, जानें क्या है शारदा और रोज वैली स्कैम? क्यूं मचा है बंगाल में इतना बवाल
, जानें क्या है शारदा और रोज वैली स्कैम? क्यूं मचा है बंगाल में इतना बवाल

जानें क्या है शारदा और रोज वैली स्कैम? क्यूं मचा है बंगाल में इतना बवाल

, जानें क्या है शारदा और रोज वैली स्कैम? क्यूं मचा है बंगाल में इतना बवाल

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल और मोदी सरकार के बीच आजकल ठनी हुई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रोज वैली और शारदा पोंजी घोटालों में पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से सीबीआई की पूछताछ के खिलाफ रविवार शाम से कोलकाता में धरने पर बैठ गयी है. सीबीआई की टीम कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने आई थी, क्योंकि उन्होंने सीबीआई द्वारा भेजे गए समन की अनदेखी की थी. शारदा और रोज वैली घोटाले ने 2013 में पूर्वी भारत में बंगाल और आसपास के कई राज्यों को हिलाकर रख दिया था.

आइए आपको 9 आसान बिंदुओं में बताते हैं क्या है शारदा और रोज वैली चिट फंड घोटाला?

1. शारदा घोटाला एक फाइनेंशियल धोखाधड़ी थी जिसने लाखों निवेशकों को कई गुना रिटर्न के वादे के साथ अपनी योजनाओं में पैसा जमा करने का लालच दिया था. एक आधिकारिक अनुमान में कहा गया है कि शारदा ने अपने चिट फंड के माध्यम से 1200 करोड़ रुपए का घोटाला किया लेकिन कुछ आंकड़े इसे 4000 करोड़ तक भी मानते हैं.

2.विपक्ष ने इस पर आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के चिट फंड समूह के अध्यक्ष सुदीप्त सेन के साथ अच्छे संबंध थे और इसी नजदीकी ने कथित तौर पर निवेशकों और एजेंटों को बोर्ड में शामिल होने में मदद की. विपक्ष का यह भी कहना था कि टीएमसी के राज्यसभा सांसद कुणाल घोष ने शारदा के मीडिया प्रभाग का नेतृत्व किया था और खुद ममता बनर्जी ने दो शारदा कार्यालयों का उद्घाटन किया था.

3.कंपनी ने अपनी साफ-सुथरी छवि बनाए रखने के कई तरीके अपनाए, फुटबॉल क्लब में निवेश करने से लेकर दुर्गा पूजा के आयोजनों को प्रायोजित करने तक, कंपनी ने इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी. TMC के कई नेताओं को शारदा समूह की तरफ से वित्तीय सहायता मिली और राज्य के बाहर के राजनेताओं को भी इस घोटाले से भी काफी लाभ हुआ. शारदा पोंजी घोटाले में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, झारखंड और त्रिपुरा थे.

4.कई गंभीर आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया. घोटाला सामने आने के तुरंत बाद कंपनी प्रमुख सुदीप्त सेन लापता हो गए. कथित तौर पर उसके सारदा ग्रुप द्वारा जारी किए गए चेक बाउंस होने लगे थे जिसके बाद कई दिनों तक पीछा करने के बाद जम्मू और कश्मीर में उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

5.रोज वैली घोटाला, शारदा घोटाले की तुलना में ज्यादा बड़ा घोटाला था और ईडी के अनुमान के अनुसार केवल पश्चिम बंगाल, असम और बिहार से ही 15,000 करोड़ रुपये इकट्ठा कर लिए गए थे. ईडी के अनुसार धन का एक हिस्सा नेताओं को रिश्वत देने के लिए भी इस्तेमाल किया गया था ताकि घोटाला आसानी से चल सके.

6.ईडी ने आरोप लगाया था कि फर्म ने अलग-अलग राज्यों में निवेशकों को 8 से 27 प्रतिशत के बीच निवेश पर रिटर्न का वादा किया था.

7.ईडी ने 2014 में  PMLA(Prevention of Money Laundering Act) के तहत फर्म, उसके अध्यक्ष गौतम कुंडू और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. गौतम कुंडू को 2015 में कोलकाता में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया था. वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है.

8.पूर्वी भारत की बड़ी फिल्म निर्माण कंपनियों में से एक के प्रमुख श्रीकांत मोहता को जनवरी के अंत में रोज वैली को धोखा देने के आरोप में कोलकाता में गिरफ्तार किया गया था. एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि फिल्म निर्माता ने चिट-फंड कंपनी रोज वैली के प्रमुख गौतम कुंडू से 25 करोड़ रुपए लिए थे.

9.सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2014 में मामला सीबीआई को हस्तांतरित करने से पहले शारदा और रोज वैली घोटाले से जुड़ी एसआईटी जांच का नेतृत्व आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार ने किया था. सीबीआई ने उन पर जांच से जुड़े दस्तावेजों को गुम करने का आरोप लगाया था.

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