ऑफिस में 8 घंटे से अधिक करते हैं काम, हार्ट अटैक और डिप्रेशन जैसी बीमारियों का हो सकते हैं शिकार

रोज 9 घंटे काम करने वाले हाइपर टेंशन, स्ट्रोक, हार्ट अटैक, डिप्रेशन, मसल्स पेन, बैक पेन, सर्वाइकल और स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं का शिकार हो सकते हैं. क्षमता से ज्यादा काम करना और कितना नुकसानदेह हो सकता है, आइए जानते हैं.
long working hours in office, ऑफिस में 8 घंटे से अधिक करते हैं काम, हार्ट अटैक और डिप्रेशन जैसी बीमारियों का हो सकते हैं शिकार

टारगेट और अपॉरचुनिटी के जाल में उलझा प्राइवेट सेक्टर का हर एम्प्लॉई इस खबर से रिलेट कर पाएगा. ग्रोथ के लिए ऑफिस जल्दी जाना, देर तक बैठना, बीच में ब्रेक न लेना, छुट्टी के दिन भी ऑफिस चले जाना आपकी कंपनी में ग्रोथ तो करा सकता है लेकिन सेहत के लिए बुरा हो सकता है.

रोज 9 घंटे काम करने वाले हाइपर टेंशन, स्ट्रोक, हार्ट अटैक, डिप्रेशन, मसल्स पेन, बैक पेन, सर्वाइकल और स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं का शिकार हो सकते हैं. क्षमता से ज्यादा काम करना और कितना नुकसानदेह हो सकता है, आइए जानते हैं.

बढ़ता अकेलापन

रोजाना काम को ज्यादा वक्त देने की वजह से फैमिली और दोस्तों के साथ बिताने वाले वक्त में कमी आ जाती है. मनोचिकित्सक राजेश गुप्ता के मुताबिक जो लोग 8 घंटे से ज्यादा लगातार काम में लगे रहते हैं उनमें कुछ समय बाद अकेलेपन की भावना घर कर जाती है. इसकी वजह होती है कम्युनिकेशन और दोस्तों-परिवार के बीच समय का अभाव.

डॉक्टर गुप्ता कहते हैं कि हमारे पास अक्सर ऐसे मामले आते हैं जब एक ही छत के नीचे रहने के बावजूद लोग एक दूसरे को समय नहीं दे पाते हैं. एक दूसरे के बीच दूरी पनपती है और धीरे-धीरे अकेलेपन के शिकार हो जाते हैं.

एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि भारतीय युवा काम के लिए निर्धारित 8 घंटों से ज्यादा समय ऑफिस को देते हैं और लंबी शिफ्ट में काम करते हैं. इसकी वजह से तनाव बढ़ता जा रहा है. युवाओं में बढ़ती निगेटिविटी का यह प्रमुख कारण है कि वे मानसिक रूप से ज्यादा थक रहे हैं. भारतीय युवा ऑफिस में औसतन 52 घंटे देते हैं, जबकि जापान में यह समय 46 घंटे है.

बढ़ता चिड़चिड़ापन

स्टडी का कहना है कि युवा मानसिक रूप से इतना ज्यादा थक रहे हैं कि शारीरिक रूप से एक्टिव रहने का न समय बचता है और न ही एनर्जी. हालत यह हो जाती है कि लोग बेहद अकेले हो जाते हैं. अपनी समस्याओं पर भी बात नहीं कर पाते और चिड़चिड़ापन हावी हो जाता है. अनियमित और ज्यादा काम की वजह से हाइपर टेंशन, स्ट्रोक, हार्ट अटैक, डिप्रेशन, मसल्स पेन, बैक पेन, सर्वाइकल और स्लिप डिस्क जैसी बीमारियां हो जाती हैं.

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