‘सभी की शेखी हवा में उड़ गई’, सियासी ड्रामे के खात्‍मे पर शिवसेना ने ली चुटकी

शिवसेना ने सामना में लिखा, ''शिवसेना को सत्ता हेतु लाचार कहनेवाले पहले खुद पर जमी धूल को देख लें.''
maharashtra politics Saamana targeted BJP, ‘सभी की शेखी हवा में उड़ गई’, सियासी ड्रामे के खात्‍मे पर शिवसेना ने ली चुटकी

महाराष्ट्र में मंगलवार को सियासी ड्रामा चरम पर था. देवेंद्र फडणवीस ने बहुमत साबित करने से पहले सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. उनके पहले अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था.

इसके बाद महागठबंधन(एनसीपी, कांग्रेस, शिवसेना) ने मंगलवार देर शाम उद्धव ठाकरे को विधायक दल नेता चुना. अब गुरुवार को शिवाजी पार्क में उद्धव ठाकरे सीएम पद की शपथ लेगें. इससे पहले शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना से बीजेपी पर हमला बोला है.

सामना में लिखा, ”सभी की शेखी हवा में उड़ गई. आखिरकार देवेंद्र फडणवीस की क्षणिक सरकार विश्वासमत के पहले ही गिर गई. जिन अजीत पवार के समर्थन से फडणवीस ने सरकार बनाने का दावा किया, उन्होंने पहले ही उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और अजीत पवार के साथ दो विधायक भी नहीं बचे. इसका विश्वास हो जाने पर देवेंद्र फडणवीस को भी जाना पड़ा. भ्रष्ट और गैरकानूनी तरीके से महाराष्ट्र की गर्दन पर बैठी सरकार सिर्फ 72 घंटों में विदा हो गई.”

‘बीजेपी से हमारा व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है…’

सामना में लिखा, ”बहुमत खरीदकर राज करने का प्रयास विफल हो गया. लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होनी चाहिए. लोगों को अच्छी सरकार मिलने का अधिकार है, ऐसा मत सर्वोच्च न्यायालय ने व्यक्त किया. बीजेपी से हमारा व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है लेकिन जाते-जाते फडणवीस ने हम पर आरोप लगाए हैं. उन्होंने शिवसेना के सत्ता हेतु लाचार होने की बात कही है. ये कहना वैसे ही है जैसे उल्टा चोर कोतवाल को डांटे.”

‘पलटी मारकर क्या मिला?’

सामना में लिखा, ”शिवसेना को सत्ता हेतु लाचार कहनेवाले पहले खुद पर जमी धूल को देख लें. अजीत पवार से उन्हें ‘नजदीकी’ चलती है लेकिन शिवसेना के साथ जो बात तय हुई थी, उससे पलटी मारकर क्या मिला? सत्ता की लाचारी न होती और दिए गए वचनों का पालन करने की इच्छा होती तो भाजपा पर ये नौबत न आती.”

‘महाराष्ट्र में नहीं कर पाए’

”तुमने झूठ बोला और शिवसेना को झूठा साबित करने का प्रयास किया. इसलिए महाराष्ट्र की स्थिरता और स्वाभिमान के लिए हम तीन पार्टियों ने एक साथ आने का फैसला लिया. महाराष्ट्र में स्थिरता आदि के लिए 2014 में जब भाजपा ने राष्ट्रवादी का समर्थन लिया था, उस समय वो लाचारी नहीं थी तो फिर अब लाचारी कैसे? बीजेपी की विफलता ये है कि उन्होंने दूसरे राज्यों में जो किया वो महाराष्ट्र में नहीं कर पाए.”

‘पार्टी की इतनी बदनामी नहीं हुई थी’

सामना में लिखा, ”हमारे द्वारा 162 लोगों का आंकड़ा दिखाने के बावजूद उन्होंने हमें झूठा ठहराने का घृणित प्रयास किया. अब बहुमत परीक्षण के पहले ही फडणवीस की सरकार भाग निकली. महाराष्ट्र में अब तक किसी भी सरकार या राजनीतिक पार्टी की इतनी बदनामी नहीं हुई थी. अजीत पवार ने आखिरी क्षणों में अपना वस्त्रहरण रोक लिया लेकिन भाजपा पूरी तरह से नग्न हो गई. महाराष्ट्र का उद्दंड शोरगुल थम गया. अब सब शुभ होगा!”

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