद में बुधवार को सोनिया गांधी, राहुल गांधी के नेतृत्‍व में कांग्रेस सांसदों ने कर्नाटक और गोवा के हालात को लेकर प्रदर्शन किया.

नई दिल्‍ली: कर्नाटक में जारी राजनीतिक संकट को दूर करने का रास्‍ता विधानसभा स्‍पीकर के केबिन से होकर जाता है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस-JDS के 10 बागी विधायकों से स्‍पीकर केआर रमेश से मिलने को कहा है. कोर्ट ने कहा है कि स्‍पीकर उनके इस्‍तीफे पर जो भी फैसला लें, उसकी जानकारी शुक्रवार को उसे दी जाए. स्‍पीकर ने मंगलवार को कहा था कि वह कोई फैसला करने से पहले विधायकों का पक्ष सुनना चाहते हैं.

    • बागी विधायकों से मिलने के बाद स्पीकर का बयान- मेरा काम किसी को बचाना नहीं
    • थोड़ी देर में कर्नाटक विधानसभा स्पीकर की प्रेस कांन्फ्रेंस.
    • सभी विधायकों को 6 बजे स्पीकर के चेंबर में आने को कहा गया था लेकिन सभी विधायक 3 मिनट की देरी से पहुंचे.
    • अपने विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए JDS ने लगाई याचिका
    • पुलिस कमिश्नर की सुरक्षा में विधानसभा पहुंचे स्पीकर
    • कर्नाटक के सभी विधायक एक घंटे बाद बैंगलोर पहुंच जाएंगे. शाम के 6 बजे स्पीकर से कर सकते हैं मुलाकात.
    • स्‍पीकर ने भी सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने की इजाजत मांगी थी. उन्‍होंने कहा कि उनकी इस अर्जी को मुख्‍य मामले के साथ सुना जाए. हालांकि SC ने जल्‍द सुनवाई से इनकार कर दिया. CJI ने कहा कि हमने विधायकों के मामले में आदेश दिया है. स्‍पीकर से गुरुवार को उनका पक्ष रखने को कहा गया है.
    • अदालत ने कर्नाटक डीजीपी से इन विधायकों को सुरक्षा मुहैया कराने को भी कहा है. विधानसभा के आसपास धारा 144 लगा दी गई है. परिसर के दो किलोमीटर के दायरे में पांच से ज्‍यादा लोगों के इकट्ठा होने और प्रदर्शन करने पर रोक लग गई है.
    • विपक्षी पार्टी भाजपा ने राज्यपाल वजुभाई वाला से आग्रह किया कि वह एच. डी. कुमारस्वामी सरकार को शक्ति परीक्षण कराने का निर्देश दें. एक जुलाई से इस्तीफा सौंपने वाले पार्टी के विधायकों की संख्या 13 हो गई है. अगर ये सभी इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो विधानसभा में अध्यक्ष सहित पार्टी की ताकत 79 से घटकर महज 66 रह जाएगी.
    • कर्नाटक में अपनी सरकार को बचाने के लिए बेताब कांग्रेस ने मंगलवार को भी संसद में हंगामा किया था. बेंगलुरू की सड़कों पर भी विरोध प्रदर्शन हुए, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और के. सी. वेणुगोपाल को विरोध मार्च निकालते हुए कई पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हिरासत में ले लिया गया.
    • मुंबई में भी हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जहां डी. के. शिवकुमार सहित कई कांग्रेसी नेताओं को एक होटल के बाहर हिरासत में ले लिया गया. ये नेता बागी विधायकों को मनाने पहुंचे थे.

सरकार की मुसीबत उस समय और भी बढ़ गई, जब एक क्षेत्रीय पार्टी केपीजेपी के विधायक सहित एक निर्दलीय विधायक ने भी इस्तीफा दे दिया और सत्ताधारी गठबंधन से समर्थन वापस ले लिया. केपीजेपी विधायक और निर्दलीय विधायक द्वारा इस्तीफा देने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन की संयुक्त ताकत बहुमत से कम हो गई है.

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