India vs New Zealand: विराट कोहली और धोनी की इन गलतियों से सेमीफाइनल में हारा भारत

न्यूजीलैंड के खिलाफ हार का पहला कारण है- सलेक्‍शन कमेटी और कप्‍तान विराट कोहली के बीच मतभेद. दिनेश कार्तिक, कोहली की पसंद नहीं थे पर वह वर्ल्‍ड की टीम में चुने गए. उन्‍होंने कुछ मैचों में मौके भी मिले, लेकिन उनका प्रदर्शन अंतत: टीम को ले ही डूबा.

मैनचेस्‍टर: टीम इंडिया ICC World Cup 2019 से बाहर हो गई है. बुधवार को मैनचेस्‍टर में न्‍यूजीलैंड के खिलाफ रविंद्र जडेजा की 59 गेंदों पर खेली गई 77 रन की शानदार पारी भी टीम इंडिया को नहीं बचा पाई. 240 रनों की पीछा करने उतरी टीम इंडिया के पहले तीन बल्‍लेबाज-केएल राहुल, रोहित शर्मा और विराट कोहली मात्र-1-1-1 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. टॉप ऑर्डर ही टीम इंडिया की बल्‍लेबाजी की ताकत रहा है और सेमीफाइनल में यही धोखा दे गया.

टॉप ऑर्डर की नाकामी के बाद ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक से उम्‍मीदें थीं. कार्तिक ने 24 गेंद खेलकर 6 रन बनाए और 25वीं बॉल पर कैच दे बैठे. ऋषभ पंत ने 56 गेंद खेलीं और 32 रन बनाकर कुछ संघर्ष किया, लेकिन वह भी उम्‍मीदों पर खरे नहीं उतरे. इसी प्रकार से पंड्या ने 62 बॉल पर 32 रन बनाकर कुछ संघर्ष किया, लेकिन मैच जिताने वाली पारी वह भी नहीं खेल सके. इसके बाद महेंद्र सिंह धोनी और रविंद्र जडेजा ने पारी को जमाया और जीत के करीब तक पहुंच गए, लेकिन जडेजा का विकेट गिरते ही टीम इंडिया ताश के पत्‍तों की तरह बिखर गई.

अब पहला सवाल तो यह है कि हार का जिम्‍मेदार कौन है? बल्‍लेबाज या गेंदबाज? क्‍या सेमीफाइनल में 1-1-1 रन बनाकर पवेलियन लौटने वाले रोहित शर्मा, विराट कोहली और केएल राहुल जिम्‍मेदार नहीं हैं? डरे से डरे कार्तिक को देखकर यह स्‍पष्‍ट हो गया कि वह टीम के साथ होने ही नहीं चाहिए थे? क्‍यों न धोनी को जिम्‍मेदार ठहराया जाए, जो जडेजा की मेहनत पर पानी फेरकर अंतिम समय में रन आउट होकर चलते बने? ये सब कमियां तो हैं, लेकिन विराट कोहली न केवल बल्‍लेबाज के तौर पर बल्कि कप्‍तान के पर भी जिम्‍मेदार हैं?

हार का पहला कारण

  • न्‍यूजीलैंड के खिलाफ हार का पहला कारण है- सलेक्‍शन कमेटी और कप्‍तान विराट कोहली के बीच मतभेद. दिनेश कार्तिक, कोहली की पसंद नहीं थे पर वह वर्ल्‍ड की टीम में चुने गए. उन्‍होंने कुछ मैचों में मौके भी मिले, लेकिन उनका प्रदर्शन अंतत: टीम को ले ही डूबा.
  • विराट कोहली इंग्‍लैंड की पिचों पर स्पिनर्स के भरोसे बैठे रहे, यह उनकी कमजोरी साबित हुआ. इस वजह से पहली हार टीम इंडिया को इंग्‍लैंड के खिलाफ मिली और दूसरी सेमीफाइनल में न्‍यूजीलैंड के खिलाफ. इंग्‍लैंड के खिलाफ मैच में अगर कोहली पिच को सही रीड कर पाते तो कभी टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी नहीं लेते. सेमीफाइनल में तो टॉस न्‍यूजीलैंड ने जीत लिया, लेकिन मौसम को देखते हुए मोहम्‍मद शमी को चाहल की जगह टीम में होना चाहिए था. चाहल का एक महंगा ओवर भारत पर भारी पड़ गया, जबकि तेज गेंदबाजों के सामने न्‍यूजीलैंड के बल्‍लेबाज बेहद असहज लगे, क्‍योंकि मौसम के चलते स्विंग अच्‍छा मिल रहा था.

हार का दूसरा कारण

  • रोहित शर्मा, केएल राहुल और विराट कोहली स्‍टारडम के नशे में चूर दिखे, उन्‍हें 240 का टारगेट बहुत छोटा लगा और वे मानकर पिच पर उतरे थे कि जीतेगी तो टीम इंडिया ही. रोहित शर्मा ने ओवर कास्‍ट कंडीशन को नजरअंदाज किया और जोरदार शॉट लगाने के चक्‍कर में विकेट फेंक बैठे. केएल राहुल क्‍या रहे थे, खुद उन्‍हें भी पता नहीं था. इसी प्रकार से विराट कोहली भी कैजुअल एप्रोच के साथ उतरे और फाइनल में पहुंचने का सुनहरा मौका गंवा बैठे.

हार का तीसरा कारण

रविंद्र जडेजा की शानदार बल्‍लेबाजी के दम पर टीम इंडिया करीब-करीब जीत के पास पहुंच ही गई थी, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी की जरूरत से ज्‍यादा धीमी बल्‍लेबाजी भारी पड़ गई. धोनी के आखिर तक रुकने की रणनीति महंगी पड़ गई, जो कि गलत भी थी. मैनचेस्‍टर का मैदान कोई नागपुर की पिच नहीं, जहां पाटा पिच पर आखिरी ओवर में धुआंधार रन बन जाते. 40 ओवर के बाद जडेजा ने करीब-करीब हर ओवर में चौका या छक्‍का लगाया, वहीं, धोनी कई बार तीन गेंद खेकर सिंगल ले रहे थे. धोनी को 45 ओवर के बाद से ही तेज बल्‍लेबाजी करनी चाहिए थी, मैच तो धीरे खेलकर भी टीम हार ही गई. खुद धोनी रन आउट हो गए. धोनी ने 72 गेंदों पर 50 रनों की पारी खेली. कुल मिलाकर अगर कहा जाए कि धोनी ने जडेजा के किए कराए पर पानी फेर दिया तो गलत नहीं होगा. धोनी की वजह से जडेजा पर हर ओवर में प्रेशर ज्‍यादा बना, क्‍योंकि धोनी चौके मार नहीं पा रहे थे और सिंगल लेने में भी दो या तीन डॉट बॉल खेल रहे थे.