योगी तेरे राज में ‘नाम गुम जाएगा’…! अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय को प्रयागराज करने की तैयारी

Share this on WhatsAppनई दिल्ली: जिस विश्वविद्यालय ने देश को एक राष्ट्रपति, तीन प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख व्यक्तित्व दिए आज उसी को अपने नाम और अपनी बुनियाद को बचाने को लिए संकट का सामना करना पड़ रहा है. ऑक्सफोर्ड ऑफ दि ईस्ट  के नाम से जाने जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय को योगी सरकार अब जिले […]

नई दिल्ली: जिस विश्वविद्यालय ने देश को एक राष्ट्रपति, तीन प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख व्यक्तित्व दिए आज उसी को अपने नाम और अपनी बुनियाद को बचाने को लिए संकट का सामना करना पड़ रहा है. ऑक्सफोर्ड ऑफ दि ईस्ट  के नाम से जाने जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय को योगी सरकार अब जिले के नाम के अनुसार ‘प्रयागराज विश्वविद्यालय’ करना चाहती है. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया था. यह शहरों के मुस्लिम नाम को हिन्दू नाम में बदले जाने की कड़ी का एक हिस्सा है और अब उसी तर्ज पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय को निशाना बनाया गया है.

भाजपा शासित योगी सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले साल 20 दिसंबर को मानव संसाधन विकास मंत्रालय से इलाहाबाद अधिनियम में संशोधन करने का आग्रह किया था ताकि 132 साल पुराने संस्थान का नाम बदला जा सके. विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नाम बदलने से विश्वविद्यालय को कोई फायदा नहीं होने वाला है. क्या इससे रिसर्च और बुनियादी ढांचे जैसी जरूरतों को मजबूत बनाने में कोई मदद मिलेगी?

ये पढ़ चुकी हैं हस्तियां 

विश्वविद्यालय से पढ़ चुके हजारों छात्रों में से कई भारत के शीर्ष संवैधानिक व्यक्ति थे. विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों में पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा और पूर्व प्रधान मंत्री वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर और गुलजारीलाल नंदा शामिल हैं. इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत  जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और बाद में उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था वे भी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रह चुके हैं. इनके अलावा विख्यात कवि हरिवंश राय बच्चन भी विश्वविद्यालय से जुड़े थे.

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ऐसे पड़ा नाम 

इलाहाबाद शहर जो भारत-गंगा के मैदान के बीच स्थित है, मूल रूप से प्रयाग के नाम से जाना जाता था. सम्राट अकबर ने 1574 में एक किले और चारदीवारी का निर्माण किया था जिसे इलाबस  नाम दिया गया था. बाद में शाहजहाँ ने इसे बदलकर इलाहबाद  कर दिया था. ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित इलाहाबाद विश्वविद्यालय 1887 में स्थापित होने के बाद से ही ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के पैटर्न का पालन करता था. इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की तर्ज पर ही डॉक्टरेट की उपाधियों के नाम रखे. विश्वविद्यालय ने अपनी पीएचडी डिग्री को DPhil  नाम दिया. लेकिन बाद में नामों में एकरूपता लाने के लिए यूजीसी के निर्देश पर विश्विद्यालय ने पीएचडी डिग्री ही देना प्रारंभ कर दिया.

क्या नाम बदलना जरूरी है?

विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर का कहना था कि “विश्वविद्यालय को अपनी विरासत के कारण ही ऑक्सफोर्ड ऑफ दि ईस्ट  कहा जाता है. इसका नाम बदलने से इसकी बुनियाद नष्ट हो जाएगी ”. योगी सरकार ने इससे पहले मुगलसराय रेलवे जंक्शन  का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन  कर दिया था. एचआरडी मिनिस्ट्री ने किसी भी विश्वविद्यालय या आईआईटी के नाम में अभी तक कोई बदलाव नहीं किया है भले ही उन शहरों के नाम क्यों न बदल गए हों. उदाहरण के लिए जब बॉम्बे मुंबई बना या मद्रास चेन्नई तब भी इनके आईआईटी के नाम आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास ही रहे.

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