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क्‍या Corona काल में पटरी से उतरने जा रही है भारत-चीन रिश्‍तों की गाड़ी?

कोरोना (Coronavirus) के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन (China) को काफी दबाव का सामना करना पड़ रहा है कि लेकिन इन सब के बावजूद भी चीन कई तरह से भारत (India) पर दबाव बनाने की कोशिशें कर रहा है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 5:54 am, Tue, 19 May 20

चीन (China) और भारत (India) के रिश्तों में यूं तो हमेशा से ही तल्खी रही है, लेकिन कोरोनावायरस (Coronavirus) की इस महामारी के समय भी दोनों देशों के रिश्तों में कई तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं. यह तो किसी से छिपा नहीं है कि कोरोना के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन को काफी दबाव का सामना करना पड़ रहा है कि लेकिन इन सब के बावजूद भी चीन कई तरह से भारत पर दबाव बनाने की कोशिशें कर रहा है.

दरअसल भारत और चीन की सीमा पर पिछले कुछ दिनों से कई तरह की गतिविधियां भी देखने को मिली हैं. इसके अलावा चीन को यह भी डर है कि कोरोना की बीमारी के बाद से दुनिया कि कई बड़ी कंपनियों ने अपना रुख चीन की बजाए भारत की तरफ करने का फैसला किया है. इन सभी मुद्दों को देखा जाए तो इससे ये कहा जा सकता है कि कोरोना के संकट काल में चीन और भारत के रिश्तों में कुछ न कुछ टर्निंग प्वाइंट आने की पूरी संभावना है.

भारत सीमा पर चीन ने फिर बढ़ाई चहलकदमी

याद हो तो हाल ही में सिक्किम और लद्दाक की सीमा पर भारतीय सैनिक और चीनी सैनिक आमने-सामने आ गए. पूर्वी लद्दाख के इस इलाके में चीन और भारतीय सैनिकों के बीच धक्का-मुक्की हुई. हालांकि भारतीय सेना ने चीन के इस प्रयास को जवाबी कार्रवाई कर रोक दिया. ये हाथापाई LAC के पास भारतीय इलाके में हुई. हालांकि घटना के थोड़ी देर बाद में इसे दोनों पक्षों ने सुलझा लिया था.

वहीं इन दो घटनाओं के बाद लद्दाख (Ladakh) में LAC के पास चीन के चॉपर्स भी देखे गए. हालांकि उसकी इस हरकत को भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के जवानों और एयरक्राफ्ट ने नाकाम कर दिया.

FDI नियमों में बदलाव से नाराजगी

नई दिल्ली के खिलाफ चीन के नकारात्मक नजरिए में तब और वृद्धि हुई, जब एफडीआई (FDI) के नियमों को बदल दिया गया. देश में कोरोनावायरस संबंधित बंदी के दौरान आक्रामक व्यापार पर लगाम लगाने के लिए, केंद्र ने भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों के सभी एफडीआई प्रस्तावों को सरकार के अनुमोदन मार्ग के तहत रखा.

चीन उसके बाद से ही भारत के इस रुख का विरोध कर रहा है. चीन संबंधों के जानकार जयदेव रानाडे ने कहा कि पहले भी दोनों देशों के बीच झड़पें होती रही हैं, लेकिन यह नया संघर्ष संबंधों में गिरावट की वजह से है.

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अक्साई चीन क्षेत्र में भी चीन की हरकत बढ़ी

वहीं ऑनलाइन मीडिया के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यहां बताया कि चीनी सैनिकों ने चीन-भारत सीमा के अक्साई चीन क्षेत्र में गैलवान घाटी में अपने सीमा नियंत्रण उपायों को तेज कर दिया है. चीन के ग्लोबल टाइम्स में लिखा गया, “चीन ने यह एक्शन भारत की उस कार्रवाई के बाद किया, जिसमें कि गैलवान वैली में भारत ने रक्षा सुविधाओं का अवैध निर्माण किया था.”

करीब 1000 अमेरिकी कंपनयों को भारत लाने की तैयारी

दोनों देशों के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव का कारण आर्थिक विकास भी. दरअसल कोरोना के चलते हाल ही में अमेरिका ने अपनी करीब 1000 कंपनियों को चीन से वापस लाने का फैसला किया है. अमेरिका के इस फैसले के बाद भारत ने इन कंपनियों से संपर्क करना शुरू कर दिया है. ताकि महामारी में झटके खा रही अर्थव्यवस्था को उभारने में मदद मिले.

भारत में बड़ा इन्‍वेस्‍टमेंट करने पर 10 साल तक टैक्‍स पर छूट

इस बीच अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार के प्रयासों के तहत व्यापार मंत्रालय भी नए निवेश लाने वाली कंपनियों के लिए टैक्स में रियायत देने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. पहचान न जाहिर करते हुए संबंधित लोगों ने बताया कि वित्त मंत्रालय द्वारा 500 मिलियन डॉलर (लगभग 3770 करोड़ रुपए) से ऊपर का नया निवेश करने वाली कंपनियों को 10 साल की पूर्ण टैक्स छूट देने के प्रस्ताव का मूल्यांकन किया जा रहा है. भारत के इस लुभावने ऑफर से भी चीन कहीं न कहीं परेशानी महसूस कर रहा होगा.

चीन को मिला पहला झटका

भारत के टैक्स छूट वाले ऑफर के बाद इधर जर्मन फुटवियर ब्रांड वॉन वेलक्स (Von Wellx ) ने चीन में अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस प्लांट को बंद कर उसे भारत में शिफ्ट करने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के विदेशी फर्मों को आकर्षित करने और Covid-19 संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की मदद करने के लिए कई बैठकें करने के कुछ दिनों बाद ही यह खबर आई है.

भारत से भी मार्केट खोने का डर

एक तरह से देखा जाए तो चीन को न सिर्फ अपने यहां से जाती कंपनियों की टेंशन है बल्कि भारत से भी अपना व्यापार खत्म होने का खतरा दिखने लगा, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में लोकल ब्रांड इस्तेमाल करने की बात कही थी और जिसका सीधा-सीधा मतलब यही है कि भारत में चीन का मार्केट डाउन हो सकता है.

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