किरायेदार हों या मकान मालिक, नए ड्राफ्ट रेंट कानून की ये 5 बातें जानना बहुत जरूरी

मालिक मकान या दुकान किराए पर देने के लिए किराएदार से दो महीने से ज्यादा का सिक्योरिटी डिपॉजिट की मांग नहीं कर सकेंगे.

नई दिल्ली: मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में जल्द ही मॉडल टिनैंसी ऐक्ट लाने की तैयारी कर रही है ताकि मकान मालिकों और किराएदारों के बीच होने वाले विवादों को कम किया जा सके. साथ ही ज्यादा से ज्यादा संपत्तियों को किराए पर दिया जा सके. संपत्ति के मालिक और किराएदार के हितों को ध्यान में रखते हुए बनाए जा रहे ऐक्ट के मसौदे का काम अंतिम चरण में है.

मसौदे के अनुसार, सभी Tenancy Agreements के रजिस्ट्रेशन के लिए हर राज्य में एक Independent Rent Authority का गठन करने का प्रस्ताव है. और साथ ही किराए पर मकान या दुकान लेने देने के मामलों में होने वाले विवादों का जल्द निपटारा करने के लिए स्पेशल रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल की स्थापना का भी प्रस्ताव है.

किराएदार के लिए-
मकान या दुकान किराए पर देने के लिए किराएदार से दो महीने से ज्यादा का सिक्योरिटी डिपॉजिट की मांग नहीं कर सकेंगे मालिक.
मकान मालिक एग्रीमेंट की अवधि के बीच में अपनी मर्जी से किराए में बढ़ोत्तरी नहीं कर सकेंगे.
किराए में बदलाव करने के लिए मकान मालिक को तीन महीने पहले नोटिस देना होगा.
एग्रीमेंट की अवधि समाप्त होने पर मकान मालिक को अपनी लेनदारी काटने के बाद सिक्योरिटी मनी वापस करनी होगी.
अगर कोई विवाद होता है तो मकान मालिक किराएदार की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद नहीं कर सकेगा.
मकान मालिक को घर के रिपेयर, मुआयने, या किसी और काम से आने के लिए 24 घंटे पहले लिखित नोटिस देना होगा.
रेंट एग्रीमेंट में लिखी समय सीमा से पहले किराएदार को तब तक नहीं निकाला जा सकता जब तक उसने लगातार दो महीनों का किराया न दिया हो या वो प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल कर रहा हो.

मकान मालिक के लिए-
अगर किराएदार निर्धारित समय से ज्यादा मकान में रहता है तो उसे पहले दो महीनों के लिए दोगुना किराया देना होगा. यदि वह दो महीने से ज्यादा समय तक रहता है तो उसे चार गुना किराया देना होगा.
मकान की देखभाल और रखरखाव की जिम्मेदारी मकान मालिक और किराएदार दोनों की होगी.
अगर मकान मालिक कोई रेनोवेशन करवाता है तो उसे काम खत्म होने के एक महीने बाद किराएदार की सलाह से किराया बढ़ाने की इजाज़त होगी.

1.1 करोड़ प्रॉपर्टीज पड़ी हैं खाली
सरकारी सर्वे के मुताबिक, शहरी इलाकों में 1.1 करोड़ प्रॉपर्टीज इसलिए खाली पड़े हैं क्योंकि उनके मालिकों को लगता है कि कहीं किराएदार उनकी प्रॉपर्टी हड़प न ले. उनके इसी डर को खत्म करने और अपनी सम्पत्ति को किराए पर देने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ये मॉडल एक्ट तैयार किया है.

मॉडल रेंटल एक्ट में कहा गया है कि रेंट एग्रीमेंट होने के बाद मकान मालिक और किराएदार दोनों को अथॉरिटी को सूचना देनी होगी. रेंट एग्रीमेंट में मासिक किराया, किराए पर रहने की अवधि, मकान में आंशिक या मुख्य रिपेयर कार्य के लिए जिम्मेदारी आदि की जानकारी देनी होगी. बाद में विवाद पैदा हुआ तो मकान मालिक या किराएदार अथॉरिटी के पास जा पाएंगे.

यदि कोई किराएदार दो महीने तक किराया नहीं देता है तो मकान मालिक रेंट अथॉरिटी की शरण ले सकता है. मसौदे में कहा गया है कि अगर अथॉरिटी के पास शिकायत जाने के एक महीने के अंदर किराएदार बकाया रकम मालिक को दे देता है तो उसे आगे रहने दिया जाएगा.

राज्य सरकारों की मर्जी होगी तो वे यह कानून अपने यहां भी लागू कर सकेंगी. हालांकि, वहां यह कानून पिछली तारीखों से लागू नहीं होगा. दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में वैसे हजारों प्रॉपर्टी मालिकों को कोई राहत नहीं मिलेगी जिन्हें प्राइम कमर्शल लोकेशन पर भी पुराने अग्रीमेंट्स के मुताबिक बेहद कम किराया मिल रहा है. इस मुद्दे पर जो मुकदमे चल रहे हैं, वे चलते रहेंगे.

अगस्त में मिल सकती है कैबिनेट की मंजूरी
सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बनाया गया मंत्रियों का समूह इस पर तेजी से काम कर रहा है. मंत्रियों के इस समूह में कानून मंत्री और आवासीय मंत्री शामिल है. इस मॉडल टिनैंसी ऐक्ट के मसौदे को लेकर जून में दो बैठक हुई. उम्मीद जताई जा रही है कि अगस्त महीने में इस मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है. जुलाई के अंत में फिर बैठक होगी.