क्या इस वजह से नहीं चलेगा ट्विटर पर मोदी लहर का जोर?

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नयी दिल्ली
हाल ही में भाजपा की पार्लियामेंट कमेटी के हेड अनुराग ठाकुर ने आईटी और सोशल मीडिया से जुड़ी मीटिंग के लिए ट्विटर के सीईओ को बुलावा भेजा था, और इस बुलावे को जैक डोरसी ने यह कहते हुए नकार दिया कि मीटिंग में आने के लिए उन्हें 10 दिन का समय चाहिए. वैसे तो ये बात बिल्कुल आम है, लेकिन मीडिया में इस बात को लेकर तरह-तरह की बातें चल रही हैं, जैसे बीजेपी वाले ट्विटर के सीईओ की इस हरकत से नाराज हैं या डोरसे ने गलत किया या कुछ कोई और वजह.

बात चाहे जो भी हो लेकिन यह मामला तूल तो पकड़ ही चुका है. पिछले चुनावों बीजेपी ने फेसबुक के जरिए जो फतह की झंडिया लगाई थी वो अब कमजोर साबित हो सकती है. सब जानते हैं कि जिस मोदी लहर का फेसबुक में चर्चा था, वो बीजेपी की आईटी सेल की फैलाई हुई थी. लेकिन जुकरबर्ग ने नमो से मिलकर जो समर्थन जाहिर किया था, डोरसी के मामले में वो बात नहीं बन पाई.

एक तरफ हिंदी लेखनी की जो बढ़त ट्विटर पर हुई है, चुनावों से जुड़ी बातों ने और भी जोर पकड़ा है. ऐसे में ट्विटर की तरफ से अनदेखी बीजेपी को भारी भी पड़ सकती है.

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