चुनाव को लेकर फेसबुक क्यों हुआ सख्त

Share this on WhatsAppनयी दिल्ली किसी भी बात को वायरल करने का सबसे आसान तरीका है, उसे फेसबुक में पोस्ट कर दिया जाए. यहां फेसबुक स्पीड के मामले में ज्यादा तेज है. वायरल खबरों में फेक न्यूज भी शामिल होती हैं. चूंकि फेसबुक के यूजर्स ज्यादा हैं, इसलिए यह अफवाहें फैलाने का एक स्रोत भी […]

नयी दिल्ली
किसी भी बात को वायरल करने का सबसे आसान तरीका है, उसे फेसबुक में पोस्ट कर दिया जाए. यहां फेसबुक स्पीड के मामले में ज्यादा तेज है. वायरल खबरों में फेक न्यूज भी शामिल होती हैं. चूंकि फेसबुक के यूजर्स ज्यादा हैं, इसलिए यह अफवाहें फैलाने का एक स्रोत भी बन चुका है. देश में जब चुनावी माहौल होता है, झूठी खबरें जोर पकड़ लेती हैं. इन सभी बातों पर एहतियात बरतते हुए फेसबुक कुछ नए नियम लाने जा रहा है, जिनका असर भारत पर कुछ यूं रहेगा.

चुनावों से जुड़े विज्ञापन फेसबुक में पोस्ट करने के लिए आपको अपनी पहचान और स्थान का प्रमाण देना होगा. इसके अलावा आपसे कुछ अतिरिक्त जानकारी जैसे आईडी प्रूफ की मांग भी की जा सकती है. विज्ञापन पोस्ट करने के लिए वेरीफिकेशन प्रोसेस में कम से कम एक हफ्ते का वक़्त लगेगा, जो कि यूजर अपने मोबाइल और लैपटॉप के जरिए पूरी कर सकता है. मोबाइल यूजर्स सिर्फ अपडेटेड फेसबुक एप द्वारा ही विज्ञापन पोस्ट कर पाएंगे. फेसबुक द्वारा किया जा रहा यह बदलाव 2019 की शुरुआत से ही लागू हो जाएगा. इन नियमों में यह भी शामिल होगा …

• देश के बाहर रहने वाला व्यक्ति यहां से जुड़े किसी भी तरह के चुनावी विज्ञापन पोस्ट नहीं कर सकेगा.
• विज्ञापन के साथ, विज्ञापन किसने पोस्ट किया है, यह भी दिखाया जाएगा. इसके साथ ही सभी चुनावी विज्ञापनों को एक लाइब्रेरी में पब्लिक मोड में रखा जाएगा.
• फेसबुक की तरफ से दिखाए जा रहे चुनावी विज्ञापनों में ‘राजनीतिक विज्ञापन’ नाम का एक टैग जोड़ा जाएगा. हालांकि न्यूज चैनलों पर यह नियम लागू नहीं होगा.
• फोटोशॉप के इस्तेमाल से बनी झूठी और वाहियात खबरें आनी कम हो जाएंगी और घटिया पॉलिटिक्स से भरे पड़े, बच्चों के वीडियो कम दिखाई देंगे.

 

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