12 ब्लॉक वाली कॉलोनी में 14 मस्जिदें, स्कूल 7 और अस्पताल एक भी नहीं: TV9 भारतवर्ष की पड़ताल

ये सारी मस्जिदें सरकारी जमीन पर हैं, पिछले 15-20 साल से हैं लेकिन मुद्दा चुनाव से ठीक पहले उठाया जा रहा है.
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दिल्ली में सरकारी जमीन पर मस्जिद और कब्रिस्तान बनने का मुद्दा पिछले दिनों में काफी तूल पकड़ चुका है. इसकी हकीकत की पड़ताल करने के लिए TV9 भारतवर्ष की टीम दिल्ली की बवाना विधानसभा में जेजे कॉलोनी पहुंची. जेजे कॉलोनी में कुल 12 ब्लॉक हैं और मस्जिदें 14 बन चुकी हैं.

TV9 भारतवर्ष की टीम ने ब्लॉक A, B, C, और D में पड़ताल की और पाया कि यहां की सभी मस्जिदें सरकारी जमीन पर ही बनी हुई हैं. इस लिहाज से देखें तो सांसद प्रवेश वर्मा के आरोपों में काफी सच्चाई देखने को मिल रही है.

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प्रवेश वर्मा ने दिल्ली की सरकारी जमीनों पर मस्जिदें बनने का मुद्दा उठाया है.

हैरानी की बात ये है कि 12 ब्लॉक्स में स्कूल सिर्फ 7 हैं और हॉस्पिटल एक भी नहीं है. जेजे कॉलोनी में करीब ढाई लाख लोगों की आबादी है और कूड़े के ढेर जगह जगह लगे हुए हैं. वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव नजदीक आते देख नेता मस्जिदों की बात कर रहे हैं. लोगों में फूट डालना चाहते हैं इसलिए सिर्फ मस्जिदों की गिनती कर रहे हैं, मंदिरों की नहीं.

A ब्लॉक की मस्जिद

A ब्लॉक की मस्जिद के मुखिया अली अहमद खान ने टीम को बताया कि 2004 में जेजे कॉलोनी बसी. यहां के निवासियों को 18 गज का एक-एक मकान दिया गया. ये मस्जिद भी 2004 में बनी और इसका रजिस्ट्रेशन भी कराया गया था. ये मस्जिद डीडीए की जमीन पर है. अली अहमद का कहना है कि हम चाहते हैं सरकार इस जमीन का पैसा ले ले और ये जमीन हमें इबादत के लिए दे दे. अगर सरकार मस्जिद हटाने को बोलती है तो हम उसमें भी राज़ी हैं.

B ब्लॉक की मस्जिद

B ब्लॉक की मस्जिद 2005 में बनी और ये भी डीडीए की जमीन पर बनी हुई है. मस्जिद के इमाम नजमुल हुदा का कहना है कि कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के कहने पर हमने गुहार लगाई थी लेकिन ये जमीन हमें न मिल सकी. 2005 से लगातार गुहार लगा रहे हैं कि इसके पैसे ले लो और मस्जिद बनाने की अनुमति दे दो. सरकार जैसा कहे हम वैसे करने को तैयार हैं.

C ब्लॉक की मस्जिद

इस मस्जिद के इमाम जहीरुद्दीन का कहना है कि जब ये कॉलोनी बसाई गई तो हमसे वादा किया गया था कि हमें मस्जिद के लिए जगह दी जाएगी, लेकिन आज तक जगह नहीं दी गई. सरकार इसे हटाना चाहती है तो हटाए लेकिन हमें इसका मुआवजा दे और माकूल जगह दे जहां पर हम इबादत कर सकें.

D ब्लॉक की मस्जिद

2004 में बनी इस मस्जिद के इमाम मोहम्मद जफीर का कहना है कि यहां बनी मस्जिद और मदरसा अगर सरकार हटाती है तो हटाए. हम यहां से हटाने को तैयार हैं लेकिन सरकार हमको इसके लिए दूसरी जगह दे दे. सरकार यह बात भी समझे कि हम इंसान हैं, हम यहां आए हैं तो नमाज भी पढ़ेंगे. प्रवेश वर्मा को यहां आकर देखना चाहिए कि यहां पर कितनी मस्जिद हैं और कितने मंदिर हैं. ये बस चुनाव में धर्म का रंग जमा रहे हैं, चुनाव में इसका फायदा उठाना चाहते हैं और लोगों को लड़ाना चाहते हैं.

अब्दुल रहमान का कहना है कि यहां करीब ढाई लाख लोग रहते हैं, उस हिसाब से 14 मस्जिदें ज्यादा नहीं हैं. अगर इंसान यहां पर रहेगा तो उसे गुरुद्वारा, मस्जिद, मंदिर, कब्रिस्तान हर चीज़ की जरूरत होगी. सरकार ने न श्मशान दिया, न मस्जिद दी, न मंदिर दिया, सरकार ने हमें खुले आसमान के नीचे लाकर छोड़ दिया.

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बवाना विधायक रामचंद्र

बवाना से आम आदमी पार्टी के विधायक रामचंद्र का कहना है कि चुनाव आते ही मस्जिदों की बात कर रहे हैं. प्रवेश वर्मा को यह भी देखना चाहिए कि इससे पहले यहां सरकार कांग्रेस और बीजेपी की रही है, उन्होंने इन मस्जिदों के मुद्दे को क्यां नहीं उठाया? ये मस्जिदें तो यहां पर 15-20 साल पहले बन चुकी थीं.

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