बाजुओं से हैंडपंप उखाड़कर पाकिस्तान को औकात बता देनेवाला ही असली राष्ट्रवादी!

असली राष्ट्रवादी कौन है? लगता है देश में जारी इस जोरदार चर्चा पर अब विराम लग गया है. भरोसा नहीं होता तो पढ़ लीजिए!

जब आप किसी थिएटर में बैठकर फिल्म देखते हैं तो कुछ देर के लिए आसपास की दुनिया भूल जाते हैं. आप मान लेते हैं कि जो कुछ स्क्रीन पर चल रहा है वही सच है. फिर डेढ़ घंटा बीतता है और आप पॉपकॉर्न के खाली डिब्बे को सीट के नीचे खिसका कर बाहर निकल आते हैं. बाहर निकलने के बाद आप वाकई बाहर आ जाते हैं, फिल्म के साथ थिएटर में ही नहीं रह जाते, मगर लगता है नेताओं को पब्लिक की बुद्धि पर भारी शक है. शक ना होता तो दक्षिणी दिल्ली के बीजेपी प्रत्याशी रमेश विधूड़ी वो ना कहते जो हम आपको सुना रहे हैं, पहले सुन ही लीजिए..
 
 
विधूड़ी जी ने सन्नी देओल को देश का सबसे बड़ा राष्ट्रवादी ठहराया है. सबूत भी दिया है. उन्हें सन्नी का हैंडपंप उखाड़ने वाला पराक्रम अच्छी तरह याद है. ये कोई छोटी बात थी भी नहीं. भला कितने लोग छिप छिपाकर पाकिस्तान की सरहद में घुस पाते हैं. घुस जाएं तो लाहौर के सबसे प्रभावशाली आदमी के मुंह पर हिंदुस्तान ज़िंदाबाद कह आएं ये कितनों में हिम्मत है और ये सब छोड़िए.. भला हैंडपंप उखाड़ लेना.. कोई मज़ाक है क्या?
विधूड़ी जी इसके महत्व को समझते थे. 18 साल बाद भी इस वीरता पूर्ण कृत्य के प्रभाव में हैं. वैसे यदि फिल्म में हैंडपंप उखाड़ लेना सबसे बड़े राष्ट्रवादी होने का सबूत है तो विधूड़ी जी को सन्नी जी के अन्य राष्ट्रवादी कारनामे भी सिलसिलेवार ढंग से बताने थे, मसलन बॉर्डर में पाकिस्तान पर फतह हासिल करना कोई मामूली बात नहीं थी. 22 साल बाद  जब भी टीवी पर वो फिल्म आती है तब-तब मन करता है सन्नी जी की जेब के ऊपर चार-छह तमगे और लगा दें!! 
(लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के निजी हैं)