दुनिया की सबसे मशहूर बाइक पर टैक्स लगाने के लिए ट्रंप की भारत को झिड़की, जानिए झगड़े की जड़

हार्ले डेविडसन बाइक पर भारत लंबा-चौड़ा टैक्स लगाता है और उसी को लेकर ट्रंप नाराज़ हैं. बात मगर इतनी ही नहीं है, इस टैक्स को लेकर चल रही रार के पीछे कई पहलू हैं, जानिए

मोदी और ट्रंप की गलबहियों ने दुनिया को जितना हैरान किया था उससे ज्यादा हैरान अब ट्रंप ने भारत को उसकी आयात-निर्यात नीतियों पर निशाना साधकर किया है. ट्रंप लगातार भारत के खिलाफ ज़ुबानी जंग छेड़े हुए हैं. ज़्यादा दिन नहीं हुए जब उन्होंने भारत को टैरिफ किंग कहा था, वो भारत को सबसे ज़्यादा टैक्स लगानेवाला देश करार भी दे चुके हैं और अब तो उन्होंने राष्ट्रीय रिपब्लिकन कांग्रेस कमेटी के वार्षिक स्प्रिंग डिनर में इसे ‘मूर्खता वाला कारोबार’ कह दिया है. इस सबके बीच वो सबसे ज़्यादा नाराज़ मशूहर हार्ले डेविडसन बाइक पर लगाए जानेवाले टैक्स से थे. इसे लेकर उन्होंने साल भर पहले भी बयान दिया था. आइए जानते हैं कि ये पूरा विवाद क्या है..

ट्रंप और टैक्स का झगड़ा
अमेरिका में आर्थिक हालात दुरुस्त करने की तरफ बढ़ चले ट्रंप पुरानी सरकारों की कर नीति को पूरी तरह उलटने पलटने में जुटे हैं. इस सिलसिले में उनके निशाने पर यूरोपियन यूनियन या चीन का आना नया नहीं है लेकिन भारत को पहली बार उनकी तरफ से झटका पिछले साल मार्च में लगा. तब ट्रंप ने बताया कि, ‘पीएम मोदी ने उन्हें फोन करके सूचित किया कि भारत सरकार हार्ले डेविडसन पर लगने वाली ड्यूटी पचास फीसदी तक कम कर रही है.’ ट्रंप ने  आगे तंज़ कसते हुए कहा कि ‘क्या ऐसा करके वो हम पर कोई अहसान कर रहे हैं?’

ज़ाहिर है ट्रंप को मोदी से मिली इस छूट की खबर ने कतई खुश नहीं किया. वो इससे ज़्यादा चाहते थे. मोदी और अपनी बात को सार्वजनिक कर उन्होंने नाखुशी भी सार्वजनिक कर दी जिसके बाद हंगामा होना तय था. पहले ही संरक्षणवाद की नीति पर चल रहे ट्रंप की त्यौरी भारत पर भी चढ़ी हैं ये भारतीय मीडिया को तभी पता चला जब ट्रंप का बयान आया. दरअसल ट्रंप का सिरदर्द वो 800 बिलियन डॉलर का व्यापारिक घाटा है जिसे वो कम करना चाहते हैं, यानि अमेरिका इतनी रकम का सामान दूसरे देशों से खरीदता है बेचने के बजाय. इस घाटे को कम करने के सिलसिले में ही ट्रंप चीन से भिड़े हुए थे क्योंकि उनके घाटे का सबसे बड़ा ज़िम्मेदार चीन ही है.

हार्ले डेविडसन के लिए भारत से भिड़े
चीन के बाद भारत वो दूसरा देश है जो अमेरिका के व्यापारिक घाटे के लिए ज़िम्मेदार माना जा रहा है. अगर बाइक्स की खरीद- बिक्री की बात करें तो अमेरिका का भारत पर आरोप है कि हम तो भारतीय बाइक्स पर टैक्स नहीं लगा रहे हैं लेकिन भारत अमेरिकी बाइक्स पर सौ फीसद तक ड्यूटी लगाकर फायदा उठा रहा है. भारत द्वारा लगाई जा रही महंगी ड्यूटी से हार्ले डेविडसन बाइक महंगी हो जाती हैं और उनकी बिक्री गिर जाती है.
इसे ही ट्रंप ने असमानता भरा व्यवहार बताया था. वैसे आपको बता दें कि सिर्फ भारत ही बाइक पर ड्यूटी नहीं लगाता है बल्कि चीन इसी बाइक पर 30 फीसदी और थाईलैंड 60 फीसदी ड्यूटी लगाता है.

अब भारत की बात करें तो साल 2018 के बजट में सरकार ने उदारता दिखाई. उन्होंने विदेश से बनकर आनेवाली 800 सीसी इंजन से ऊपर की बाइक पर कस्टम ड्यूटी 75% से घटाकर 50 % तक कर दी. अगर बाइक 800 सीसी से कम इंजन की है तो 60 % कस्टम ड्यूटी लगती थी. ट्रंप को पीएम मोदी ने जो खुशखबरी दी वो 800 सीसी इंजन से ऊपर की बाइक के बारे में थी क्योंकि हार्ले डेविडसन की अधिकतर बाइक उसी श्रेणी में आती हैं.

हार्ले डेविडसन का मामला थोड़ा जटिल है. दरअसल इस कंपनी के 13 मॉडल भारत में बेचे जाते हैं जिनमें से 8 को हरियाणा के बावल में एसेंबल किया जाता है यानि  वो अमेरिका से पूरे के पूरे बनकर नहीं आते. सिर्फ दो मॉडल ही अमेरिका से पूरी तरह बनकर भारत आते हैं. जो मॉडल विदेश से तैयार होकर आते हैं उन्हें CBD (Completely Build Units) कहा जाता है जबकि वो मॉडल जिन्हें भारत में ही एसेंबल किया जाता है उन्हें CKD (Completely Knocked Down) कहा जाता है.  अब जटिलता ये है कि भारत ने CBD  मॉडल पर तो ड्यूटी घटाई लेकिन 2018  के बजट में CKD पर 10-15% बढ़ा दी. इस साल के बजट में विदेश से मंगाए जानेवाले पुर्ज़ों की कीमत फिर 10-15% तक पहुंच दी गई है. अब कुल मिलाकर बात ये है कि हॉर्ले डेविडसन उस मूल्य तक नहीं पहुंची जहां तक ट्रंप चाहते थे.

भारत क्यों लगाता है भारी ड्यूटी
भारत में बाइक का सबसे बड़ा बाज़ार है. हार्ले डेविडसन उसे खोना नहीं चाहेगा. हार्ले डेविडसन उसी बड़े बाज़ार के बदले भारत को टैक्स चुकाता है. ये बात समझ लें कि यूं भी हार्ले डेविडसन की बिक्री अच्छी नहीं चल रही है. साल 2017 में उसने 6.7% की गिरावट देखी है. खुद अमेरिका में 8.5% तक उसकी सेल्स गिरी.

एक दिलचस्प बात और बता दें. दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति खुद हार्ले डेविडसन के बड़े फैन रहे हैं. उन्होंने इस बाइक को अमेरिकी आइकन तक कहा है. हालांकि कुछ महीने तक उनके रिश्ते हार्ले डेविडसन से खराब भी रहे जब कंपनी ने अपनी मैन्युफेक्चरिंग यूनिट विदेश में लगाने की बात कह कर ट्रंप की रोज़गार नीति को झटका दिया था. फिर भी अमेरिका के लिए इस बाइक कंपनी की अहमियत बहुत ज़्यादा है. साल 2007 में कंपनी भारत में निवेश के लिए हाथ पांव मार रही थी. कंपनी भारत के यूरो 3 इमिशन कानून पर खरा नहीं उतर रही थी जिसके चलते निवेश फंसा था. अमेरिकी सरकार ने भारत को रिझाने के लिए तब उस 18 साल पुराने बैन को हटा दिया जो हमारे आम पर लगाया हुआ था. अमेरिका का कहना था कि वो सेहत के लिए अच्छा नहीं. आखिरकार भारत ने ढील देते हुए हार्ले डेविडसन को हरी झंडी दे दी. तब भारत ने कंपनी की बाइक्स पर जमकर ड्यूटी लगाई और अमेरिका ने आपत्ति नहीं की. ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद हर पुरानी बात की अनदेखी कर दी है.

ट्रंप की गीदड़भभकियां बेकार
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जब-तब भारतीय बाइक कंपनियों पर भारी ड्यूटी लगाने की धमकियां देते रहे हैं. वो चीन के साथ भी यही कर चुके हैं, लेकिन सच क्या है? सच ये है कि ट्रंप की धमकियां कम से कम बाइक्स के मामले में बेकार हैं. तथ्य ये है कि भारत ने 2016-17 में सिर्फ 2,240 बाइक ही अमेरिका में बेची थीं जिनमें 500 सीसी से ज्यादा पावर वाली महज़ 150 बाइक थीं. भारत के 6 मिलियन डॉलर का ये व्यापार नाकुछ है. ये ना भी हो तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता इसके उलट हार्ले डेविडसन को खासा अच्छा बाजार भारत में मिलता है.
मसलन रॉयल एनफील्ड की बात करते है. इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक 2017 में 7.4 लाख रॉयल एनफील्ड बिकी थीं जिनमें 17,384 विदेश में बेची गईं और उसमें भी महज़ 1 हजार अमेरिका में खरीदी गईं.

अमेरिका और भारत में कई जानकार ट्रंप की इन धमकियों को बेकार बताते हैं. उनका कहना है कि बेहतर कूटनीतिक संबंध बनाए रखने के लिए ऐसे सौदे अक्सर जारी रखे जाते हैं लेकिन समस्या ये है कि ट्रंप को अपनी गिरती लोकप्रियता भी संभालनी है. वो रोज़गार ना दे पाने के मुद्दे पर घिर गए हैं. ऐसे में उन्हें इसके सिवाय कोई रास्ता नहीं दिख रहा कि वो दूसरे देशों को धमकियां दें.

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