जब एनटीआर की पत्नी ने माथा पीटते हुए कहा, ‘विधवा मैं हुई और वे पंडित को नहीं लेने दे रहे मेरा नाम’

18 जनवरी को दक्षिण की राजनीति के शिखर पर रहे एनटी रामाराव की पुण्यतिथि होती है, इसी तारीख को साल 1996 में वह दुनिया को अलविदा कह गए थे. इस मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें.

NT Rama Rao full story, जब एनटीआर की पत्नी ने माथा पीटते हुए कहा, ‘विधवा मैं हुई और वे पंडित को नहीं लेने दे रहे मेरा नाम’

दक्षिण की राजनीति का जिक्र आए और उसके शिखर पुरुषों की बात चले तो तीन बार आंध्र प्रदेश के सीएम रहे नंदमूरि तारक रामाराव यानी एनटी रामाराव का नाम सबसे पहले आएगा. 1949 में मना देशम नाम की फिल्म से फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले एनटी रामाराव राजनीति में आए तो उसमें भी हिट रहे. 18 जनवरी को एनटी रामाराव की पुण्यतिथि होती है, इसी तारीख को साल 1996 में वह दुनिया को अलविदा कह गए थे. इस मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें.

सत्ता को नाथने राजनीति में आए

दिग्गज पत्रकार प्रभाष जोशी ने अपने लेख ‘ऐसी रामाराव की गत हुई’ में रामाराव के जीवन के उत्तरार्ध की कई महत्वपूर्ण बातें लिखी हैं. वे बताते हैं कि जिस परिवार की जिम्मेदारियों को किनारे करके वे राजनीति में आए थे उसी ने उनकी नैया डुबो दी. सबसे पहले एनटी रामाराव के अपमान का वो किस्सा जहां से उन्होंने तेलुगुदेशम पार्टी की शुरुआत की.

साल 1982 था. एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रामाराव नेलोर पहुंचे थे और वहां तरोताजा होने के लिए सरकारी गेस्ट हाउस गए. वहां सभी कमरे भरे हुए थे, सिर्फ एक कमरा खाली था और वह राजस्व मंत्री जनार्दन रेड्डी के लिए अलॉट हो रखा था. उस समय तक रामाराव 300 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके थे और दक्षिण में मनोरंजन का दूसरा नाम बन चुके थे. उन्होंने इतने धार्मिक रोल किए थे कि फैन्स उनको पूजने लगे थे.

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एनटीआर ने 17 बार कृष्ण का रोल किया था.

ऐसे सुपरस्टार के लिए गेस्टहाउस कर्मचारियों ने कमरा तो खोला लेकिन यह भी कह दिया कि मंत्री जी आ गए तो हमारी खाल उधेड़ दी जाएगी. रामाराव ने इसे हल्के में लिया लेकिन हुआ वही जिसका डर था. रामाराव जब नहा रहे थे तो मंत्री जी आ पहुंचे और देखा कि उनका कमरा इस्तेमाल में है तो आगबबूला हो बैठे. उन्होंने कर्मचारियों को धमकाया और जमकर गालियां दीं.

आहत एनटीआर वहां से लौटकर मद्रास आए तो अपने दोस्त नागी रेड्डी से मुलाकात की. रेड्डी से उन्होंने कहा कि कितनी ही दौलत शोहरत हो, बिना राजनैतिक सत्ता के सब बेकार है. उन्होंने वहीं घोषणा की कि वे राजनीति में आएंगे. हैदराबाद के रामकृष्ण स्टूडियो में मीडिया को बुलाकर उन्होंने नाटकीय अंदाज में कहा कि अब वे साठ साल के हो रहे हैं, समाज सेवा के लिए राजनीति में आ रहे हैं. उन्होंने कहा ‘मैंने अपनी संपत्ति सात बेटों और चार बेटियों में बांट दी है ताकि परिवार की जिम्मेदारियों से मुक्त होकर आंध्र प्रदेश की सेवा में लग सकूं.’

जब पूरी तरह अकेले पड़ गए एनटीआर

पार्टी की शुरुआत से सीधे चलते हैं उनके अंतिम दिनों की तरफ जब एक तरफ उनका पूरा परिवार था तो दूसरी तरफ उनकी दूसरी पत्नी लक्ष्मी पार्वती. कहा जाता है कि लक्ष्मी पार्वती राजनैतिक रूप से महत्वाकांक्षी महिला थीं जिन्होंने अपना मतलब साधने के लिए 70 बरस के रामाराव का इस्तेमाल किया. सवाल ये है कि लक्ष्मी रामाराव के इतने करीब कैसे आईं.

एक बार फिर थोड़ा सा फ्लैशबैक में चलने का समय है. साल 1989 में एनटीआर चुनाव हारकर विपक्ष में बैठे थे और वह समय उनके लिए जबरदस्त अकेलापन लेकर आया. वे इतने अकेले हो गए कि परिवार वालों ने उनसे मिलना जुलना तक बंद कर दिया. कई बार रामाराव राजनैतिक दौरों से लौटकर भूखे ही सो जाते थे. अकेले खाना खाने से परेशान हो जाते तो अपने एक पत्रकार दोस्त को बुला लेते थे.

उनकी पहली पत्नी बासवतारकम्मा की मृत्यु 1984 में हो चुकी थी. इधर सत्ता जाने के बाद परिवार ने साथ छोड़ दिया तो लक्ष्मी पार्वती उनके करीब आईं. लक्ष्मी पार्वती ने न सिर्फ उन्हें अकेलेपन से उबारा बल्कि नई राजनैतिक पारी खेलने के लिए जोश भी भरा. रामाराव भगवा छोड़कर एक बार फिर पैंट-शर्ट पहनकर चुनाव अभियान में पार्वती के साथ निकले और इस बार वे पिछली बार से भी ज्यादा बहुमत से जीते.

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एनटीआर और चंद्रबाबू नायडू

रामाराव का परिवार और दूसरी पत्नी

18 जनवरी 1996 को एनटीआर की मृत्यु हुई. उससे कुछ दिन पहले उन्होंने अपने परिवार से सार्वजनिक रूप से रिश्ते तोड़ लिए थे. दूसरी तरफ उनकी दूसरी पत्नी लक्ष्मी पार्वती को उनके परिवार ने अपनी सौतेली मां मानने से इनकार कर दिया था. रामाराव ने बस गलती ये की कि पार्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं कर पाए. हां, अपने दामाद चंद्रबाबू नायडू को जरूर पीठ में छुरा घोंपने वाला धोखेबाज कहते थे जिन्होंने रामाराव को सीएम और पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी से हटाकर खुद कब्जा कर लिया था.

निधन के बाद हुआ था जमकर तमाशा

रामाराव के निधन के बाद परिवार में जमकर तमाशा हुआ. परिवार रामाराव का शव पुराने घर ले जाना चाहता था लेकिन लक्ष्मी पार्वती शव को हाथ नहीं लगाने दे रही थीं. वे इस बात पर राजी हुईं कि शव को लालबहादुर स्टेडियम में जनता के अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा. वहां भी वह सिर के पास बैठी रहीं और जताती रहीं कि शव पर उनका एकाधिकार है.

NT Rama Rao full story, जब एनटीआर की पत्नी ने माथा पीटते हुए कहा, ‘विधवा मैं हुई और वे पंडित को नहीं लेने दे रहे मेरा नाम’

उधर परिवार वालों ने अपने तरीके से बदला लिया. उन्होंने रामाराव की तस्वीरें पहली पत्नी बासवतारकम्मा के साथ ही लगवाईं. पंडित ने भी जहां-जहां पत्नी का नाम लिया जाना था वहां बासवतारकम्मा का ही नाम लिया गया. लक्ष्मी पार्वती माथा पीटते हुए मीडिया के सामने कहती रहीं कि सिंदूर मेरा पुंछा, चूड़ियां मेरी फूटीं, विधवा मैं हुई और वे मेरा नाम तक नहीं लेने दे रहे, उस औरत का नाम ले रहे जो 11 साल पहले मर गई.

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