आखिर क्यों इस घटना के बाद धनराज पिल्लै ने ट्रेन से सफर करना छोड़ दिया..

Share this on WhatsAppनई दिल्ली: भारतीय हॅाकी टीम के पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. धनराज पिल्लै का जन्म महाराष्ट्र के खड़की में तमिल परिवार में हुआ था. करियर के शुरूआती दिनों में धनराज ने अपने दिन ऑर्ड्नन्स फैक्ट्री स्टाफ कॉलोनी में बिताए जहां उनके पिता ग्राउंड्समैन थे. धनराज ने अपने […]

नई दिल्ली: भारतीय हॅाकी टीम के पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. धनराज पिल्लै का जन्म महाराष्ट्र के खड़की में तमिल परिवार में हुआ था. करियर के शुरूआती दिनों में धनराज ने अपने दिन ऑर्ड्नन्स फैक्ट्री स्टाफ कॉलोनी में बिताए जहां उनके पिता ग्राउंड्समैन थे.

धनराज ने अपने अंतरराष्ट्रीय हॉकी करियर की शुरुआत 1989 में नई दिल्ली में आयोजित एल्विन एशिया कप में देश के प्रतिनिधित्व के साथ की. मिड-डे से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने करियर के अनुभवों की बात की जिसके कुछ अंश हम आपके लिए प्रदर्शित कर रहे हैं –

अपनी फिटनेस के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि मैं अपने खेल के लिए बहुत समर्पित था. हॉकी मेरा जुनून था. मैं हॅाकी के अलावा कुछ और करने की कल्पना नहीं कर सकता था. मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूं कि मैंने एक बेहतरीन कोच – जोकिम कार्वाल्हो के साथ प्रशिक्षण लिया. उन्होंने मुझे फिट रहने में बहुत मदद की.

हॅाकी के बदलते स्वरूप पर उन्होंने कहा कि साल 2005 तक हॅाकी सिर्फ स्किल का खेल था. नीदरलैंड, जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, भारत और पाकिस्तान जैसी टीमों ने कुशल और कलात्मक हॉकी खेली लेकिन अब नियमों में बदलाव के बाद हॉकी बहुत तेज हो गई है. आज अगर आपके पास 150 प्रतिशत फिटनेस है, तो ही आप 60 मिनट तक खेल सकते हैं इसलिए कोई भी युवा जो खेल को आगे बढ़ाना चाहता है, उसे पर्याप्त रूप से फिट होना पड़ेगा.

आखिर क्यों छोड़ा ट्रेन से सफर करना?

अपने इस अनुभव के बारे में उन्होंने कहा कि एक बार मैं एक मैच के लिए ट्रेन से चर्चगेट जा रहा था. उस समय वे मिड-डे पढ़ रहे थे जब किसी ने उनकी तस्वीर ले ली और अखबार में भेज दी.

अगले दिन वह फोटो इस शीर्षक के साथ प्रकाशित हुई कि ‘धनराज पिल्लै टीम में चुने जाने के बाद भी ट्रेन से यात्रा करते हैं’ उस दिन से उन्होंने ट्रेन से कहीं भी यात्रा न करने का फैसला लिया क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनकी वजह से हॉकी का नाम प्रभावित हो.

धनराज पिल्लै का करियर दिसंबर 1989 से अगस्त 2004 तक रहा और इस दौरान उन्होंने 339 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले. वे एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिसने चार ओलंपिक खेलों (1992, 1996, 2000 और 2004), चार विश्व कप (1990, 1994, 1998 और 2002), चार चैंपियंस ट्राफी (1995, 1996, 2002 और 2003) और चार एशियाई खेल (1990, 1994, 1998 और 2002) में भाग लिया है.

भारत ने उनकी कप्तानी के तहत एशियाई खेल (1998) और एशिया कप (2003) में जीत हासिल की. उन्होंने बैंकाक एशियाई खेलों में सर्वाधिक गोल दागे थे और सिडनी में 1994 के विश्व कप के दौरान वर्ल्ड इलेवन में शामिल होने वाले एकमात्र भारतीय खिलाड़ी थे.

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