BIMSTEC देश पीएम मोदी के शपथ ग्रहण में होंगे शामिल, जानिए क्या है कूटनीतिक मायने?

BIMSTEC में लगभग 14 एजेंडे तय हैं, जिसके तहत पर्यटन, जलवायु परिवर्तन, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आपस में आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर देने की बात कही गई है.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को शपथ ग्रहण सामारोह के लिए इस बार BIMSTEC देशों को आमंत्रित किया है. जानकार बतातें हैं कि भारत को कूटनीतिक रूप से इसका काफ़ी फ़ायदा मिलने वाला है.

इसके फ़ायदे को समझने के लिए इतिहास में जाना होगा. साल 1997 में SAARC (South Asian Association for Regional Cooperation) समूह से अलग BIST-EC इकॉनोमिक कॉर्पोरेशन नाम से एक क्षेत्रीय समूह की स्थापना की गई थी.

SAARC का गठन आठ दिसंबर 1985 को दक्षिण एशिया में आपसी सहयोग से शांति और प्रगति हासिल करने के उद्देश्य से किया गया था. सार्क के सात सदस्य देश हैं – भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव.

दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय संगठन SAARC में भारत और पाकिस्तान की वजह से अड़चन आती रहती थी. इसी वजह से एक अलग संगठन बनाया गया. इसमें पाकिस्तान और मालदीव के अलावा सारे देश शामिल हैं.

उस समय बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाइलैंड इस ग्रुप के सदस्य थे. आगे चलकर 1997 में म्यांमार भी इस संगठन में शामिल हो गया. जिसके बाद इसका नाम BIMST-EC रखा गया.

इसके बाद साल 2004 में नेपाल और भूटान भी इसके सदस्य बन गए. ऐसे में इसके नाम का अर्थ बदलते हुए इसे BIMSTEC (बे ऑफ़ बंगाल इनिशिएटिव फ़ॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक कोऑपरेशन) कर दिया गया.  इसका मुख्यालय ढाका, बांग्लादेश में है.

आज इस समूह में कुल सात देश हैं. श्रीलंका, थाइलैंड, भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की पहुंच बंगाल की खाड़ी से है. वहीं नेपाल और भूटान हालांकि जमीन से घिरे हैं मगर उनका पोर्ट ऐक्सेस बंगाल की खाड़ी के पास है.

सभी सदस्य देश चाहते हैं कि इस संगठन के ज़रिए ब्लू इकनॉमी को बढ़ावा मिले. इसके अलावा आतंकवाद के मुद्दे पर भी साथ लड़ाई लड़ने को लेकर इनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

BIMSTEC में लगभग 14 एजेंडे तय हैं, जिसके तहत पर्यटन, जलवायु परिवर्तन, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आपस में आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर देने की बात कही गई है. फ़िलहाल भारत-श्रीलंका, भारत-नेपाल या म्यांमार-थाइलैंड के बीच व्यापार व्यवहार है लेकिन भारत-थाइलैंड और नेपाल-बांग्लादेश के बीच अभी भी व्यापार काफी कम है.

कई जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में जापान भी इस समूह का हिस्सा बन सकता है क्योंकि भारत के साथ इनके अच्छे संबंध हैं. इसके अलावा जापान पूंजी और तकनीक के मामले में काफी समृद्ध है और समूह के साथ जुड़ने से काफी फ़ायदा हो सकता है.

हालांकि एक सवाल यह है कि अगर जापान को जोड़ा गया तो फिर चीन को भी समूह से जोड़ना होगा.. चीन कई बार साथ जुड़ने को लेकर अपनी इच्छा ज़ाहिर कर चुका है और अगर इन दोनों को साथ जोड़ा गया तो फिर समूह में तनाव होगा.

गुरुवार को नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण सामारोह में इन देशों को शामिल करने के पीछे कुल मिलाकर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिश मानी जा रही है. जिससे कि वो भारत के अंदर आतंकवाद को बढ़ावा देने पर रोक लगाए और भारत के साथ शांति वार्ता प्रारंभ हो सके.

इतना ही नहीं भारत का इन सभी देशों के साथ संबंध भी प्रगाढ़ होंगे जो लंबे समय में भारत के लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.

बता दें कि पीएम मोदी 30 मई को नए कार्यकाल के लिए शपथ लेंगे. इस सामारोह में शामिल होने को लेकर सभी BIMSTEC देश (बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल और भूटान) ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि कर दी है.