21 सितंबर से नौंवी से लेकर बारहवीं के छात्र जा सकेंगे स्कूल, पढ़ें केंद्र की पूरी गाइडलाइन

अनलॉक-4 (Unlock-4) के तहत स्कूल दोबारा खुलने जा रहे हैं. इस दौरान नौंवी से बारहवीं की क्लासेस चलेंगी जिसे लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने कुछ नियम जारी किए हैं.

  • Manav Yadav
  • Publish Date - 10:45 pm, Tue, 8 September 20

कोरोनाकाल में बंद चल रहे स्कूल-कॉलेजों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (Standard Operating Procedure) जारी किया है. मंत्रालय ने नौंवी से लेकर बारहवीं तक की कक्षाओं को आंशिक रूप से खोलने के लिए ये प्रोसीजर जारी किया है.

अनलॉक-4 की प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार ने नौंवी से बारहवीं तक के छात्रों को स्वैच्छिक आधार पर अपने माता-पिता की लिखित सहमति लेकर स्कूल जाकर टीचर से सलाह लेने की अनुमति दी है. 21 सितंबर से ये व्यवस्था लागू हो जाएगी.

पालन करनी होंगी ये सावधानियां

छात्रों और स्कूल प्रशासन के लिए कुछ आम सावधानियां जारी की गई हैं. फेस मास्क पहनना सभी के लिए अनिवार्य होगा, 6 फीट की दूरी रखनी होगी, समय-समय पर हाथ धोने या सैनिटाइज करने होंगे, खांसते और छींकते वक्त मुंह और नाक को ढकना होगा, थूकना मना होगा, अपने स्वास्थ्य की सेल्फ मॉनीटरिंग करनी होगी, जैसे ही तबियत खराब महसूस हो तुरंत रिपोर्ट करें, जहां संभव हो आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करने की सलाह दी जाए.

कक्षा 9 से लेकर 12 तक के सभी स्कूलों को अपने परिसर में कुछ इंतजाम सुनिश्चित करने होंगे. ऑनलाइन पढ़ाई की इजाजत बनी रहेगी और इसको आगे बढ़ावा दिया जाएगा. कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक के छात्रों को स्कूल जाने की अनुमति स्वैच्छिक आधारित होगी. अगर किसी छात्र को ज़रूरत महसूस होती है तो टीचर से सलाह लेने स्कूल जा सकता है लेकिन उसे अपने माता-पिता की लिखित सहमति अनिवार्य होगी. भीड़ की स्थिति को रोकने के लिए छात्रों को स्कूल आने का अलग-अलग समय दिया जाएगा.

स्कूलों को रखना होगा इन बातों का ध्यान

खुलने से पहले स्कूलों को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा. केवल कंटेनमेंट जोन के बाहर के स्कूलों को ही खोलने की इजाजत होगी. कंटेनमेंट जोन में रहने वाले छात्र, टीचर या अन्य स्टाफ को स्कूल आने की इजाजत नहीं होगी. इन सभी को किसी भी कंटेनमेंट जोन में ना जाने की सलाह दी जाती है.

स्कूल खोलने से पहले जिन इलाकों में छात्रों और टीचर का संवाद होना है उसको सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन से सैनिटाइज किया जाए. ऐसे सभी जगहों पर खास ध्यान दिया जाए जहां पर निरंतर हाथ लगाए जाते हैं. जिन स्कूलों को क्वॉरेंटाइन सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया गया था उनको अच्छे से सैनिटाइज किया जाए.

ऑनलाइन टीचिंग/टेली काउंसलिंग जैसे कामों के लिए 50 फ़ीसदी टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को स्कूल बुलाया जा सकता है. 9 से 12 तक के छात्रों के पास विकल्प होगा कि वो वर्चुअल/रिमोटली क्लास अटेंड करें या शारीरिक रूप से. हालांकि यह स्वैच्छिक होगा और माता-पिता की लिखित सहमति जरूरी होगी.

स्कूल प्रशासन को बायोमैट्रिक अटेंडेंस की जगह दूसरे वैकल्पिक इंतजाम करने होंगे, जिससे संपर्क रहित अटेंडेंस हो सके. छात्र और टीचर 6 फीट की दूरी हर समय सुनिश्चित करेंगे और सिटिंग प्लान इसी आधार पर बनाया जाएगा.