प्रज्ञा ठाकुर ने तीन घंटे के अंदर दूसरी बार मांगी माफी, राहुल गांधी पर साधा निशाना

प्रज्ञा ठाकुर ने बगैर नाम लिए राहुल गांधी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सदन के एक सदस्य ने मुझे आतंकी कहा. जबकि मेरे ऊपर लगे आरोप साबित नहीं हुए हैं.
Pragya Thakur apologizes, प्रज्ञा ठाकुर ने तीन घंटे के अंदर दूसरी बार मांगी माफी, राहुल गांधी पर साधा निशाना

मध्य प्रदेश के भोपाल से लोकसभा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने अपने बयान पर माफी मांग ली है. प्रज्ञा ठाकुर ने लोकसभा में गोडसे को देशभक्त बताया था. प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि अगर किसी को ठेस पहुंची हो तो मांफी मांगती हूं. वहीं प्रज्ञा ठाकुर ने बगैर नाम लिए राहुल गांधी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि मेरे बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया और सदन के एक सदस्य ने मुझे आतंकी कहा. जबकि मेरे ऊपर लगे आरोप साबित नहीं हुए हैं.

गुरुवार को रक्षा मंत्रालय की संसदीय कमेटी से प्रज्ञा ठाकुर को बाहर कर दिया गया था. बीजेपी ने भी प्रज्ञा ठाकुर के बयान से किनारा किया था.

वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि ”आतंकी प्रज्ञा ने आतंकी गोडसे को देशभक्त कहा है.”

लोकसभा में क्या हुआ था?

प्रज्ञा ठाकुर ने बुधवार को लोकसभा में बहस के दौरान महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ कह दिया जिसका विपक्षी सांसदों ने पुरजोर विरोध किया था.

स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप बिल पर बहस के दौरान डीएमके सांसद ए राजा ने नाथूराम गोडसे के एक बयान का हवाला देते हुए बताया कि गोडसे ने गांधी को क्यों मारा. इस पर बीच में टोकते हुए प्रज्ञा ठाकुर ने कहा ‘आप एक देशभक्त का उदाहरण नहीं दे सकते.’

ए राजा ने कहा कि गोडसे ने खुद स्वीकार किया कि उसने गांधी की हत्या करने से पहले 32 साल तक उनके लिए मन में असंतोष को पाले रखा था. ए राजा ने कहा कि एक खास फिलॉसफी की वजह से गोडसे ने गांधी को मारा. इस बीच जब प्रज्ञा ठाकुर ने हस्तक्षेप किया तो विपक्षी सांसदों ने विरोध किया जिसके बाद बीजेपी सांसदों ने प्रज्ञा से बैठने को कहा.

ट्वीट कर दी थी सफाई

प्रज्ञा ठाकुर ने ट्वीट कर इस मामले पर गुरुवार को सफाई दी थी. उन्होंने ट्वीट कर लिखा था, कभी-कभी झूठ का बबण्डर इतना गहरा होता है कि दिन मे भी रात लगने लगती है किंतु सूर्य अपना प्रकाश नहीं खोता. पलभर के बबण्डर में लोग भ्रमित न हों सूर्य का प्रकाश स्थाई है. सत्य यही है कि कल मैंने ऊधम सिंह जी का अपमान नहीं सहा बस.

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