CAA पर रोक लगाने से SC का इंकार, केंद्र को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का दिया निर्देश

सीजेआई एसए बोबडे ने कहा कि फिलहाल हम सरकार को प्रोविजनल नागरिकता देने के लिए कह सकते हें. हम एक पक्षीय तौर पर रोक नहीं लगा सकते हैं.

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर दायर 144 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कोई भी आदेश जारी करने से इंकार कर दिया. याचिकाकर्ताओं की ओर से सीएए कानून पर रोक लगाने से इंकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने कहा कि केंद्र का पक्ष सुने बगैर सीएए और एनपीआर प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाएंगे. सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सीएए को लेकर 83 नई याचिकाएं दायर हो गई हैं. अब नई याचिकाएं स्वीकार नहीं की जाएं. अगर ऐसे ही अर्जी आती रहीं तो हमें जवाब देने के लिए ज्यादा वक्त चाहिए. अटॉर्नी जनरल ने इसके लिए पहले दो फिर चार हफ्ते का समय मांगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए 4 हफ्ते में सभी याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

5 जजों की संविधान पीठ करेगी सुनवाई 

शीर्ष अदालत ने कहा कि नागरिकता कानून के विरोध वाली याचिकाओं पर 4 हफ्ते बाद ही कोई अंतरिम आदेश जारी होगा. साथ ही संकेत दिया कि अगली सुनवाई के बाद 5 जजों की संविधान पीठ सीएए की संवैधानिकता पर सुनवाई करेगी. इस दौरान वेणुगोपाल ने सभी हाईकोर्ट से मांग कि वे सीएए से जुड़े मामलों पर सुनवाई न करें. बेंच ने इस पर सहमती जताई. एजी वेणुगोपाल ने कहा कि कई याचिकाओं में सीएए के साथ एनआरसी समेत अन्य मुद्दों को भी चुनौती दी गई है. तब कोर्ट ने चार हफ्तों में चैंबर बेंच में याचिकाओं पर प्रक्रियागत विचार करने का भी निर्देश दिया.

सुनवाई शुरू होने से पहले अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कोर्ट का माहौल शांत रहना जरूरी है. उन्होंने चीफ जस्टिस से कहा कि इस कोर्ट में कौन आ सकता है और कौन नहीं, इस पर नियम होने चाहिए. अमेरिकी और पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट में भी कोर्ट रूम के अंदर आने वालों के लिए कुछ नियम हैं.

याचिकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अप्रैल में नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इसलिए कोर्ट को उससे पहले कुछ करना चाहिए. एनपीआर को 3 महीने के लिए टाला जाए, तब तक जज नागरिकता कानून पर चल रहे विवाद पर फैसला ले सकते हैं. कोर्ट को फैसला करना चाहिए कि इस केस को संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं.

अस्थायी परमिट

वहीं, अटॉर्नी जनरल ने कहा कि केंद्र को असम से जुड़ी याचिकाएं नहीं दी गईं. जो याचिकाएं हमें नहीं दी गईं, उनमें प्रतिक्रिया के लिए समय दिया जाए. चीफ जस्टिस बोलें सिर्फ एक पक्ष को सुनकर फैसला नहीं किया जाएगा. हमें केंद्र को सुनना होगा. असम और त्रिपुरा के मामले अलग हैं.

वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने सीएए के तहत नागरिकता देनी शुरू कर दी है. ऐसे में जिन्हें नागरिकता दे दी जाएगी, उनसे नागरिकतावापस नहीं ली जा सकेगी. इसलिए सीएए पर पर रोक लगाई जाए. चीफ जस्टिस ने कहा कि हम केंद्र से शरणार्थियों को कुछ अस्थायी परमिट देने के लिए कह सकते हैं.

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सीएए पर अब और याचिकाएं दायर होने से रोकी जाएं, क्योंकि पहले ही इस मामले में 144 याचिकाएं दायर हो चुकी हैं. अगर सुनवाई के बीच में और याचिकाएं आईं तो हमें हर जवाब दायर करने के लिए और ज्यादा समय चाहिए.

2 हफ्ते बाद होगी असम से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई

वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने असम में सीएए लागू होने से रोकने की मांग की. उन्होंने कहा कि असम में हालात अलग हैं, पिछली सुनवाई से लेकर अब तक वहां 40 हजार लोग आ चुके हैं. इस पर अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से अपील कि असम से जुड़ी याचिकाओं को 2 हफ्ते बाद अलग रखा जाए. इसके अलावा 83 अन्य याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मिले.

चीफ जस्टिसने कहा कि हम असम से जुड़ी याचिकाओं पर 2 हफ्ते बाद सुनवाई करेंगे. जो याचिकाएं केंद्र के सामने नहीं आईं, उन पर जवाब देने के लिए केंद्र को 4 हफ्ते दिए जाते हैं. इस मामले में सभी याचिकाएं हमें सूचीबद्ध करके दी जाएं. कुछ मामलों को हम चेंबर में सुन सकते हैं.

सीएए के तहत 31 दिसंबर 2014 से भारत में आए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन और पारसी समुदायों के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है. लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन बिल को मंजूरी दी थी. इसके बाद यह कानून बन गया. इसके विरोध में पूर्वोत्तर समेत देशभर में प्रदर्शन हुई. इस दौरान हुई हिंसा में यूपी समेत कई राज्यों में लोगों की जान भी गई.

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