VIDEO: ‘अखिलेश यादव ने औरंगजेब की तरह पिता का पद छीना और कैद कर दिया’- अमर सिंह

उत्तर प्रदेश में गठबंधन टूटने के बाद बहुजन समाज पार्टी ने सारे छोटे-बड़े चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है. पूर्व सपा नेता अमर सिंह ने गठबंधन को लेकर अखिलेश पर टिप्पणी की है.

लखनऊ: समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन खत्म होने के बाद पूर्व सपा नेता अमर सिंह ने अखिलेश यादव पर चुटकी लेते हुए कहा, ‘अखिलेश का ये तो होना ही था. सजी सजाई थाली उनको विरासत में मिली थी. जिसमें बाप-चाचा का पसीना था. उससे बना राजनीतिक पकवान राजकुमार को मिला. राजकुमार ने खाया-फेंका और दुरुपयोग किया.

उन्होंने कहा, ‘बाप को बहादुर शाह ज़फ़र की तरह अंतिम सफर में छोड़ दिया. औरंगजेब की तरह उनका पद छीनकर कैद कर दिया और औरंगजेब की तरह ही चाचा शिवपाल और मुझे इस अपराध के लिए हटाया कि ये हमारे बाप का आदमी है.’

‘बुआ को इस कच्चे खिलाड़ी के बारे में पता चल गया. सारी मलाईदार सीटें बुआ ने ले ली और कमज़ोर बबुआ के लिए छोड़ दीं. लखनऊ में शत्रुघ्न का पूनम चमकाया जो अंधेरा हो गया, बनारस में एक सिपाही को उतारा जो पता ही नहीं चला कि वह है या नहीं.’

‘भारतीय राजनीति के आधुनिक कालिदास’

अमर सिंह ने कहा, ‘भारतीय राजनीति के आधुनिक कालिदास हैं अखिलेश. आम के गुठली को फेंका जाता है इसलिए मायावती ने अखिलेश को फेंक दिया. मुसलमानों को टिकट न दिया जाए यह अखिलेश कह सकता है. हमारी संवेदना एक बीमार, लाचार, बर्बाद मुलायम सिंह के साथ है. राजनेता मुलायम के साथ नहीं. बन्दर के हाथ में स्तूरा दिया है धृतराष्ट्र की तरह. अखिलेश एक फेल इंजीनियर हैं वो अपने एक सरदार दोस्त के साथ कनाडा भाग गए थे.’

बसपा सारे छोटे-बड़े चुनाव अकेले लड़ेगी

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सारे छोटे-बड़े चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को ट्विटर पर इसकी जानकारी दी. मायावती ने इसके पीछे लोकसभा चुनाव के बाद ‘सपा के व्‍यवहार में बदलाव’ को जिम्‍मेदार बताया है.

बसपा प्रमुख ने ट्वीट किया, “सपा के साथ सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाने के साथ-साथ सन् 2012-17 में सपा सरकार के बीएसपी व दलित विरोधी फैसलों, प्रमोशन में आरक्षण विरूद्ध कार्यों एवं बिगड़ी कानून व्यवस्था आदि को दरकिनार करके देश व जनहित में सपा के साथ गठबंधन धर्म को पूरी तरह से निभाया.”

मायावती ने आगे लिखा, “परन्तु लोकसभा आमचुनाव के बाद सपा का व्यवहार बीएसपी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा करके बीजेपी को आगे हरा पाना संभव होगा? जो संभव नहीं है. अतः पार्टी व मूवमेन्ट के हित में अब बीएसपी आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ेगी.”

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