Lockdown भी ना रहे और Corona का संक्रमण भी ना हो…ऐसे है मुमकिन, पढ़ें पूरा प्लान

यदि हम टाइमिंग (जैसे सुबह 7 से शाम 7 बजे) को कम करते हैं तो ज्यादा भीड़ बढ़ेगी और अगर 33 फीसदी वर्क फोर्स (Work Force) को इजाजत देते हैं तो तकरीबन 67 फीसदी उत्पादन कम होगा. इसके लिए हमारे पास रास्ता है कि हम दिन के ज्यादा से ज्यादा समय का इस्तेमाल करें.
how we can defeat coronavirus and lockdown, Lockdown भी ना रहे और Corona का संक्रमण भी ना हो…ऐसे है मुमकिन, पढ़ें पूरा प्लान

कोरोना से हमें लड़ना है और आगे भी बढ़ना है. इसके लिए हमें एक समग्र रणनीति बनानी है ताकि हम लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाकर बिगड़े हालात संभाल सकें. हमें ये सब सोशल डिस्‍टेंन्सिंग के दायरे में ही रहकर करना होगा.

देखिए NewsTop9 टीवी 9 भारतवर्ष पर रोज सुबह शाम 7 बजे

हमें क्या करना है

यदि हम काम की टाइमिंग (जैसे सुबह 7 से शाम 7 बजे) को कम करते हैं तो ज्यादा भीड़ बढ़ेगी और अगर हम काम के लिए 33 फीसदी वर्क फोर्स को इजाजत देते हैं तो इससे तकरीबन 67 फीसदी उत्पादन को नुकसान पहुंचेगा. इसके लिए हमारे पास रास्ता है कि हम दिन के ज्यादा से ज्यादा समय का इस्तेमाल करें.

how we can defeat coronavirus and lockdown, Lockdown भी ना रहे और Corona का संक्रमण भी ना हो…ऐसे है मुमकिन, पढ़ें पूरा प्लान

हमें कमर्शियल गतिविधियों के काम के समय को बढ़ाकर एक दिन के पूरे 24 घंटों का उपयोग करने की जरूरत है. आम तौर पर हम दिन में 15-16 घंटे जागते हैं और 8-9 घंटे सोते हैं. इसलिए, हमारे नागरिकों की मूवमेंट- कमर्शियल हो या अन्य, हर दिन 15-18 घंटे के दौरान ही हो रही है. हालांकि, अगर हम इस समय टाइमिंग को 18 से 22 घंटे तक बढ़ा देते हैं, तो हम एक निश्चित समय पर सर्कुलेशन में लोगों की संख्या को कम कर लेंगे. इस कदम से नेचुरल फिजिकल डिस्टेंसिंग हो जाएगी. कामकाज में किसी भी तरह का प्रतिबंध (जैसे दुकानों के सीमित घंटे खुले रखना या 50% दुकानें खुली रहने देना) या तो ज्यादा भीड़ या खपत में कमी की ओर हमें ले जा सकता है.

ऐसा करने से आसान होगी जिंदगी

1- जहां भी संभव हो वर्क फ्रॉम होम हो

2- पूरी कमर्शियल गतिविधियों को दो शिफ्ट में बांट दिया जाए- 8 से 5 और 12 से 9 बजे तक. ऐसा करने से जहां एक ओर पब्लिक ट्रांसपोर्ट आदि पर दबाव 50 फीसदी तक कम होगा वहीं दूसरी तरफ वर्कप्लेस में सोशल डिस्टेंसिंग भी आसानी से लागू होगी.

how we can defeat coronavirus and lockdown, Lockdown भी ना रहे और Corona का संक्रमण भी ना हो…ऐसे है मुमकिन, पढ़ें पूरा प्लान

3- इसके अलावा कंपनी, दुकानों और MSME को रोटेशनल साप्ताहिक अवकाश पर काम करना चाहिए. इसका मतलब है कि 1/7th वर्क फोर्स का रविवार और सोमवार को वीकली ऑफ हो जाए. ऐसा करने से सड़कों पर आबादी के 1/7th हिस्से में अपने आप कमी आ जाएगी. इसी तरह के रोटेशनल पैटर्न को दो दिन के वीकली ऑफ के लिए भी लागू किया जा सकता है. ऐसा करने से हमारी आबादी का लगभग 43 फीसद ही सर्कुलेशन में होगा, जबकि पूरा वर्क फोर्स आर्थिक गतिविधियों में ही लगा होगा.

आसान शब्दों में

मान लीजिये यदि बाजार में आधी दुकानें खुली रहती हैं तो सभी खरीदार सामान लेने के लिए उमड़ पड़ेंगे. इससे कम समय में ज्यादा भीड़ हो जाएगी. यानी सोशल डिस्टेंसिंग कम होगी, इसलिए दुकान भी दो शिफ्ट में खोली जानी चाहिए. आधी दुकान दिन में और आधी शाम में.

सख्त होम सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी

how we can defeat coronavirus and lockdown, Lockdown भी ना रहे और Corona का संक्रमण भी ना हो…ऐसे है मुमकिन, पढ़ें पूरा प्लान

जब हम वर्क फोर्स को बाहर ला रहे हैं, तो प्रत्येक परिवार के बुजुर्ग सदस्यों (65+) और क्लीनिकली कमजोर सदस्यों को अपने घर के भीतर सख्ती से शारीरिक दूरी का पालन करना होगा. यदि संभव हो तो एक कमरे में खुद को सीमित कर लें, क्योंकि जॉब के लिए बाहर जाने वाले युवा asymptomatic हो सकते हैं. ऐसे लोगों से (देश में 80 परसेंट एसिंप्टोमेटिक केस हैं) बुजुर्गों और को-मॉर्बिड परिवार के सदस्यों को संक्रमित होने का ख़तरा हो सकता है.

सारे सवालों के जवाब यहां

सवाल: किस आधार पर वार्किंग पॉपुलेशन जैसे- हॉकर, सेल्फ एम्‍प्‍लॉयड, प्रोफेसर आदि की शिफ्ट को बांटा जाएगा?

जवाब- वर्किंग पॉपुलेशन की शिफ्ट का बंटवारा आधार नंबर के हिसाब से ऑड-ईवन आधार पर किया जा सकता है. आधार के अलावा किसी और आईडी के नंबर का भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है, जो वेरिफाई हो. इस तरह ऑड नंबर वालों को मॉर्निंग शिफ्ट और ईवन नंबर वालों को ईवनिंग शिफ्ट में रखा जा सकता है. या इसका उल्‍टा भी किया जा सकता है.

how we can defeat coronavirus and lockdown, Lockdown भी ना रहे और Corona का संक्रमण भी ना हो…ऐसे है मुमकिन, पढ़ें पूरा प्लान

सवाल: जिन ऑफिस में कर्मचारियों की संख्‍या कम है, जैसे दुकानें, MSME आदि के लिए ये स्‍कीम व्‍यवहार कुशल नहीं है. ऐसे में हमें क्‍या उपाय करना चाहिए?

जवाब– जहां तक छोटे संस्‍थानों का प्रश्‍न है, जैसे दुकानें और MSME आदि तो इन्‍हें दो शिफ्ट में बांटने की जगह एक ही शिफ्ट में बांटा जाना चाहिए. ऐसे में ऑड नंबर वाले पैन कार्ड धारक को मॉर्निंग शिफ्ट में रखा जा सकता है. अधिकतर दुकानें और MSMEs मॉर्निंग शिफ्ट में काम कर सकते हैं.

सवाल: जिन दफ्तरों में कर्मचारियों की संख्‍या ज्‍यादा है, वहां शिफ्ट डिवीजन किस प्रकार से किया जाना चाहिए?
जवाब- कोई भी दफ्तर जहां 10 से ज्‍यादा कर्मचारी हैं, वहां कर्मचारियों को बराबर संख्‍या में शिफ्टों में बांटा जा सकता है. कंपनी मैनेजमेंट अपने हिसाब से इस बाबत निर्णय ले सकते हैं. संस्‍थान को यह तय करना होगा कि इसका अनुपालन कड़ाई से कराया जाए.

सवाल: क्‍या ये अतिआवश्‍यक सेवाओं पर लागू होगा?

जवाब- हां, क्‍यों नहीं, यह 24 घंटे चलाया जाने वाला ऑपरेशन है.

सवाल: कैसे लागू करें?

जवाब- किसी भी उल्लंघन के लिए तुरंत कड़ी सजा का भय दिखाकर.

देखिए NewsTop9 टीवी 9 भारतवर्ष पर रोज सुबह शाम 7 बजे

Related Posts