निर्भया गैंगरेप: अब एक फरवरी को भी नहीं होगी सजा! तुरंत फांसी नहीं है डेथ वारंट का मतलब

साल 2012 दिल्ली गैंगरेप के दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी करना सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली जेल मैनुअल के निर्धारित कानून का कथित उल्लंघन बताया जा रहा है.

सात जनवरी को दिल्ली की एक अदालत ने साल 2012 के दिल्ली गैंगरेप मामले के चार दोषियों मुकेश, अक्षय, विनय शर्मा और पवन गुप्ता के खिलाफ डेथ वारंट जारी किया और उनकी फांसी की तारीख 22 जनवरी निर्धारित की गई थी.

यह डेथ वारंट दो दोषी अक्षय और पवन के सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिकाएं दायर करने के पहले दे दी गई. इसके अलावा उनमें से तीन ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर भी नहीं किया था. इसके बाद 17 जनवरी को एक बार फिर से अदालत ने एक फरवरी को फांसी की तारीख निर्धारित करते हुए डेथ वारंट जारी कर दिया.

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली ने शुक्रवार को एक वार्षिक सांख्यिकी रिपोर्ट जारी किया है. इस रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में कोर्ट ने 6 डेथ वारंट जारी किए हैं, लेकिन लगभग सभी केस को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2019 में जारी किए गए छह डेथ वारंट में से एक को सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि कानून के तहत दोषी को मिलने वाले सभी उपचार समाप्त नहीं हुए थे. शीर्ष अदालत द्वारा तीन अन्य डेथ वारंट को भी इसी आधार पर रोक दिया गया.

Supreme Court
Supreme Court

बाकी दो डेथ वारंट में से एक को बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि यह एकतरफा है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोनों दोषियों की मौत की सजा को आजीवन कारावास की बदल दिया था. एक अन्य डेथ वारंट मद्रास हाई कोर्ट द्वारा इस आधार पर रोक दिया गया था कि याचिकाकर्ता द्वारा डेथ वारंट नहीं मांगा गया था. इसके साथ ही याचिकाकर्ता का राज्यपाल के समक्ष दया याचिका दायर करने का अधिकार भी अभी लंबित है.

बता दें कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब साल 2012 दिल्ली गैंगरेप के दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी करना सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली जेल मैनुअल द्वारा निर्धारित कानून का कथित उल्लंघन बताया जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि एक दोषी को फांसी पर भेजने की प्रक्रिया क्या है?

फांसी का फरमान है डेथ वारंट, मौत नहीं 

डेथ वारंट में मृत्युदंड के दोषी को फांसी की तारीख निर्धारित की जाती है. साथ ही दोषी को फांसी देने के अंतिम चरणों में से एक प्रक्रिया है. यह आमतौर पर एक अपराधी द्वारा सभी कानूनी उपायों को समाप्त करने के बाद जारी किया जाता है.

वहीं, कानूनी विशेषज्ञों ने डेथ वारंट की शुद्धता पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोषी को सजा सुनाए जाने से पहले उसके सभी कानूनी उपाय समाप्त हो जाने चाहिए. इसी सवाल पर वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने कहा कि दोषियों को राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका पहले ही दायर करना चाहिए और इसके साथ ही डेथ वारंट देने से पहले ही निर्णय लिया जाना चाहिए.

ये भी पढ़ें – निर्भया गैंगरेप के चारों आरोपियों को 1 फरवरी, सुबह 6 बजे दी जाएगी फांसी

केजरीवाल पर बरसीं निर्भया की मां, चुनाव लड़ने की अटकलों को किया खारिज

Related Posts