AIIMS, RML जैसे सरकारी अस्पतालों में अपॉइंटमेंट के लिए लाइन में लगने की टेंशन खत्म

अस्पताल के काउंटर पर होने वाले ओपीडी रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट सिस्टम को Hospital Management Information System के जरिए डिजिटलाइज़ कर दिया गया है.

सरकारी अस्पतालों में OPD का अपॉइंटमेंट लेने की जद्दोजहद से भला कौन वाकिफ नहीं है. यहां तक कि एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में तो लोगों को कई दिनों तक चक्कर काटने पड़ते हैं और धक्के खाने पड़ते हैं. ऐसे में मरीजों को जिन तकलीफों का सामना करना पड़ता है उन्हें या तो वो मरीज़ ही जानता है या उसके परिवार वाले, लेकिन अब ऐसा और नहीं होगा.

देश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर को दिखाने के लिए आपको लंबी लाइनों में खड़े रहकर इंतजार करने की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी. जी हां, क्योंकि अब आप घर बैठे अस्पताल के OPD का अपॉइंटमेंट ले सकते हैं और डॉक्टर को दिखा सकते हैं. न केवल इतना ही बल्कि किसी भी सरकारी अस्पताल में लैब रिपोर्ट और ब्लड की एवेलेबिलिटी चेक करना भी आसान और ऑनलाइन हो गया है. कैसे? जानने के लिए पढ़ें ये रिपोर्ट…

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम

भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया पहल के तहत देश भर के अस्पतालों को जोड़ने के लिए ‘आधार’ पर आधारित ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट सिस्टम तैयार किया है जिसका नाम है ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम यानी ओआरएस.

इस फ्रेमवर्क में अस्पताल के काउंटर पर होने वाले ओपीडी रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट सिस्टम को Hospital Management Information System के जरिए डिजिटलाइज़ कर दिया गया है. इस पोर्टल पर अब तक 230 सरकारी अस्पतालों के ढाई हज़ार से भी ज्यादा विभागों को जोड़ा जा चुका है.

ऐसे लें अपॉइंटमेंट

इस पोर्टल के माध्यम से अपॉइंटमेंट लेने के लिए सबसे पहले अपना मोबाइल नंबर डालें, अब आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा. OTP डालकर आगे बढ़ें. अगर आपके पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के साथ आधार है तो अपॉइंटमेंट लेना बहुत आसान है.

पोर्टल पर नए मरीज के लिए अपॉइंटमेंट लेने के लिए जब उसका आधार नंबर एंटर किया जाता है तब UIDAI की ओर से आधार से लिंक्ड मोबाइल नंबर पर एक SMS भेजा जाता है जिसमें OTP यानी वन टाइम पासवर्ड होता है. आधारधारक यानी कि मरीज को UIDAI में स्टोर्ड उसके KYC Data को अस्पताल के साथ शेयर करने की अनुमति देनी होती है ताकि उसे OPD का अपॉइंटमेंट मिल सके.

इसके बाद सिस्टम में UIDAI के पास उपलब्ध eKYC data से आपकी पर्सनल डीटेल्स आ जाएंगी. लेकिन मान लीजिए अगर मरीज के पास आधार नंबर तो है पर उसके साथ कोई मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नहीं है तो ऐसे में मरीज का आधार कार्ड वाला नाम जरूर पता होना चाहिए.

आधार न होने की स्थिति में ये करें

वेरिफिकेशन के बाद, मरीज को अपनी बाकी की पर्सनल डीटेल्स भरनी होंगी. अब अगर मरीज के पास आधार नंबर ही नहीं है तो क्या होगा?

ऐसी स्थिति में मरीज को पर्सनल मोबाइल नंबर, नाम, पिता का नाम, माता का नाम सहित कुछ और पर्सनल डीटेल्स भरनी होंगी लेकिन उसे OPD कार्ड अस्पताल से ही मिलेगा वो भी मरीज का ID Proof दिखाने के बाद. फिर सरकारी अस्पताल के उस डिपार्टमेंट को सेलेक्ट करें जिसमें मरीज का चेक अप कराना है. अब अपॉइंटमेंट की तारीख चुनें. आधार नंबर से मरीज को वेरिफाई करें. इसके बाद, आपके मोबाइल पर एसएमएस आएगा जिसमें OPD अपॉइंटमेंट की डीटेल्स दी होंगी.

बता दें कि अपना आधान नंबर देने पर अस्पताल मरीज को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट के लिए वही प्रिफरेंस देता है जो अस्पताल में कतार में खड़े मरीज को देता है. साथ ही मरीज को एक Unique Health Identification (UHID) number भी जारी किया जाता है. इसके बाद ऑनलाइन पेमेंट करके मरीज E-OPD card प्रिंट कर सकता है.

UHID से कराएं आधार लिंक

ये तो रही बात नए मरीज की. फॉलो अप मरीज को भी अपने UHID के साथ अपने आधार को लिंक करवा लेना चाहिए ताकि बेहतर उपचार के लिए अस्पताल को मरीज का Electronic Health Record (EHR) मेन्टेन करने में सहूलियत हो.

आधार कार्ड से UHID लिंक होने पर भविष्य में मरीज का Electronic Health Record उन सभी अस्पतालों के पास उपलब्ध होगा जो इस पोर्टल से जुड़े हुए हैं. यानी भविष्य में किसी दूसरे सरकारी अस्पताल में भी मरीज को बेहतर इलाज मिल सकेगा.

 

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