अगर यू-ट्यूब और फेसबुक होते अलर्ट तो टल सकता था न्यूजीलैंड मस्जिद हमला, पढ़िए कैसे

नस्लवादी ब्रेंटन टैरंट मुसलमानों और अप्रवासियों के खिलाफ नफरत का मैनिफेस्टो भी जारी कर रहा था. ये मैनिफेस्टो ट्विटर की शोभा बढ़ा रहे थे. नफरत की आग इन टेक महारथियों के सहारे पूरी दुनिया में फैल रही थी.
New Zealand attack, अगर यू-ट्यूब और फेसबुक होते अलर्ट तो टल सकता था न्यूजीलैंड मस्जिद हमला, पढ़िए कैसे

क्राइस्टचर्च की मस्जिदों में हैवानियत का नंगा नाच वहीं तक सीमित नहीं था. 28 साल का ऑस्ट्रेलियाई सिरफिरा एक कैमरे की मदद से इसे पूरी दुनिया को लाइव दिखा रहा था. उसकी मदद कर रही थीं फेसबुक और यू-ट्यूब जैसी अरबों डॉलर की कंपनियां. कुछ सेकेंडे के भीतर रेडिट औऱ ट्वीटर पर भी न्यूजीलैंड का खूनी खेल देखा जाने लगा.

अरबों डॉलर की इन अमरीकी कंपनियों का रवैया दो कौड़ी की ग़ैर जिम्मेदार कंपनियों जैसा रहा. नफरत की आग को फैलने से रोकने की तकनीक ये अभी तक विकसित नहीं कर पाए. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. कभी सुसाइड तो कभी मास शूटिंग को ग्लोरिफाई करने के लिए इन टेक महारथियों की आलोचना पहले भी हो चुकी है. पर, क्राइस्टचर्च में जो कुछ हुआ उसे समय रहते लाइव चलने से नहीं रोक पाना बेदह शर्मनाक है.

नस्लवादी ब्रेंटन टैरंट बर्बरता की हदें पार करते हुए न सिर्फ अल नूर मस्जिद में निहत्थे नमाजियों को मौत की नींद सुला रहा था बल्कि मुसलमानों और अप्रवासियों के खिलाफ नफरत का मैनिफेस्टो भी जारी कर रहा था. ये मैनिफेस्टो ट्विटर की शोभा बढ़ा रहे थे. नफरत की आग इन टेक महारथियों के सहारे पूरी दुनिया में फैल रही थी.

दो दिन में 60 लिंक्स हुए पोस्ट

जघन्य कुकृत्य कर रहे टैरंट ने 17 मिनट के फेसबुक लाइव में सैंकड़ों राउंड फायर किए. वो नफरत की आग में पागल बन चुका था. नफरत के संदेशों से लोडेड ऑटोमैटिक राइफलों की सारी मैगजीन एक के बाद एक खाली करता जा रहा था. कहीं किसी की धमनियों में सांसे चलने लायक खून बच न जाए, इसके लिए वो सुन्न पड़े लोगों के सिर पर बार-बार गोलियां दागता रहा और पूरी दुनिया फेसबुक के जरिए तमाशबीन बनी.

New Zealand attack, अगर यू-ट्यूब और फेसबुक होते अलर्ट तो टल सकता था न्यूजीलैंड मस्जिद हमला, पढ़िए कैसे
‘द न्यूजीलैंड हेराल्ड’ की रिपोर्ट के अनुसार गोलीबारी अल नूर मस्जिद और लिनवुड मस्जिद में हुई. (PS. PTI)

लेकिन ऐसा नहीं कि सिर्फ 17 मिनट का वीडियो ही सोशल मीडिया पर नफरत फैला रहा था. उस सिरफिरे ने इस हत्याकांड की लंबी तैयारी की थी. पिछले दो दिनों से वह अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर 60 ऐसे लिंक डाल चुका था जो संकेत दे रहे थे कि कुछ होने वाला है. इनमें से आधे से ज्यादा लिंक यू-ट्यूब पर डाले गए. कुछ तो शुक्रवार शाम तक भी एक्टिव थे. करोड़ों की तनख्वा लेने वाले इंजीनियर इसे रिमूव नहीं कर पाए.

यू-ट्यूब कम्युनिटी गाइडलाइंस फॉलो न करने वाले वीडियो को डिटेक्ट कर हटाने का दावा करता रहा है. इस घटना ने साबित कर दिया है कि यू-ट्यूब कितनी बेबस है.

हत्यारे टैरंट ने गो-प्रो हैलमेट कैमरा से शूटआउट को लाइव किया था. हालांकि इससे पहले 8chan नाम के एक फोरम पर उसने अपने नापाक इरादे जाहिर कर दिए थे. इंटरनेट यूजर्स इतनी तेजी से वीडियो डाउनलोड कर गुमराह करने वाले थंबनेल के साथ फिर से अपलोड करते जा रहे थे कि यू-ट्यूब मोडरेटर्स के होश फाख्ता हो गए. कंपनी रियल-टाइम पर इसे डिटेक्ट नहीं कर पा रही थी.

कोरी सफाई

यू-ट्यूब ने शुक्रवार सुबह जारी बयान में कहा, न्यूजीलैंड में जो कुछ हुआ उसने हमारे दिलों पर गहरा आघात किया है. हम हिंसक फुटेज को हटाने के लिए तत्पर हैं. वहीं ट्वीटर ने कहा कि उसने एक संदिग्ध का अकाउंट सस्पेंड कर दिया है और सारे वीडियो डिलीट किए जा रहे हैं.

रेडिट ने gore और watchpeopledie जैसे फोरम शुक्रवार को बंद करने का फैसला किया. इस फोरम पर एक मोडरेटर ने क्राइस्टचर्च वीडियो को ऑनलाइन रखने की वकालत की क्योंकि ‘ये बिना किसी एडिटिंग के सच्चाई सामने लाने वाला है’.

प्राइवेसी लॉ और वायलेंस को लेकर इन टेक कंपनियों की पेशी अमरीकी संसद में कई बार हो चुकी है लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है. हालांकि इस मर्ज का इलाज कानून से नहीं हो सकता. टेक कंपनियों को ही रास्ता बताना होगा.

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