संक्रमित होने के तीसरे दिन से कुछ भी सूंघ पाने की शक्ति खो देते हैं कोरोना के मरीज: स्टडी

वैज्ञानिकों का कहना है "अगर किसी को कोविड-19 के साथ सूंघने की क्षमता में कमी महसूस होती है, तो हम ये समझ सकते हैं कि उस मरीज को संक्रमित हुए एक सप्ताह का ही समय बीता है या उसका पहला सप्ताह ही है."
Coronavirus patients lose the power to smell anything, संक्रमित होने के तीसरे दिन से कुछ भी सूंघ पाने की शक्ति खो देते हैं कोरोना के मरीज: स्टडी

कोरोनावायरस के लक्षणों को लेकर स्वास्थ्यकर्मी भी पशोपेश में हैं. इसी बीच एक ऐसी स्टडी सामने आई है, जिससे उनको काफी हद तक कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज की पहचान लक्षणों के जरिए करने में आसानी होगी. दरअसल 100 से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीजों पर की गई स्टडी में सामने आया है कि मरीज संक्रमित होने के तीसरे दिन से ही कुछ भी सूंघ पाने की क्षमता खो देता है.

दरअसल एक टेलीफोनिक सर्वे में उन 103 लोगों के लक्षणों का अध्ययन किया गया, जिन्हें कोरोना से संक्रमित हुए 6 सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका था. इस स्टडी के नतीजे Otolaryngology-Head and Neck Surgery जर्नल में प्रकाशित किए गए थे. अमेरिका के सिन्सिनाटी यूनिवर्सिटी से स्टडी के सह-लेखक, अहमद सेदाघाट ने कहा कि उन्हें स्विटजरलैंड के रोगियों ने कोविड-19 के लक्षणों और सूंघ पाने की क्षमता के खो जाने के समय और इसकी गंभीरता के बारे में जानकारी दी.

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उन्होंने बताया कि 103 मरीजों में से करीब 61 प्रतिशत के सूंघने की क्षमता में कमी आई थी. इसी के साथ उन्होंने कहा कि संक्रमित होने के 3 से 4 दिनों के बाद ये बात महसूस होने लगता है. अहमद ने बताया कि कुछ भी सूंघ न पाना इस बीमारी के अन्य भयानक लक्षणों का आभास कराता है. सूंघ पाने की क्षमता खोने को विज्ञान की भाषा में एनोस्मिया (Anosmia) कहते हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि सूंघ पाने की क्षमता में कमी और बाकी कोविड -19 के बीच के संबंध के बारे में पता होना काफी अहम हो सकता है. उनका कहना है “अगर किसी को कोविड-19 के साथ सूंघने की क्षमता में कमी महसूस होती है, तो हम ये समझ सकते हैं कि उस मरीज को संक्रमित हुए एक सप्ताह का ही समय बीता है या उसका पहला सप्ताह ही है.”

स्टडी करने वाले वैज्ञानिकों ने बताया कि यह आने वाले खतरनाक लक्षण जैसे सांस लेने में तकलीफ वगेराह के लिए पहले से ही चेतावनी के तौर पर देखा जा सकता है. स्टडी में ये बात भी सामने आई कि सूंघ पाने की क्षमता में कमी युवा मरीजों और महिलाओं में भी देखी गई है.

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