इस फटकार ने साधारण से बच्चे को बना दिया था सचिन तेंदुलकर

नयी दिल्ली। भारत में अगर कोई खेल सबसे ज्यादा लोकप्रिय है तो वो क्रिकेट ही है. क्रिकेट हिंदुस्तान की आत्मा में बसता है. कोई भी बच्चा अगर किसी खिलौने को सबसे पहले हाथ लगाता है तो वह बैट और बॉल ही होता है और जब उससे पूछो की क्या बनना है तो वह सचिन तेंदुलकर […]

नयी दिल्ली।

भारत में अगर कोई खेल सबसे ज्यादा लोकप्रिय है तो वो क्रिकेट ही है. क्रिकेट हिंदुस्तान की आत्मा में बसता है. कोई भी बच्चा अगर किसी खिलौने को सबसे पहले हाथ लगाता है तो वह बैट और बॉल ही होता है और जब उससे पूछो की क्या बनना है तो वह सचिन तेंदुलकर का नाम लेता है. क्रिकेट का ‘क’ जिस बच्चे को पता नहीं होता वो भी सचिन तेंदुलकर का नाम जानता है. सचिन तेंदुलकर की राह भी आसान नहीं रही. लेकिन उनकी जिंदगी में इंसानी रुप में एक ऐसा फरिश्ता आया जिसकी एक डांट ने सचिन तेंदुलकर को महान क्रिकेटर बना दिया.

साल 2017 में सचिन तेंदुलकर ने एक ट्वीट करके बताया था कि कैसे एक डांट ने उनकी जिंदगी बदल दी थी. इस ट्वीट में सचिन ने लिखा था, ‘यह मेरे स्कूल के दिनों के दौरान बात थी. मैं अपने स्कूल की जूनियर टीम से खेल रहा था और हमारी सीनियर टीम वानखेडे स्टेडियम में हैरिस शील्ड का फाइनल खेल रही थी. उसी दिन आचरेकर सर ने मेरे लिए एक प्रैक्टिस मैच का आयोजन किया था. उन्होंने मुझसे स्कूल के बाद वहां जाने के लिए कहा था.

तेंदुलकर ने नहीं मानी गुरु आचरेकर की बात
उन्होंने कहा कि मैंने उस टीम के कप्तान से बात की है, तुम्हें चौथे नंबर पर बैटिंग करनी है. मैं उस प्रैक्टिस मैच को खेलने नहीं गया और वानखेडे स्टेडियम जा पहुंचा. मैं वहां अपने स्कूल की सीनियर टीम को चीयर कर रहा था. खेल के बाद मैंने आचरेकर सर को देखा. मैंने उन्हें नमस्ते किया. अचानक सर ने मुझसे पूछा- आज तुमने कितने रन बनाए? मैंने जवाब में कहा- सर मैं सीनियर टीम को चीयर करने के लिए यहां आया हूं. यह सुनते ही आचरेकर सर ने सबके सामने मुझे डांट लगाई. उनके एक-एक शब्‍द अभी भी मुझे याद हैं.”

सबके सामने तेंदुलकर को लगाई फटकार
सचिन के अनुसार रमाकांत आचरेकर ने तब उनसे कहा था कि दूसरों के लिए ताली बजाने की जरूरत नहीं है. तुम अपनी क्रिकेट पर ध्यान दो. ऐसा कुछ हासिल करो कि दूसरे लोग, तुम्‍हारे खेल को देखकर ताली बजाएं. सचिन ने बताया कि यह उनके लिए बहुत बड़ा सबक था, इसके बाद उन्होंने कभी कोई मैच नहीं छोड़ा. सचिन के अनुसार, ‘सर की उस डांट ने मेरी जिंदगी बदल दी. इसके बाद मैंने कभी भी क्रिकेट प्रैक्टिस को लेकर लापरवाही नहीं की. परिणाम सबके सामने हैं.’

आचरेकर देखते थे सचिन का हर मैच
सचिन के गुरु रमाकांत आचरेकर का कुछ ही दिनों पहले निधन हो गया. सचिन हमेशा गुरु पूर्णिमा के दिन उनके पास आर्शीवाद लेने पहुंचते थे. उनके गुरु आचरेकर भी सचिन तेंदुलकर का कोई भी मैच देखना नहीं भूलते थे. आचरेकर ही वो शख्स थे जिन्होंने देश को सचिन तेंदुलकर जैसा खिलाड़ी दिया. सचिन बताते थे कि आचरेकर अक्सर उनको मैच के बाद उनकी गलतियों को बताते थे और उनसे वादा लेते थे कि अगली बार मैदान में वो गलती नहीं होनी चाहिए.