फिरोजाबाद पुलिस (Firozabad Police) ने सोमवार को भाड़े पर हत्या करने वाले एक अपराधी की निशानदेही पर जिले के नारखी क्षेत्र के धौकल स्थित एक खेत में दफन बरेली निवासी एक शिक्षक का शव खुदाई के बाद बरामद किया. अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) मुकेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि बरेली जिले के इज्जतनगर क्षेत्र के निवासी और बरेली के एक इंटर कॉलेज में प्राध्यापक के पद पर तैनात अवधेश की गुमशुदगी की रिपोर्ट पिछली 16 अक्टूबर को दर्ज करायी गयी थी. वह मूल रूप से फिरोजाबाद के नारखी क्षेत्र भीतरी गांव के रहने वाले थे.

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मिश्रा ने बताया कि फिरोजाबाद पुलिस ने चोरी के मामले में एक हिस्ट्रीशीटर शेर सिंह को गिरफ्तार किया. पूछताछ में उसने बताया कि अवधेश की पत्नी विनीता ने उसकी हत्या के लिये उसे पांच लाख रुपये दिये थे. सिंह के मुताबिक वह अवधेश की हत्या कर शव को अपने साथियों पप्पू, भोला, अंकित और प्रदीप की मदद से गाड़ी से बरेली से फिरोजाबाद लाया और उसे जलाकर खेत में बने गड्ढे में दबा दिया.

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उन्होंने बताया कि पुलिस ने अवधेश की मां अन्नपूर्णा देवी की मौजूदगी में शव की शिनाख्त कराई. इस मामले में अवधेश की पत्नी विनीता का पिता अनिल फौजी भी शामिल है. उसकी तथा शेर सिंह के चारों साथियों की गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है.

यूपी (UP) के बागपत जिले के बड़ौत इलाके से आज सुबह अगवा (Kidnaped) किए गए लोहा व्यापारी (Businessman) को पुलिस (Police) ने अपहरणकर्ताओं से मुक्त करा लिया है. पुलिस (Police) ने लोहा व्यापारी को जिले के ही रटौल गांव के जंगल से सही सलामत बचा (Release) लिया.

मेरठ जोन (Meerut Zone) के अपर पुलिस महानिदेशक (Additional DGP) राजीव सब्बरवाल ने मीडिया (Media) से बातचीत में कहा कि पुलिस की घेराबंदी से घबराए बदमाश अगवा किए गए व्यापारी आदेश जैन को छोड़ कर फरार हो गए.

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‘बदमाशों ने गलती से किया था व्यापारी का अपहरण’

पुलिस अधिकारी ने बताया कि बदमाश किसी और का अपहरण करने बड़ौत पहुंचे थे, लेकिन गलती से उन्होंने आदेश जैन का अपहरण कर लिया.

पुलिस अधिकारी ने कहा कि कुछ सुरागों के सहारे पुलिस बदमाशों का पता लगने की कोशिश कर रही है. व्यापारी के अपहरण की खबर के बाद मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, मुज़फ्फरनगर और हरियाणा के सोनीपत में सीमाओं को सील कर दिया गया था.

व्यापारी के परिवार से मांगी एक करोड़ की फिरौती

बतादें कि व्यापारी आदेश जैन आज सुबह करीब पांच बजे अपने घर से भगवान महावीर मार्ग पर अपनी दुकान में सामान उतरवाने के लिए पहुंचे थे. जब काफी टाइम के बाद भी वह घर नहीं पहुंचे, उसके बाद बदमाशों ने उनके परिवार को फोन कर एक करोड़ की फिरौती की मांग की थी, जिसके बाद परेशान परिवार ने पुलिस को घटना की जानकारी दी और पुलिस ने आदेश जैन को बदमाशों के चंगुल से मुक्त करा लिया.

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दिनदहाड़े हुई अपहरण की इस घटना के बाद से ही व्यापारी वर्ग में काफी रोष था. घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ था. जानकारी के मुताबिक, अपहरणकर्ताओं को पकड़ने के लिए 8 टीमें गठित की गई थीं. सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू की थी.

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बागपत में दिनदहाड़े अपहरण की सनसनीखेज वारदात सामने आई है.  बागपत (Baghpat) में दिनदहाड़े एक लोहा व्यापारी का कार सवार बदमाशों ने अपहरण कर लिया. बदमाशों ने लोहा व्यापारी के परिवार वालों से एक करोड़ की फिरौती मांगी है. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.

दिनदहाड़े हुई अपहरण की इस घटना के बाद से ही व्यापारी रोष में है, पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. जानाकरी के मुताबिक, अपहरणकर्ताओं को पकड़ने के लिए 8 टीमें गठित कर दी गई हैं. पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर जांच पड़ताल में जुट गई है.

बागपत के बड़ौत कोतवाली में बदमाशों ने लोहा व्यापारी आदेश जैन का अपहरण उस समय किया, जब वो अपनी दुकान पर माल उतरवाने के लिए गए थे. दुकान पर काम कर रहे मजदूरों ने व्यापारी के अपहरण की जानकारी परिवार वालों को दी. कुछ देर बाद ही बदमाशों ने व्यापारी के परिवार को फोन कर उनसे एक करोड़ की फिरौती की मांगी की.

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अपहरणकर्ताओं को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए 8 टीमें गठित कर दी गई हैं. यूपी एसटीएफ से भी मदद मांगी जा रही है. एसपी बागपत सहित जनपद के कई थानों के फोर्स घटनास्थल पर मौजूद है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.

बागपत (Baghpat) में दिनदहाड़े अपहरण मामले पर कांगेस की महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने ट्वीट किया है. प्रिंयका गांधी ने ट्वीट कर यूपी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, ‘यूपी में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, व्यापारी सुरक्षित नहीं हैं,बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, सरकार के लोग चुनावी सभाओं में जाकर कोरी भाषणबाजी करते हैं, जनता में भय व्याप्त है’.

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यूपी की 8 विधानसभा सीटों पर 3 नवंबर को उपचुनाव है. इन सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान हो गया है. इन सीटों में कुछ मौजूदा विधायकों के निधन के बाद खाली हुई हैं. इन 8 सीटों पर महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां विपक्ष की कोई रणनीति नजर नहीं आ रही है. दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) है जिसके सामने बड़ी चुनौती उपचुनाव की 8 सीटें जीत कर 2017 के बराबर अपनी 312 सीटों का आंकड़ा पहुंचाना है. समाजवादी पार्टी भी पूरी तैयारी कर रही है ताकि उसकी मौजूदा 2 सीटें बची रहें और अन्य सीटों पर जीत दर्ज की जाए.

इस उपचुनाव में बीजेपी का पूरा ध्यान इस पर है कि वह ज्यादा से ज्यादा सीटें अपने नाम करे जबकि विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर बीजेपी को घेरना चाहती हैं. 2017 के चुनाव में बीजेपी की 312 सीटें थीं जो अब 304 रह गई हैं. 8 सीटें खाली हो गई हैं जिनमें कुछ विधायकों का निधन हो गया या किसी को जेल हो गई. बीजेपी की पूरी कोशिश है कि सभी सीटें जीतकर वह अपनी संख्या 2017 के बराबर 312 पर ले जाए. लेकिन क्या बीजेपी सभी सीटें अपने नाम कर पाएगी? ऐसा होता नहीं दिखता क्योंकि 8 में 2 सीटें ऐसी हैं जहां समाजवादी पार्टी (एसपी) मजबूत है और दोनों सीटें उसकी गढ़ हैं. इसमें एक सीट रामपुर की स्वार सीट है जहां से आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम विधायक थे लेकिन उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था. फर्जी सर्टिफिकेट के मामले में उनका निर्वाचन रद्द हुआ है और उन्हें जेल हुई है. अब्दुल्ला आजम अभी अपने पिता और मां के साथ जेल में हैं. स्वार सीट पर आजम खां परिवार का दबदबा रहा है और यह समाजवादी पार्टी की प्रमुख सीट है. ऐसे में बीजेपी को यहां जीत हासिल करने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. रामपुर में आजमा खां कई बार विधायक रहे हैं बाद में जब वे सांसद बने तो उनकी पत्नी उपचुनाव में जीतीं. बीजेपी न तो स्वार सीट पर कभी जीत दर्ज कर सकी है और न ही रामपुर सीट पर.

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कुछ इसी प्रकार से बीजेपी को मल्हनी सीट पर भी बड़ी चुनौती का सामना करना होगा. जौनपुर के मल्हनी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है. इस सीट से समाजवादी पार्टी के पारसनाथ यादव चुनाव जीते थे, लेकिन लंबी बीमारी के बाद पारसनाथ यादव का निधन हो गया. उनके निधन से यह सीट खाली हुई है जिस पर उपचुनाव कराया जा रहा है. समाजवादी पार्टी ने इस सीट से पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव को प्रत्याशी बनाया है जबकि बीजेपी से मनोज सिंह उम्मीदवार हैं. बहुजन समाज पार्टी ने जयप्रकाश दुबे और कांग्रेस ने राकेश मिश्र को मैदान में उतारकर मुकाबला और रोचक बना दिया है. यह सीट भी समाजवादी पार्टी का गढ़ है जहां से बीजेपी को जीत के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी.

2017 के बाद बीजेपी की सीटें घटने की बात करें तो उसे 8 सीटों का नुकसान है जबकि उसकी सहयोगी दल 9 पर कायम है. इसी तरह निर्दलीय भी 3 पर बने हुए हैं. ऐसी स्थिति में बीजेपी की कोशिश होगी कि वह 8 सीटें जीत कर 2017 के बराबर अपनी संख्या पहुंचाए, जबकि समाजवादी पार्टी भी चाहेगी कि उसकी दो सीटें बची रहें. साथ ही अन्य सीटों पर भी बीजेपी से जीत दर्ज की जाए. समाजवादी पार्टी का आंकड़ा देखें तो पिछले चुनाव की तुलना में उसकी एक सीट बढ़ी है और जो संख्या पहले 47 पर थी वह 48 हो गई है. पिछले उपचुनाव में उसे एक सीट हासिल हुई थी. बहुजन समाज पार्टी की एक सीट पहले से कम हुई है. पहले उसकी 19 सीटें थीं जो एक घटकर 18 रह गई है. कांग्रेस अपनी 7 सीटों पर बनी हुई है जबकि आरएलडी पहले भी एक सीट पर जीती थी और अब भी उसके पास एक सीट है. सुहेलदेव की पार्टी सुभसपा पहले भी 4 पर थी और अब भी है. ऐसी स्थिति में बीजेपी के सामने चुनौती बड़ी है कि वह अपनी संख्या पहले से बढ़ाए.

 

उत्तर प्रदेश उपचुनाव (Uttar Pradesh Byelection) में एक बार फिर से श्मशान और कब्रिस्तान का मुद्दा गरम हो गया है. बीजेपी नेता और उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज (Sakshi Maharaj) ने कहा है कि जनसंख्या (Population) के अनुपात के हिसाब से कब्रिस्तान और श्मशान होने चाहिए. उन्होंने कहा कि देखने में आता है कि किसी गांव में एक मुसलमान है तो भी बहुत बड़ा कब्रिस्तान बना हुआ है.

साक्षी महाराज ने कहा, “गांव के लोगों के लिए कई बार श्मशान की जगह छोटी पड़ जाती है. ऐसे में गांव के लोगों को खेत की मेड़ या गंगा किनारे दाह संस्कार करना पड़ता है. क्या ये अन्याय नहीं है? ऐसे में यह जरूरी है कि गांव में जनसंख्या के अनुपात में श्मशान या कब्रिस्तान होने चाहिए.”

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‘धैर्य और शालीनता की न ली जाए परीक्षा’

बीजेपी नेता ने आगे कहा कि किसी तरह की मजबूरी नहीं है. मजबूरी यह है कि हमारे (हिंदुओं के) धैर्य और शालीनता की परीक्षा न ली जाए. मालूम हो कि साक्षी महाराज उन्नाव में बीजेपी प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव प्रचार करने गए थे. इसी दौरान उन्होंने यह बयान दिया.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा की खाली आठ में से सात सीटों पर उपचुनाव होना है. 2022 से पहले का यह चुनाव सत्ता पर काबिज भाजपा के लिए इम्तिहान माना जा रहा है. भाजपा ने इस उपचुनाव के लिए घोषित किए प्रत्याशियों की सूची में अपने बेदाग छवि और समर्पित कार्यकातार्ओं को जगह देकर एक बड़ा संदेश दिया है.

सहानुभूति कार्ड खेलने की कोशिश

कुछ सीटें अपने विधायकों के निधन के कारण खाली हुई हैं, वहां उनके किसी परिवार जन को ही मैदान में उतारकर सहानुभूति कार्ड भी खेला गया है. बाकी सीटों पर पुराने व समर्पित कार्यकर्ता को ही टिकट देकर भाजपा ने भरोसा जीतने की कोशिश की है.

वरिष्ठ राजनीतिक विष्लेषक पीएन द्विवेदी का कहना है कि उत्तर प्रदेश वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व सात सीटों पर होने वाले चुनाव को भारतीय जनता पार्टी सेमीफाइल मानकर तैयारी में जुटी है. जिन सात सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें से 6 भाजपा के पास थी. ऐसे में पार्टी सभी सीटों को जीतने का जोर लगाएगी. यह चुनाव आगे आने वाले समय के लिए बड़ा संकेत साबित होंगे.

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उत्तर प्रदेश की 8 सीटों पर उपचुनाव है. चुनाव आयोग ने इसके लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है. इन सीटों पर बिहार चुनाव के साथ ही 3 नवंबर को मतदान होंगे. इन 8 सीटों में बुलंदशहर सदर सीट भी है जहां उपचुनाव कराए जा रहे हैं. यहां से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक वीरेंद्र सिरोही थे जिनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी. अब इस सीट पर 3 नवंबर को उपचुनाव प्रस्तावित है.

बीजेपी ने वीरेंद्र सिरोही की पत्नी ऊषा को अपना उम्मीदवार बनाया है. समाजवादी पार्टी का इस सीट पर राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन है. राष्ट्रीय लोकदल ने प्रवीण सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की ओर से मोहम्मद युनूस और कांग्रेस से सुशील चौधरी उम्मीदवार हैं. अभी हाल में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुलंदशहर चुनाव प्रचार करने पहुंचे और उषा सिरोही के लिए वोट मांगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव का शुभारंभ बुलंदशहर से किया था. अब प्रदेश में दंगाइयों को उनकी सही जगह पहुंचाया जा रहा है और दंगाइयों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम में पूर्व मंत्री किरनपाल सिंह बीजेपी में शामिल हुए.

यूपी में होने वाले उपचुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन है. राष्ट्रीय लोकदल के खाते में बुलंदशहर सीट गई है, जबकि बाकी की सीटों पर समाजवादी पार्टी चुनाव लड़ेगी. समाजवादी पार्टी ने उपचुनाव की अन्य सीटों पर भी अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है. अमरोहा की नौगाम सादात सीट से सैय्यद जावेद अब्बास, फिरोजाबाद की टुंडला सीट से महाराज सिंह धनगर, कानपुर की घाटमपुर सीट से इंद्रजीत कोरी और जौनपुर की मल्हनी सीट से लकी यादव चुनाव मैदान में हैं. सात सीटों में केवल 1 सीट समाजवादी पार्टी के पास थी जबकि 6 बीजेपी के खाते में थी. अब इन सीटों पर उपचुनाव कराए जा रहे हैं.

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अभी हाल में राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने दिल्ली में भटौना निवासी और आरएलडी के पूर्व प्रवक्ता प्रवीण कुमार सिंह को बुलंदशहर से पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने का ऐलान किया था. प्रवीण कुमार के पिता पहले विधायक रह चुके हैं. वे अगौता सीट से तीन बार विधायक रहे हैं. इसके अलावा वे राज्यसभा सांसद रहे और केंद्र सरकार में राज्यमंत्री का भी पद संभाला है. 62 साल के प्रवीण कुमार ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमए किया है और उन्होंने 1991 में अगौता सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, हालांकि वह चुनाव स्थगित हो गया था. दो साल बाद 1993 में प्रवीण कुमार सिंह आरएलडी में शामिल हो गए.

बुलंदशहर सदर सीट पर 3 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में बड़ी-छोटी पार्टियों के 13 उम्मीदवार हैं. भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी ने मो. यामीन को अपना कैंडिडेट बनाया है. हाल में बीजेपी का दामन छोड़कर जाने वाली उर्मिला राजपूत ने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से अपना परचा भरा है. लोकदल से महमूद हसन, एनसीपी से योगेंद्र शंकर शर्मा, राष्ट्रीय जननायक पार्टी से आशीष कुमार, पीपीआईडी से धर्मेंद्र कुमार, राष्ट्रीय जनक्रांति पार्टी से राहुल भाटी ने नामांकन दाखिल किया है. इसके अलावा सीमा, मोहम्मद यूनुस, गीता रानी शर्मा, संजीव कुमार, सुमन देवी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है.

 

कबाड़ काम करने वाले के बेटे अरविंद कुमार ने नौवीं बार में मेडिकल परीक्षा पास कर ली. अरविंद कुमार ने भारतीय स्तर पर 11603 रैंक हासिल की है और अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में उनकी 4,392 रैंक आई है. नौवीं बार में मेडिकल परीक्षा पास होने पर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि, उनकी 8 कोशिशें विफल हुईं, मगर फिर भी वो कभी भी मायूस नहीं हुए. उन्होंने कहा, ‘मैं नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलने और उससे ऊर्जा व प्रेरणा लेने की मंशा रखता हूं, इस सफलता का श्रेय मेरे परिवार, आत्मविश्वास और निरंतर कठिन परिश्रम को जाता है. उन्होंने बताया कि, उनके पिता केवल 5वीं तक पढ़ें हैं और मां ललिता देवी अनपढ़ हैं’.

अरविंद कुमार ने बताया कि, ‘मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए उनका अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करना महज़ एक सपना नहीं था बल्कि उन लोगों को जवाब देने का एक तरीका था जिनके हाथों उसके परिवार ने वर्षों से अपमान झेला’. उन्होंने कहा, ‘मेरा सपना डॉक्टर बनने का था जबकि कबाड़ी का काम करने वाले मेरे पिता को अपने काम और नाम के चलते लगातार गांव वालों से अपमानित होना पड़ता था’.

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अरविंद ने कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं और मेरे परिवार को मुझ पर गर्व है क्योंकि 1500-1600 लोगों की आबादी वाले गांव में, मैं पहला डॉक्टर बनने जा रहा हूं’. उनका कहना है कि उन्हें गोरखपुर के एक मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलने की पूरी उम्मीद है और वह एक आर्थोपेडिक सर्जन बनना चाहते हैं.

अरविंद के पिता ने बताया कि उनके बेटे के कोटा में रहने का खर्च पूरा करने के लिए उन्हें रोजाना 12 से 15 घंटे तक काम करना पड़ता था, उन्होंने बताया कि, ‘मेरे बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मैंने रोजाना 12 से 15 घंटे काम किया और छह महीने में केवल एक ही बार परिवार से मिलने के लिए कुशीनगर जा पाया’. उन्होंने कहा, ‘मेरे बेटे अरविंद ने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को साबित कर दिया है, मुझे उसपर गर्व है’.

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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर रावण का कहना है कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में उनके काफिले पर गोलियां चलाई गई हैं. भीम आर्मी प्रमुख ने बताया कि उनके काफिले पर गोलीबारी तब हुई जब वह बुलंदशहर में अपने प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार करने गए थे. इस गोलीबारी का आरोप उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर मढ़ा. चंद्रशेखर आजाद ने ट्वीट कर ये जानाकारी साझा की.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, “बुलंदशहर के चुनाव में हमारे प्रत्याशी उतारने से विपक्षी पार्टियां घबरा गई हैं और आज की रैली ने इनकी नींद उड़ा दी है, जिसकी वजह से अभी कायर्तापूर्ण तरीके से मेरे काफिले पर गोलियां चलाई गई हैं. यह इनकी हार की हताशा को दिखाता है, ये चाहते हैं कि माहौल खराब हो, लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे.”

दरअसल बिहार के विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश के उपचुनावों के साथ ही चंद्रशेखर आजाद दलित नेता के तौर पर राजनीति में एंट्री कर रहे हैं. आजाद ने बुलंदशहर उपचुनाव के लिए हाजी यमीन को अपनी पार्टी (आजाद समाज पार्टी) का उम्मीदवार बनाया है. उनकी पार्टी बिहार में लगभग 30 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और वो प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधनल (PDA) के साथ गठबंधन में भी हैं.

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भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्‍यक्ष स्‍वतंत्र देव सिंह ने एक विवादित टिप्पणी में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय कर दिया है कि पाकिस्‍तान और चीन से युद्ध कब होना है. उनकी यह टिप्पणी शुक्रवार को आई. मालूम हो कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तनाव जारी है, जहां दोनों देशों के सैनिक काफी संख्या में तैनात हैं.

भाषा के मुताबिक, बीजेपी नेता ने अपने दावे को अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ होने और पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने से संबद्ध किया है.

दरअसल, सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें उन्‍होंने कहा है, “राम मंदिर और अनुच्छेद 370 पर निर्णय की तरह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय कर दिया है कि पाकिस्‍तान और चीन से युद्ध कब होना है. संबंधित तिथि तय है कि कब क्‍या होना है.”

“कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ाने के लिए बोला ऐसा”

स्‍वतंत्र देव सिंह ने बीते 23 अक्‍टूबर को बलिया जिले के सिकंदरपुर में बीजेपी विधायक संजय यादव के आवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की थी. बीजेपी विधायक संजय यादव ने रविवार को यह वीडियो जारी किया.

स्‍वतंत्र देव सिंह ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के नेताओं की तुलना आतंकवादियों से की. इस संदर्भ में जब बीजेप के क्षेत्रीय सांसद रवींद्र कुशवाहा से पूछा गया, तो उन्‍होंने कहा कि प्रदेश अध्‍यक्ष ने कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ाने के लिए ऐसा कहा है.

बता दें कि स्वतंत्र देव ने साल की शुरुआत में सामाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘समाजवादी पार्टी के प्रमुख को पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को समझने के लिए एक महीने तक वहां रहना चाहिए.’

‘हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को समझने के लिए एक महीने तक पाकिस्तान में रहें अखिलेश’

वृंदावन में प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Temple) के पट कोरोना वायरस नियमों (Corona Rules) के साथ आज एकबार फिर खोल दिए (Reopen) गए, इस दौरान सामाजिक दूरी (Social Distancing) का खास ख्याल रखा गया. आज मंदिर (Temple) परिसर में जैसे ही श्रद्धालुओं ने पहुंचना शुरू किया, इस दौरान कोरोना प्रोटोकॉल (Corona Protocol) को सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ जिला और पुलिस (Police) के अधिकारी खुद मंदिर परिसर में मौजूद रहे.

इससे पहले कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के बीच सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट (Court) के आदेश के बाद पर 17 अक्टूबर को मंदिर को भक्तों के लिए खोल दिया गया था, लेकिन मंदिर में भारी भीड़ उमड़ने के बाद, प्रबंधक मुनीश शर्मा ने 19 अक्टूबर से मंदिर को फिर से बंद (Close) करने का आदेश दे दिया था.

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मंदिर बंद होने से आक्रोशित थे श्रद्धालु

मंदिर बंद होने के बाद आक्रोशित श्रद्धालुओं ने धर्म रक्षा संघ के बैनर तले मंदिर के सामने विरोध शुरू कर दिया था. लोगों के विरोध और मांग को देखते हुए प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को इस मामले में दखल देना पड़ा. उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर जिला प्रशासन के मंदिर खुलवाए जाने के लिए व्यवस्था करने की अपील की थी.

सांवरा के दर्शन के लिए लगा भक्तों का तांता

लंबे समय के बाद आज मंदिर के पट खुलते ही सांवरा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वहां भारी तादाद में पुलिस बल को तैनात किया गया था. मंदिर प्रबंधक ने कहा कि बिहारी जी के दर्शन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण शुरू किया गया है. कोरोना दिशा-निर्देशों के मुताबिक एक दिन में सिर्फ 500 भक्तों को ही दर्शन की अनुमति दी जा रही है. जिन भक्तों को बांके बिहारी के दर्शन करने हैं, उनको इसका ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा, इसी के आधार पर मंदिर में प्रवेश मिलेगा.

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वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर को कोरोना महामारी की वजह से 22 मार्च को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया था, लेकिन संतों और भक्तों द्वारा कोर्ट में डाली गई .याचिकाओं के बाद मंदिर को 25 अक्टूबर से एकबार फिर खोलने का निर्णय लिया गया.

उत्तर प्रदेश (UP) के बांदा जिले के भाटी गांव में भगवान को इंसानी बलि देने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. नवरात्रि का व्रत (Fast) पूरा होने के बाद एक शख्स ने कथित रूप से अपनी जीभ काट कर (Cut The Tongue) मंदिर में चढ़ा दी. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया. पुलिस ने आज इस घटना की जानकारी दी.

बबेरू कोतवाली के एसएचओ (SHO) जय श्याम शुक्ला ने बताया कि भाटी गांव में आत्मा राम नाम के एक 32 साल के शख्स ने शनिवार (Saturday) सुबह खेरापति के मंदिर (Temple)  में पूजा करने के बाद अपनी जीभ (Tongue) काट कर चढ़ा दी. इस घटना के बाद वहां ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई. सूचना मिलने पर पुलिस (Police) तुरंत मौके पर पहुंची और शख्स को तुरंत अस्पताल (Hospital) में भर्ती कराया.

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पिता का दावा- बेटे ने बहकावे में आकर काटी जीभ

पुलिस अधिकारी के मुताबिक शख्स की हालत में अब सुधार है. वहीं पीड़ित के पिता ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा मानसिक रूप से बीमार है, और वह नवरात्रि में नौ दिन से उपवास कर रहा था. पुलिस के मुताबिक शख्स के पिता ने दावा किया कि उनके बेटे ने किसी के बहकावे में आ कर ऐसा किया होगा.

आस्था में बलि का ये कोई पहला मामला नहीं है. ऐसी ही खबरें अक्सर सामने आती हैं. हालही में मध्यप्रदेश में भी बलि देने का दहला देने वाला मामला सामने आया था. यहां एक बुजुर्ग मां ने अंधविश्वास के चलते अपने ही 24 साल के बेटे की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी. आरोपी मां का कहना था कि उसने अपने बेटे की बलि दी है.

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कुछ दिन पहले मां ने दी थी बेटे की बलि

हालांकि पुलिस ने आरोपी महिला को मानसिक रूप से बीमार बताया था. दरअसल पड़ोस में माता का जागरण चल रहा था, परिवार के कुछ सदस्य जागरण में गए थे, इसी दौरान मां ने घर में सो रहे अपने 24 साल के बेटे की गला काटकर हत्या कर दी. पुलिस की जांच में पता चला कि आरोपी महिला खुद पर देवी आने की बात कहती थी.

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (Deendayal Upadhyaya Gorakhpur University) के कुलपति (Vice Chancellor) राजेश सिंह (Rajesh Singh) ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से मुलाकात की. गोरखनाथ मंदिर में हुई इस मुलाकात में कुलपति ने विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय संस्थान के रूप से विकसीत करने का रोडमैप प्रस्तुत किया. कुलपति और मुख्यमंत्री की इस मुलाकात के दौरान कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई. जैसे कि कुछ नए पाठ्यक्रम की शुरुआत करने, विश्वविद्यालय में नए संस्थान और केंद्र खोलने को लेकर चर्चा हुई.

विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, कुलपति ने एक ग्लोबल इंस्टिट्यूट महायोगी गुरु गोरखनाथ शोधपीठ का निर्माण करने का रोडमैप मुख्यमंत्री को दिखाया. साथ ही कहा कि जल्द ही नाथ पंथ पर इनसाइक्लोपीडिया तैयार हो जाएगी.

‘मुहैया कराई जाएंगी विश्वस्तरीय शिक्षा-सुविधाएं’

सिंह ने कहा, “नई शिक्षा नीति के तहत प्रस्तावित केंद्र और संस्थानों के जरिए विश्वविद्यालय में विश्वस्तरीय शिक्षा और सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी.”

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विश्वविद्यालय ने मल्टी-डिसिप्लिनरी साइंसेज का एक संस्थान शुरू करने की योजना बनाई है. साथ ही आठ केंद्रों का प्रस्ताव दिया है, जिसमें आनुवंशिकी, जैव-सूचना विज्ञान, जलीय कृषि, जैव-संसाधन, जलवायु परिवर्तन, डेटा विज्ञान, सूचना सुरक्षा, खाद्य प्रौद्योगिकी और पैकेजिंग और इंस्ट्रूमेंटेशन जैसे विषयों को शामिल किया गया है.

नए पाठ्यक्रमों की होगी शुरुआत

बयान के मुताबिक स्नातक, परास्नातक से लेकर पीजी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स को डिजाइन किया जा रहा है. इनमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल पर भी पूरा फोकस होगा ताकि विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान तक ही न सिमट कर रह जाएं.

मुख्यमंत्री ने कुलपति को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया. साथ ही डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में नए पाठ्यक्रमों, संस्थानों और केंद्रों के शुभारंभ में सहयोग देने को कहा.

कुलपति ने कहा कि हमारा प्रयास है कि दूसरे राज्यों और विदेशों से भी छात्रों को आकर्षित किया जाए. इससे डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय को एनएएसी और एनआईआरएफ रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी.

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आज नवमी (Navmi) के मौके पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी (CM Yogi) आदित्यनाथ ने गोरखपुर में विधिविधान से नौ कन्याओं का पूजन किया. इस दौरान सीएम योगी ने कन्याओं के माथे पर तिलक (Tilak) लगाया, उनके पैर छूकर उन्हें चुनरी भेंट की और उन्हें अपने हाथ से भोजन कराया.

सीएम योगी (CM Yogi) आदित्यनाथ ने ट्वीट (Tweet) कर नवमी के मौके पर कन्या पूजन की तस्वीरें साझा की हैं. सीएम योगी हर साल पूरे विधिविधान के साथ कन्या पूजन करते हैं, यह परंपरा (Tradition) गोरखनाथ मंदिर में सदियों से चली आ रही है.

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सीएम योगी ने कन्या पूजन कर लिया आशीर्वाद

शरदीय नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा या विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है. यह त्योहार पूरे भारत में पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है .इस दौरान रावण का पुतला जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है.

योगी आदित्यनाथ ने गोरक्षनाथ धाम पहुंचकर सबसे पहले गुरु गोरक्षनाथ और अखंड ज्योति के दर्शन किए, फिर उन्होंने मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की. इसके बाद उन्होंने हवन-पूजन किया. हवन के बाद सीएम ने नौ कन्याओं का विधिवत पूजन करके उन्हें अपने हाथों से भोजन परोसा और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद भी लिया.

कन्या पूजन शक्ति का प्रतीक- सीएम योगी

बतादें कि सीएम योगी हर साल नवरात्रि का व्रत रखने के साथ ही गोरखनाथ मंदिर में अनुष्ठान करते हैं शारदीय और वासंतिक नवरात्रि में गोरखनाथ मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में, एक ‘मां’ की भूमिका पूजनीय है और ‘कन्या पूजन’ शक्ति का प्रतीक है.

उन्होंने दशहरा के अवसर पर राज्य के लोगों को अपनी शुभकामनाएं दीं और लोगों से कोरोनोवायरस से सुरक्षा के लिए जारी दिशानिर्देश का पालन करने की अपील की. उन्होंने सभी लोगों से वायरस के प्रसार के खिलाफ सतर्क रहने की अपील की.

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गोरखपुर में आज शाम को सीएम योगी की अगुवाई में भव्य विजय शोभायात्रा निकाली जाएगी. जुलूस परंपरागत ढंग से मानसरोवर रामलीला मैदान पहुंचेगा, जहां सीएम भगवान श्रीराम का तिलक करेंगे. शाम सात बजे सहभोज कार्यक्रम आयोजित होगा. इसके बाद बुधवार सुबह वह लखनऊ के लिए रवाना होंगे.

दशहरे के अवसर (Vijay Dashmi) पर देश भर में बुराई का प्रतीक माने जाने वाले रावण का पुतला जलाया जाता है, लेकिन भगवान कृष्ण की नगरी में एक वर्ग ऐसा भी है जो रावण का पुतला जलाने का विरोध करता है और उस दिन रावण की पूजा अर्चना करता है.

ब्राह्मण समाज (Brahmins) के सारस्वत गोत्र (Saraswat caste) के लोगों ने रावण के प्रति अपनी आस्था दर्शाने के लिए लंकेश भक्त मंडल का गठन कर रखा है जो पिछले दो दशक से रावण के पुतले दहन करने का विरोध करता आ रहा है.

लंकेश भक्त मंडल के संयोजक ओमवीर सारस्वत का कहना है कि संगठन के लोग हर वर्ष दशहरे के मौके पर मथुरा के सदर क्षेत्र में यमुना किनारे स्थित एक शिव मंदिर में रावण की पूजा करते हैं. इस वर्ष भी लंकेश भक्त मंडल के सदस्य रविवार को दोपहर बारह बजे रावण की पूजा करेंगे.

उन्होंने कहा कि महाराज रावण भगवान महादेव के परम भक्त थे और बहुत ही विद्वान थे, इसीलिए वे लोग उनका नमन करते हैं. प्रकांड विद्वान होने के नाते किसी को भी उनका पुतला दहन नहीं करना चाहिए, इसीलिए वे उनके पुतले जलाए जाने का विरोध करते हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसा करना किसी भी विद्वान के अनादर के समान है और एक ब्राह्मण के मामले में तो यह ‘‘ब्रह्महत्या’’ सरीखी है. उन्होंने कहा कि वैसे भी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार मृत व्यक्ति का पुतला दहन करना अपमान करने समान है जिसकी कानून भी इजाजत नहीं देता.

सारस्वत ने कहा कि हमारे संविधान में भी किसी की भी धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचाना दंडनीय अपराध है, समाज का एक वर्ग दशानन के पुतले दहन कर दूसरे वर्ग की धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाता है और इसे रोका जाना चाहिए.

कोरोना महामारी (Corona Pandemic) की वजह से इस साल सारे त्योहार सिर्फ रस्म भर रह गए हैं. कोरोना संकट की वजह से दशहरे के दिन होने वाले रावण दहन (Ravan Dahan) का मजा कम न हो, इसलिए यूपी (UP) के वाराणसी के बच्चों ने स्मार्ट रावण (Smart Ravan) बनाया है.  बच्चों ने सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का पालन करने के लिए इस साल मोबाइल (Mobile) से रावण दहन करने का प्लान बनाया है. नए तरीके में बिल्कुल भी भीड़ नहीं होगी, लेकिन रावण दहन का आनंद और उल्लास पहले वाला ही होगा.

वाराणसी (Varanasi) के कुछ बच्चों ने रावण दहन के लिए एक डिवाइस (Device) बनाई है, जिसमें जय श्री राम के टाइप करते ही कमांड मिलेगी, और यह डिवाइस काम करना शुरू कर देगी.

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सिर्फ ‘जय श्री राम’ कमांड से जलेगा रावण

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वारणसी के एक युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया के निर्देशन में बच्चों ने स्मार्ट रावण बनाया है, जिसे सोशल मीडिया के माध्यम से सिर्फ जय श्री राम की कमांड देने से ही जलाया जा सकेगा.

श्याम चौरसिया ने न्यूज एजेंसी से कहा कि कोरोना संकट को देखते हुए उन्होंने छोटे बच्चों के साथ मिलकर एक स्मार्ट रावण बनाया है, जिसमें एक सर्किट सोशल मीडिया के जरिए रावण के पुतले में लगाया है, जिसे मोबाइल से जोड़ा जाएगा, उन्होंने कहा कि मोबाइल में जय श्री राम की कमांड डालते ही रावण में लगा सर्किट काम करने लगेगा , और वहां पर लगी तिल्ली से पुतला जलने लगेगा.

रावण दहन में होगा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन

उन्होंने बताया कि जिस तरह से हम बधाई संदेश भेजते हैं, ठीक उसी तरह से यह काम करेगा, इससे सोशल डिस्टेंसिंग का अच्छे से पालन भी किया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि फिलहाल इसे छोटे बच्चों के लिए 2-3 फिट के पुतले में बनाया गया है, बडे़ पुतले को भी इसी तरह फूंका जा सकता है.

रावण बनाने वाले शौर्य यादव ने बताया कि स्मार्ट रावण बनाने में 1 हफ्ते का समय लगा,  इसे व्हाट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टा के माध्यम से जलाया जा सकता है. स्मार्ट रावण को बनाने के लिए एक पुराने एंड्रायड फोन, 9 वोल्ट की बैट्री, एलइडी लाइट, हीटिंग प्लेट का इस्तेमाल किया गया है. इसे बनाने में करीब 2200 रुपए का खर्च आया.

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स्मार्ट रावण बनाने में सहयोगी रहे अभय शर्मा ने बताया कि कोरोना संकट को देखते हुए यह एक शानदार कदम है. उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों की यह एक नई प्रकार की कला है, इससे कोरोना के सारे प्रोटोकॉल का पालन आराम से किया जा सकेगा.

उत्तर प्रदेश की 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव है. बिहार चुनाव के साथ ही यूपी की इन सीटों पर उपचुनाव कराए जा रहे हैं. इन 8 सीटों में 6 पर बीजेपी का कब्जा है जबकि दो सीटें समाजवादी पार्टी (एसपी) के पास हैं. 8 में कई सीटें विधायकों के निधन से खाली हुई हैं. आइए जानते हैं कौन सीट पर कौन उम्मीदवार है.

टुंडला सीट- यूपी की जिन 8 सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें फिरोजाबाद की टूंडला सीट भी शामिल है. बीजेपी के डॉ. एसपी सिंह बघेल के सांसद बनने से यह सीट खाली हुई है जहां उपचुनाव कराए जा रहे हैं. बीजेपी ने यहां से प्रेमपाल धनगर को टिकट दिया है. धनगर के सामने एसपी के महराज सिंह धनगर चुनाव मैदान में हैं. दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी ने संजीव कुमार चक को और कांग्रेस ने स्नेहलता को उम्मीदवार बनाया है.

बांगरमऊ सीट- उन्नाव की बांगरमऊ सीट पर उपचुनाव होगा. यहां से बीजेपी के कुलदीप सिंह सेंगर ने जीत दर्ज की थी, लेकिन उनको उम्र कैद की सजा होने के बाद विधानसभा की सदस्यता रद्द हो गई. अब इस सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है. बीजेपी ने यहां से उन्नाव के पूर्व जिलाअध्यक्ष श्रीकांत कटियार को टिकट दिया है, जबकि समाजवादी पार्टी ने सुरेश कुमार पाल और बीएसपी ने महेश प्रसाद को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने बांगरमऊ से आरती बाजपेयी को अपना उम्मीदवार बनाया है.

मल्हनी सीट- जौनपुर के मल्हनी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा. इस सीट से समाजवादी पार्टी के पारसनाथ यादव चुनाव जीते थे, लेकिन लंबी बीमारी के बाद पारसनाथ यादव का निधन हो गया. उनके निधन से यह सीट खाली हुई है जिस पर उपचुनाव कराया जा रहा है. समाजवादी पार्टी ने इस सीट से पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव को प्रत्याशी बनाया है जबकि बीजेपी से मनोज सिंह उम्मीदवार हैं. बहुजन समाज पार्टी ने जयप्रकाश दुबे और कांग्रेस ने राकेश मिश्र को मैदान में उतारकर मुकाबला और रोचक बना दिया है.

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देवरिया सदर- देवरिया सदर से बीजेपी के जन्मेजय सिंह जीते थे, लेकिन उनके निधन से यह सीट खाली हो गई. बीजेपी ने सत्यप्रकाश मणि को अपना उम्मीदवार बनाया है. समाजवादी पार्टी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है. बीएसपी ने अभयनाथ त्रिपाठी जबकि कांग्रेस ने मुकुंद भास्कर मणि त्रिपाठी को चुनाव में उतारा है. दिवंगत विधायक जन्मेजय सिंह के बेटे यहां पर बीजेपी से बगावत कर चुनाव मैदान में हैं.

बुलंदशहर- बुलंदशहर सीट से वीरेंद्र सिरोही विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन उनके निधन से यह सीट खाली हो गई. अब यहां भी उपचुनाव होने जा रहा है. बीजेपी ने वीरेंद्र सिरोही की पत्नी ऊषा को अपना उम्मीदवार बनाया है. समाजवादी पार्टी का इस सीट पर राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन है. रालोद ने प्रवीण सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है. बीएसपी की ओर से मोहम्मद युनूस और कांग्रेस से सुशील चौधरी उम्मीदवार हैं.

घाटमपुर- कानपुर की घाटमपुर सीट पर भी उपचुनाव प्रस्तावित है. यहां से कैबिनेट मंत्री कमल रानी वरुण का कोरोना के कारण निधन हो गया था. उनके निधन के बाद खाली पड़ी घाटमपुर सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा. बीजेपी ने यहां से उपेंद्र पासवान को प्रत्याशी बनाया है. समाजवादी पार्टी ने इंद्रजीत कोरी और बीएसपी ने कुलदीप कुमार संखवार को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने कृपा शंकर को टिकट दिया है.

नौगाम सीट- अमरोहा की नौगाम सीट पर उपचुनाव होगा. यहां से कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान का भी कोरोना से निधन हो गया था, जिससे यह सीट खाली पड़ी है. बीजेपी ने दिवंगत मंत्री चेतन चौहान की पत्नी संगीता चौहान को उम्मीदवार बनाया है. संगीता चौहान का मुकाबला समाजवादी पार्टी के सैय्यद जावेद अब्बास, बीएसपी के मोहम्मद फुरकान अहमद और कांग्रेस के कमलेश सिंह से होगा.

स्वार सीट- रामपुर की स्वार सीट पर भी उपचुनाव होगा. स्वार से एसपी सांसद आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम चुनाव जीते थे. अब्दुल्ला आजम की सदस्यता जन्मतिथि विवाद में निरस्त कर दी गई थी, जिसके बाद उपचुनाव कराने की नौबत आई है. स्वार सीट का मामला कोर्ट में था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने का आदेश जारी कर दिया. कोर्ट ने तुरंत चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया.

 

बलिया (Ballia) जिले के दुर्जनपुर गांव (Durjanpur Village) में उचित मूल्य की दुकान के आवंटन के दौरान हुई हिंसक वारदात में आरोपी पक्ष की अर्जी पर शनिवार को मुकदमा दर्ज किया गया. कुल 21 व्‍यक्तियों के विरूद्ध नामजद और 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है. आवंटन के दौरान गोली लगने से मारे गए जयप्रकाश पाल को भी आरोपी पक्ष की शिकायत के आधार पर आरोपी बनाया गया है. रेवती थाना प्रभारी प्रवीण सिंह ने शनिवार को बताया कि दुर्जनपुर निवासी आशा प्रताप सिंह की अर्जी पर सुनवाई के दौरान एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को मुकदमा दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए थे.

थाना प्रभारी के मुताबिक, अदालत के आदेश के अनुसार शनिवार को बलवा, संगठित होकर धारदार हथियार से हमला करने, जान लेने की नीयत से हमला कराने, गंभीर रूप से घायल करने, पथराव, अपशब्‍द कहने और जान से मारने की धमकी देने के मामलों में आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम के तहत 21 नामजद और 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया.

नामजद आरोपियों में जयप्रकाश पाल का भी नाम

उन्होंने बताया कि इन नामजद आरोपियों में जयप्रकाश पाल का भी नाम है. जयप्रकाश पाल की 15 अक्‍टूबर को दुर्जनपुर में उचित मूल्य की दुकान के आवंटन के दौरान हुए विवाद में गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी. इस मामले में पाल परिवार की शिकायत पर धीरेंद्र प्रताप सिंह को मुख्‍य आरोपी बनाया गया था. पुलिस ने इस मामले में अब तक धीरेंद्र प्रताप समेत 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.

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इस बीच, धीरेंद्र प्रताप सिंह की भाभी आशा प्रताप सिंह ने पाल पक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है. आशा ने अपनी अर्जी में कहा है कि गत 15 अक्टूबर को दुर्जनपुर में उचित मूल्य की दुकान के आवंटन के लिये खुली बैठक हो रही थी.

‘पुरानी रंजिश के चलते जान लेने की नीयत से किया हमला’

उन्होंने कहा कि उपजिलाधिकारी द्वारा बैठक निरस्त कर देने के बाद उनके पक्ष के सभी लोग अपने घर जा रहे थे, लेकिन तभी पाल पक्ष ने पुरानी रंजिश के चलते जान लेने की नीयत से उन पर हमला कर दिया गया, जिसमें धीरेंद्र प्रताप सिंह सहित आठ लोग घायल हो गए.

इस मामले को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी समेत विपक्ष सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को घेरने की पूरी कोशिश कर रहा है, जबकि सत्‍ता पक्ष के विधायक सुरेंद्र सिंह आरोपी धीरेंद्र प्रताप के पक्ष में खुलकर सामने आ गए हैं.

सुरेंद्र सिंह ने की थी मुकदमा दर्ज करने की पैरवी

सुरेंद्र सिंह ने धीरेंद्र के पक्ष से मुकदमा दर्ज करने के लिए थाने में जाकर पैरवी की थी, जिस पर कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाद्रा ने ट्वीट कर भाजपा के शीर्ष नेताओं से सवाल पूछा था. उन्होंने सवाल किया था कि क्‍या वे हत्‍यारोपी की पैरवी करने वाले विधायक के साथ खड़े हैं और अगर ऐसा नहीं है तो विधायक अभी तक भाजपा में क्‍यों हैं.

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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में गाय का गोबर रोजगार का जरिया बनता जा रहा है. गोबर सिर्फ उपले, खाद या बॉयोगैस बनाने के ही काम नहीं आता, बल्कि इसी गोबर से रोजमर्रा के लिए उपयोगी कई वस्तुएं भी बन सकती हैं. योगी सरकार के गौ संरक्षण अभियान के चलते अब तक प्रदेश के 11.84 लाख निराश्रित गोवंशों में से अब तक 5 लाख 21 हजार गोवंशों को संरक्षित किया गया है. सरकार द्वारा 4500 अस्थायी निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल संचालित हैं.

ग्रामीण इलाकों में 187 बृहद गौ-संरक्षण केंद्र बनाए गए हैं. शहरी इलाकों में कान्हा गोशाला तथा कान्हा उपवन के नाम से 400 गौ-संरक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं. इसी योजना के तहत यूपी के प्रयागराज जिले स्थित कौड़िहार ब्लॉक के श्रींगवेरपुर के बायोवेद कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान शोध संस्थान में गोबर से बने उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है.

यूपी समेत अन्य प्रदेशों के कई लोग इसका प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं. संस्थान में गोबर की लकड़ी भी बनाई जाती है, जिसे गोकाष्ठ कहते हैं. इसमें लैकमड मिलाया गया है, इससे ये ज्यादा समय तक जलती है. लकड़ी की जगह अब गो-काष्ठ का इस्तेमाल जनपद आगरा की जिला जेल में बंद कैदी अन्य जनपदों के कैदियों के लिए उदाहरण बने हुए हैं.

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फिरोजाबाद के स्वर्ग आश्रम में भी इसी गोकाष्ठ का प्रयोग हो रहा है. लोगों की माने तो इस काष्ठ के प्रयोग से जहां दाह संस्कार में खर्च कम होता है वहीं पेड़ों को कटना भी नहीं पड़ता. इस गोकाष्ठ को लकड़ी के बुरादे, बेकार हो चुका भूसा और गाय के गोबर से तैयार किया जाता है.

जनपद उन्नाव के कल्याणी मोहल्ला निवासी किसान और पर्यावरण प्रेमी रमाकांत दुबे ने भी इस ओर पहल की है. रमाकांत दूबे का 75 हजार से एक लाख रुपये लागत वाला प्लांट रोज दो क्विंटल गो-काष्ठ तैयार करता है. इसके लिए गौ आश्रय स्थलों से गोबर खरीदा जाता है, इस आमदनी से गौ आश्रय स्थलों में गौ-सेवा सम्भव होगी.

राजस्थान से मिली प्रेरणा राजस्थान यात्रा के दौरान रमाकांत ने गो-काष्ठ मशीन देखी और लोगों को गो-काष्ठ इस्तेमाल करते देखा, तो उन्हें अपने जनपद में प्लांट लगाने की प्रेरणा मिली. चार मशीनें लगाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत आवेदन किया और उनका गोकाष्ठ का प्लान प्रशासन के सामने रखा, प्रशासन को उनका प्लान अच्छा लगा जिसे त्वरित मंजूरी भी मिल गई.

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लकड़ी के धुएं से कार्बन डाईआक्साइड गैस निकलती है जो पर्यावरण और इंसानों के लिए नुकसानदेह है, जबकि गो-काष्ठ जलाने से 40 फीसदी आक्सीजन निकलती है जो पर्यावरण संरक्षण में मददगार होगी. लकड़ी से पांच गुना कम खर्च एक अंत्येष्टि में लगभग 7 से 11 मन यानि पौने तीन से साढ़े चार क्विंटल लकड़ी लगती है. वातावरण की शुद्धता के लिए 200 कंडे भी लगाए जाते हैं. यह एक किलो लकड़ी की कीमत से करीब 60 फीसदी सस्ता है.

बायोवेद शोध संस्थान कई तरह के मूल्यवर्धित वस्तुओं के निर्माण का प्रशिक्षण देकर कई परिवारों को रोजगार के साथ अतिरिक्त आय का साधन उपलब्ध करा रहा है. जानवरों के गोबर, मूत्र में लाख के प्रयोग से कई मूल्यवर्धित वस्तुएं बनाई जा रही हैं. गोबर का गमला, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, कलमदान, कूड़ादान, मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती, जैव रसायनों का निर्माण, मोमबत्ती एवं अगरबत्ती स्टैंड बन रहे हैं.

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यूपी में उपचुनाव की हलचलें तेज हैं. यहां 8 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहा है. 403 सदस्यों वाली विधानसभा में फिलहाल 395 विधायक हैं और 8 सीटें खाली हैं जिन पर उपचुनाव होने हैं. चुनाव आयोग ने 7 सीटों पर चुनाव का ऐलान कर दिया है. यूपी विधानसभा में 306 विधायक बीजेपी के और 9 उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल (सोनेलाल) के हैं. यूपी सरकार को 3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है. यूपी विधानसभा के उपचुनावों में असली टक्कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (एसपी) के बीच माना जा रहा है.

विधानसभा उपचुनाव बीजेपी और एसपी की अग्निपरीक्षा मानी जा रही है, साथ ही मायावती भी सक्रिय दिख रही हैं. इससे उपचुनाव का मुकाबला रोचक बनता दिख रहा है. 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले 8 सीटों पर उपचुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं. इससे पता चलेगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम से लोग खुश हैं या एसपी, बीएसपी, कांग्रेस के रूप में वे कोई बदलाव चाहते हैं. सियासी दलों ने अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया है. चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव के साथ यूपी की 7 सीटों पर उपचुनाव कराने का ऐलान किया है, हालांकि स्वार सीट पर अभी फैसला नहीं हो सका है. हाईकोर्ट ने इस सीट पर जल्द उपचुनाव कराने का आदेश दिया है. जिन 8 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उसमें 6 बीजेपी और 2 एसपी के कब्जे में हैं. इन 8 सीटों के उपचुनाव से यूपी सरकार की बहुमत पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा लेकिन अगले विधानसभा चुनाव के कुछ संकेत जरूर मिल सकते हैं.

इन सीटों पर उपचुनाव

कोरोना काल के बीच सियासी दलों ने जातिवाद का मुद्दा काफी गर्माए रखा है, जिसका असर उपचुनाव पर देखा जा सकता है. यूपी की जिन 8 सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें फिरोजाबाद की टूंडला सीट भी शामिल है. बीजेपी के डॉ. एसपी सिंह बघेल के सांसद बनने से यह सीट खाली हुई है जहां उपचुनाव कराए जा रहे हैं. यहां का मामला कोर्ट में होने के कारण अब तक उपचुनाव नहीं कराए जा सके हैं. रामपुर की स्वार सीट पर भी उपचुनाव होगा. स्वार से एसपी सांसद आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम चुनाव जीते थे. अब्दुल्ला आजम की सदस्यता जन्मतिथि विवाद में निरस्त कर दी गई थी, जिसके बाद उपचुनाव कराने की नौबत आई है. इसी तरह उन्नाव की बांगरमऊ सीट पर भी उपचुनाव होगा. यहां से बीजेपी के कुलदीप सिंह सेंगर ने जीत दर्ज की थी, लेकिन दुष्कर्म मामले में उनको उम्र कैद की सजा होने के बाद विधानसभा की सदस्यता रद्द हो गई. अब इस सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद रामपुर की स्वार सीट पर भी उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि बारे में फैसला नहीं हुआ है कि कब चुनाव कराया जाएगा. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने का आदेश जारी कर दिया.

जौनपुर के मल्हनी विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होगा. इस सीट से समाजवादी पार्टी के पारसनाथ यादव चुनाव जीते थे. लेकिन लंबी बीमारी के बाद पारसनाथ यादव का निधन हो गया. उनके निधन से यह सीट खाली हुई है जिस पर उपचुनाव कराया जा रहा है. देवरिया सदर और बुलंदशहर विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होना है. देवरिया सदर से बीजेपी के जन्मेजय सिंह जीते थे, लेकिन उनके निधन से यह सीट खाली हो गई. बुलंदशहर सीट से वीरेंद्र सिरोही विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन उनके निधन से यह सीट खाली हो गई. अब यहां भी उपचुनाव होने जा रहा है. कानपुर की घाटमपुर सीट पर भी उपचुनाव प्रस्तावित है. यहां से कैबिनेट मंत्री कमल रानी वरुण का कोरोना के कारण निधन हो गया था. उनके निधन के बाद खाली पड़ी घाटमपुर सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा. इसी तरह अमरोहा की नौगाम सीट पर उपचुनाव होगा. यहां से कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान का भी कोरोना से निधन हो गया था, जिससे यह सीट खाली पड़ी है. अब इन सीटों पर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. सभी पार्टियां अपने पक्ष में वोटर्स को लुभाने का प्रयास कर रही हैं.

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विपक्षी दलों ने जातिवाद के मुद्दे को हवा दी है. उनका आरोप है कि यूपी में एक खास जाति को निशाना बनाया जा रहा है. इसके अलावा बेरोजगारी, कोरोना संक्रमण, कृषि कानून और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी विपक्षी दल चुनाव प्रचार में सरकार को घेर रहे हैं. दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उनके राज में अपराधियों की खैर नहीं और जो लोग कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं, उनके साथ सख्ती से निपटा जा रहा है.

विपक्ष पर योगी का हमला

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने गुरुवार को प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव में प्रचार की शुरुआत में ही आक्रामकता दिखाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार ने पश्चिम उत्तर प्रदेश को गुंडों, माफियाओं से मुक्‍त कराया. पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए योगी ने कहा, ‘पिछली सरकारों के कार्यकाल में जो गुंडे, बदमाश सत्‍ता के संरक्षण से व्‍यापारियों का शोषण करते थे, लोगों की जमीनों पर कब्‍जा कर लेते थे, वे आज अपनी जान की भीख मांग रहे हैं. इन गुंडे माफियाओं की अकूत संपत्तियों पर हमने बुल्‍डोजर चलवाया है.’ मुख्यमंत्री ने उपचुनाव के मद्देनजर गुरुवार को बुलंदशहर, नौगांवा सादात और टुंडला में जनसभाएं कीं. प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के साथ मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने बुलंदशहर की सदर विधान सभा से उपचुनाव की रैली की शुरुआत की. उन्होंने कहा, ‘2017 में विधानसभा चुनाव के प्रचार की शुरुआत भी मैंने बुलंदशहर से की थी और कहा था कि बीजेपी आएगी तो गुंडाराज खत्‍म होगा, बेटियों की रक्षा होगी. नतीजा सामने है, सत्‍ता के संरक्षण में जो गुंडे व्‍यापारियों का शोषण करते थे, जनता की जमीनों पर कब्‍जा करते थे और बेखौफ घूमते थे, आज उनके द्वारा हथियाई गई संपत्तियों पर बुल्‍डोजर चल रहा है, गुंडे जान की भीख मांग रहे हैं.’

 

रायबरेली जिले (RaeBareli District) की एक अदालत (posco court) ने डेढ़ वर्ष की मासूम बच्‍ची संग दुष्‍कर्म (Rape) के बाद उसकी हत्‍या के आरोपी को दो लाख 20 हजार रुपये जुर्माने के साथ मृत्‍युदंड की सजा सुनायी है.

जिला एवं सत्र न्‍यायालय के विशेष न्‍यायाधीश (पाक्‍सो कानून) ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया. सरकारी अधिवक्ता वेदपाल सिंह व संदीप सिंह ने मीडिया को बताया कि न्‍यायाधीश विजय पाल ने दोनों पक्षों के अधिवक्‍ताओं के तर्क सुनने के बाद आरोपी को दुराचार का दोषी ठहराया.

उन्होंने बताया, ‘अदालत ने अभियुक्त को कुल दो लाख बीस हजार रुपये के अर्थदंड के साथ मृत्‍युदंड की सजा सुनायी. अदालत ने जुर्माने की आधी रकम एक लाख 10 हजार रुपये पीड़िता के पिता को देने का आदेश दिया है’.

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सरकारी अधिवक्‍ता के मुताबिक, दो मई 2014 को डेढ़ वर्ष की मासूम बच्‍ची की दुष्‍कर्म के बाद गला दबाकर हत्‍या कर दी गई थी. इस सिलसिले में रायबरेली जिले के सलोन थाने में अगले दिन मुकदमा दर्ज कराया गया था.

बच्‍ची के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया, ‘दो मई को उसके परिवार में तिलक समारोह था. कार्यक्रम में शामिल होने आए एक रिश्तेदार ने रात करीब साढ़े दस बजे डेढ़ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसके बाद गला दबाकर उसकी हत्या कर दी. आरोपी ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को गांव के बाहर एक ट्यूबेल के गड्ढे में छिपा दिया था. पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद दोषी को गिरफ्तार कर लिया था.

देश की राजधानी दिल्ली में सर्दियों की मौसम की शुरुआत के साथ प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया है. राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के आंकड़ों (DPCC) के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) शनिवार को ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की संभावना है. एएनआई के मुताबिक अलीपुर में एक्यूआई 432, वजीरपुर में 427 और मुंडका में 409 है.

एक्सपर्ट की मानें तो इस बार अक्टूबर का महीना सबसे अधिक प्रदूषित रहने वाला है. पूवार्नुमान पर यकीन करें तो इस बार प्रदूषण का स्तर बेहद खराब के साथ गंभीर श्रेणी भी देखने को मिल सकता है. अभी तक अक्टूबर में दो दिन राजधानी को बेहद खराब मिल चुके हैं. पूर्वानुमान के मुताबिक अगले दो दिन प्रदूषण स्तर बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में रह सकता है. हवाओं की गति में सुधार होने की स्थिति नहीं है. एक्सपर्ट के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार अक्टूबर में प्रदूषण का स्तर 15 से 20 प्रतिशत अधिक रहने वाला है. पराली जलाना इसका कारण हो सकता है. गौरतलब है कि 2019 में प्रदूषण का स्तर में काफी कमी दर्ज की गई थी.

दिल्ली की हवा ‘जहरीली’- AQI 430 पार, बीते साल से 20 फीसदी ज्यादा हो सकता है प्रदूषण

दिल्ली -नोएडा में आज भी एक्यूआई खराब

सफर (SAFAR) के मुताबिक, आज सुबह दिल्‍ली और नोएडा में हवा की क्‍वालिटी ‘बेहद खराब’ है. दिल्‍ली का एक्यूआई 304 जबकि नोएडा का 342 दर्ज किया. गुड़गांव की स्थिति इन दोनों जगहों से खासी बेहतर है और वहां का एक्यीआई (AQI) 138 रिकॉर्ड हुआ है.

दिल्‍ली में धुंध की मोटी चादर

ईपीसीए को सफर ने प्रदूषण के स्तर की गंभीरता का पूर्वानुमान दिया है. जिसके मुताबिक शनिवार को राजधानी का प्रदूषण स्तर कुछ समय के लिए गंभीर श्रेणी में पहुंच सकता है. वहीं ईपीसीए ने यह भी कहा है कि 25 अक्टूबर से जो हवाएं चलेंगी उन्हें लेकर स्थिति साफ नहीं है. यदि वह पराली के धुएं को लेकर आई तो स्थिति और खराब हो सकती है. इसलिए अभी ईपीसीए स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

 पिछले 8 महीने में सबसे खराब रहा प्रदूषण का हाल

राजधानी और आसपास के इलाकों में शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर खराब से गंभीर रहा. दिल्ली के 35 मॉनिटरिंग सेंटरों में से 10  पर दोपहर 2 बजे तक प्रदूषण का स्तर गंभीर दर्ज किया गया. यानी हवा की क्वॉलिटी बताने वाला सूचकांक 401 से ज्यादा रहा. आउटर दिल्ली के अलीपुर में तो यह 454 दर्ज किया गया, जो हेल्थ इमरजेंसी को दिखाता है. इसकी बड़ी वजह सुबह के समय में हवा की रफ्तार का शून्य रही और पराली के धुएं की वजह से 17 प्रतिशत और बढ़ा गया.

दोपहर के बाद दिल्ली और एनसीआर (Delhi- NCR) के इलाकों में हवा के रफ्तार पकड़ने से औसतन AQI ‘बेहद खराब’ कैटिगरी में रहा. दिल्ली में यह औसतन 366 रहा. शाम तक दिल्ली में 5 सेंटरों पर ही प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ दर्ज किया गया. बता दें कि पिछले 8 महीने में राजधानी की हवा शुक्रवार को सबसे खराब रही. इससे पहले 12 फरवरी को एक्यूआई 334 था. मौसम से जुड़ी एजेंसी सफर का अनुमान है कि अगले दो दिन तक प्रदूषण की स्थिति खराब रहेगी. सोमवार से हवाओं की रफ्तार तेज होने से सुधार की संभावना है.

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कई द‍िन बेहद खराब रही द‍िल्‍ली की हवा

अक्टूबर के शुरुआती 6 दिनों में प्रदूषण का स्तर सामान्य रहा. लेकिन 7 अक्टूबर से प्रदूषण का स्तर बढ़ना शुरू हुआ और इसके बाद से प्रदूषण के स्तर में लगातार गिरावट आई है. 15 अक्टूबर को पहला बेहद खराब दिन राजधानी को मिला था, इसके बाद 23 अक्टूबर को दूसरा बेहद खराब दिन राजधानी का रहा.

घरों में ही रहें, बिना मास्‍क बाहर न निकलें

ईपीसीए ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि लोग कम से कम बाहर निकलें. लोगों को कोविड-19 से जुड़ी सभी गाइलाइंस का पालन करना चाहिए. खासकर जब भी बाहर निकलें मास्क जरूर पहनें. यही आपको प्रदूषण और कोरोना की दोगुनी मार से बचा सकता है. सभी विभागों को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्सन प्लान के तहत सभी कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए हैं. धूल उड़ने से रोकने, मलबा ढककर रखने, आग आदि के मामलों से सख्ती से निपटे. इस बीच उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि प्रदूषण (Pollution) के साथ-साथ इस समय खुद को कोविड-19 से बचाना भी जरूरी है. इसलिए बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलें. बाहर निकलने पर पूरी सावधानी बरतें और मास्क का प्रयोग हर समय करें.

विशेषज्ञों के मुताबिक, AQI का गंभीर स्तर लोगों की सेहत पर काफी बुरा असर डालता है. साथ ही बीमार लोगों की सेहत पर इसका गंभीर असर पड़ता है. AQI का स्तर 0-50 तक अच्छा, 51-100 तक संतोषजनक, 101-200 तक मध्यम, 201-300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401-500 तक गंभीर दर्जे में आता है.

बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Temple) के कपाट बंद होने से निराश भक्तों के लिए अच्छी खबर है. COVID-19 दिशानिर्देशों का पालन करने और सामाजिक दूरी बनाए रखने की शर्त पर मथुरा के बांके बिहारी मंदिर को 25 अक्टूबर से एक बार फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोला जा रहा है.

बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधक मुनीश शर्मा ने बताया, ‘बांके बिहारी मंदिर को 25 अक्टूबर से श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिया जाएगा, हालांकि मंदिर में प्रवेश के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा’. जिन भक्तों को बांके बिहारी के दर्शन करने हैं, उनको इसका ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा, इसी के आधार पर मंदिर में प्रवेश मिलेगा.

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मंदिर खोलने को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने शुक्रवार को मंदिर फिर से खोलने का आदेश दिया. श्रद्धालुओं को COVID-19 मानदंडों का पालन कराने को लेकर मंदिर प्रशासन को कोर्ट द्वारा आवश्यक निर्देश दिए गए हैं. अदालत के मंदिर खोलने के फैसले से धरना-प्रदर्शन कर रहे साधु-श्रद्धालु और दुकानदारों को राहत मिली है.

मालूम हो कि प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Temple) को प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए अनिश्चितकाल तक के लिए बंद कर दिया. सात महीने तक बंद रहने के बाद, नवरात्रि के पहले दिन बांके बिहारी का मंदिर फिर से खुल गया था, मगर प्रसिद्ध मंदिर में 25,000 से अधिक भक्तों की भीड़ उमड़ी थी, जबकि एक दिन में केवल 400 भक्तों को ही दर्शन की अनुमति दी गई थी, मंदिर में प्रवेश के दौरान लोगों ने कोविड-19 के प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ाईं, जिसके बाद प्रशासन की ओर से मंदिर को अनिश्चितकाल तक के लिए बंद करने का फैसला लिया गया.

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अयोध्या (Ayodhya) में भव्य दीपोत्सव (Deepotshav) के लिए तैयारियां जोरों पर हैं. यह चौथी बार होगा जब अयोध्या में भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम मनाया जाएगा. शुक्रवार को मंडलायुक्त की अध्यक्षता में दीपोत्सव समिति की बैठक (Meeting) हुई, जिसमें उत्सव के लिए तारीख तय की गई. भगवान राम की पावन नगरी में इस साल 13 नवंबर को दीपोत्सव मनाया जाएगा. उत्सव से एक दिन पहले साकेत यूनिवर्सिटी (University) से नया घाट तक भगवान राम के प्रसंगों पर आधारित झाकियां निकाली जाएंगी.

बैठक में इस बात पर भी चर्चा की गई कि कोरोना प्रोटोकॉल (Corona Protocol) के तहत सरयू के तट पर इस साल भव्य दीपोत्सव (Deepotshav) के दौरान किन बातों का ध्यान रखा जाएगा. इस बार सरयू घाट को पांच लाख दीयों (Five Lakh Lamps) से रोशन किया जाएगा, पिछले साल राम की पैड़ी को 4.5 लाख दीयों से सजाया गया था. पिछली बार दीपोत्सव के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) भी अयोध्या पहुंचे थे, जिसने इस कार्यक्रम की रौनक और भी बढ़ा दी थी.

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भव्य दीपोत्सव के लिए शुरू हुईं तैयारियां

अयोध्या दीपोत्सव कार्यक्रम सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है, जिसे राजकीय मेले का दर्जा प्राप्त है. इस साल दीपोत्सव को और भी भव्य बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. सभी आलाधिकारियों ने अभी से कार्यक्रम के लिए ड्राफ्ट बनाना शुरू कर दिया है.

इस बार दीप पर्व के दौरान भव्य झाकियां लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेंगी. दीपोत्सव के साथ ही राम कथा पार्क में राम राज्याभिषेक कार्यक्रम होगा और सरयू घाट के राम की पैड़ी पर 5 लाख दीये जगमगाएंगे.

दीपोत्सव में कोरोना नियमों का सख्ती से पालन

अयोध्या के कमिश्नर एमपी अग्रवाल के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान कोरोना नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा, लोगों को मास्क पहनना अनिवार्य होगा, इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा.

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कमिश्नर ने बताया कि इस साल राम की पैड़ी का विस्तार होने की वजह से दीपोत्सव के लिए और भी ज्यादा जगह मिलेगी, जिससे कार्यक्रम की भव्यता और भी बढ़ जाएगी.

योगी सरकार (Yogi Government) के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहसिन रजा (Mohsin Raza) ने कश्मीर (kashmir) से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने का विरोध करने वाली महबूबा मुफ्ती पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, ‘वह पाकिस्तान चली जाएं’. मोहसिन रजा ने वीडियो जारी कर कहा, ‘नजरबंदी से बाहर आकर महबूबा मुफ्ती ने जिस प्रकार की भाषा बोली है, साफ दर्शाता है कि वह पाकिस्तान और कांग्रेस की भाषा बोल रही हैं, ये लोग “भारत तेरे टुकड़े होंगे” गैंग के लोग हैं’.

अनुच्छेद 370 और तिरंगे को लेकर उनके एलान पर मोहसिन रजा ने कहा, ‘महबूबा मुफ्ती इमरान खान और राहुल गांधी की भाषा बोल रही हैं, बीजेपी ने देश हित में 370 हटाने का फैसला लिया था’.

रजा ने कहा, ‘महबूबा मुफ्ती (Mehooba Mufti) कश्मीर (Kashmir) में अनुच्छेद 370 (Article 370) वापस लागू करने की चाहत दिल में लेकर चली जाएंगी, अब ये हो नहीं सकता, इसलिए बेहतर है कि वह पाकिस्तान (Pakistan) जाने का निर्णय ले लें, जो ज्यादा अच्छा रहेगा’.

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महबूबा मुफ्ती ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

मालूम हो कि जम्मू और कश्मीर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने, बिहार की चुनावी रैली में अनुच्छेद 370 को लेकर पीएम मोदी द्वारा दिए गए उनके बयान पर हमला बोलते हुए कहा था, ‘पीएम मोदी को सिर्फ वोट के लिए धारा 370 की बात करनी होती है. यह सरकार राष्ट्र के मुद्दों को हल करने में विफल रही है’. उन्होंने कहा था, ‘पीएम मोदी सभी मोर्चों पर विफल रहे हैं और जब वे सभी मोर्चों पर विफल होते हैं, तब जनता को कश्मीर और अनुच्छेद 370 की याद दिलाते हैं’.

दअरसल प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी ने गुरुवार को सासाराम में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था, ‘एनडीए सरकार ने आर्टिकल 370 को हटा दिया. ये लोग कहते हैं कि अगर ये वापस सत्ता में आए तो इसे दोबारा ले आएंगे. ऐसे बयान देने के बाद ये लोग बिहार में वोट मांगने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? क्या यह बिहार का अपमान नहीं है?’.

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एसटीएफ (STF) के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने शुक्रवार को कहा कि उत्तर प्रदेश एसटीएफ (UP STF) ने तीन जिलों में दर्ज चार मामलों में जांच शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक स्थानीय पुलिस से मामलों का ब्योरा लेकर टीम पहले से ही मथुरा हाथरस और अलीगढ़ में हैं. जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि ब्योरे की जांच के बाद कार्रवाई का अगला कदम बढ़ाया जाएगा.

मथुरा में दर्ज हुआ मामला 5 अक्टूबर का है, जिसमें एक पत्रकार समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था. ये आरोपी हाथरस में 19 वर्षीय पीड़िता के परिवार से मिलने के लिए जा रहे थे और रास्ते में गिरफ्तार कर लिए गए. दलित महिला के साथ गैंगरेप के साथ ही बर्बरता की गई थी. पुलिस ने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए लोग पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और इसकी स्टूटेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के सदस्य हैं.

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PFI पर पिछले साल भी हिंसा भड़काने का आरोप

पीएफआई पर नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ पिछले साल के विरोध के दौरान हिंसा भड़काने का भी आरोप है. पुलिस ने चारों आरोपियों को राजद्रोह और गैर कानूनी गतिविधियों के मामले में गिरफ्तार किया है. इन चारों की पहचान सिद्दीक कप्पन (41), अतीक-उर-रहमान (25), मसूद अहमद (26) और आलम (26) के रूप में हुई थी.

हाथरस में दो मामले दर्ज

हाथरस में दर्ज दो मामलों में से एक चंदपा पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ 4 अक्टूबर को दर्ज किया गया था. इसकी शिकायत में पुलिस ने आरोप लगाया था कि वहां जातिगत दंगे भड़काने और राज्य सरकार को बदनाम करने की साजिश की जा रही थी. हाल ही में हाथरस पुलिस ने मथुरा में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था.

एक मामला अलीगढ़ से जुड़ा हुआ

एक अन्य मामला जिसमें एसटीएफ जांच कर रही है वो अलीगढ़ से जुड़ा हुआ है. इसमें अलीगढ़ में एक वीडियो क्लिप के संबंध में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई. श्योराज के रूप में पहचाने जाने वाले शख्स पर कथित रूप से हिंसा फैलाने और विशेष जाति के लोगों को उकसाने की कोशिश में लिप्त होने का आरोप है. वीडियो में श्योराज ने कथित तौर पर दावा किया है कि कोई भी जातिगत दंगों को रोकने में कामयाब नहीं होगा. हाथरस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yodi Adityanath) ने आरोप लगाया था कि विपक्षी दलों द्वारा राज्य में जातिगत हिंसा को उकसाने के लिए “साजिश” रची जा रही थी.

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बहुजन समाज पार्टी (BSP) अब उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाने पर फोकस कर रही है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बमुश्किल डेढ़ साल रह गए हैं, ऐसे में पार्टी ने अपने सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को रिवाइव किया है और ब्राह्मणों को बड़े पैमाने पर लुभा रही है.

पार्टी के नेताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि प्रत्येक जिले में प्रत्येक समुदाय के कम से कम 1,000 व्यक्तियों को सदस्य के रूप में नामांकित किया जाए.

पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा, “पार्टी अपने आधार को बड़ा बनाना चाहती है और सभी प्रमुख समुदायों को शामिल करना चाहती है. हम विधानसभा चुनावों के लिए एक आक्रामक अभियान शुरू करेंगे और मुद्दे जाति-विशेष के बजाय आम आदमी से संबंधित होंगे.”

पार्टी के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा कानून और व्यवस्था

मायावती के शासन के दौरान जो कानून-व्यवस्था की स्थिति थी, पार्टी के लिए यह एक बड़ा चुनावी मुद्दा कानून और व्यवस्था की स्थिति होगी और पार्टी के नेता मौजूदा हालातों की उससे तुलना करेंगे.

पार्टी अभियान उस तरीके पर भी फोकस करेगी जिसमें सरकार ब्राह्मणों, दलितों, ओबीसी और यहां तक कि अल्पसंख्यकों को निशान बना रही है.

बसपा पिछले कुछ हफ्तों से पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा संबोधित किए जाने वाले ‘ब्राह्मण संवाद’ आयोजित कर रही है. यह कदम ब्राह्मणों को लुभाने के लिए बनाया गया है, जो कथित तौर पर भाजपा से असंतुष्ट हैं.

ठाकुर-ब्राह्मण दरार को चौड़ा करना चाहती है बसपा

दिलचस्प बात यह है कि बसपा अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘ठाकुर अजय सिंह बिष्ट, उत्तराखंड वाले’ के रूप में संबोधित कर रही है.

यह विचार इस तथ्य को रेखांकित करने के लिए है कि वह राज्य से संबंधित नहीं है और एक ‘बाहरी व्यक्ति’ हैं. इसके अलावा, बसपा भी ठाकुर-ब्राह्मण दरार को चौड़ा करना चाहती है और अपने लाभ के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहती है.

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने BJP विधायक सुरेंद्र सिंह पर जातीय हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद से बड़े माफिया सत्तारूढ़ दल में हैं. ओमप्रकाश राजभर शुक्रवार को बलिया जिले के रेवती थाना क्षेत्र के दुर्जनपुर गांव में गए थे, जहां विगत 15 अक्‍टूबर को सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के चयन के दौरान हुए विवाद में में जय प्रकाश पाल की गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी.

दुर्जनपुर में पाल परिवार से मिलने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने BJP पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने दुर्जनपुर हत्याकांड में मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह का बचाव कर रहे BJP विधायक सुरेंद्र सिंह पर जातीय हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि सुरेंद्र सिंह BJP के इशारे पर लगातार बेतुकी बयानबाजी कर रहे हैं.

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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सुरेंद्र सिंह के स्थान पर किसी दूसरे दल के नेता ने बयानबाजी कर दी होती तो अब तक उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया होता. उन्होंने आरोप लगाया कि हाथरस कांड से लेकर बलिया जिले के दुर्जनपुर कांड तक BJP अपने नेताओं को बचाने के लिए घटना को उलझा रही है.

राजभर ने कहा कि दुर्जनपुर में अधिकारियों की मौजूदगी में हुई हत्या की घटना दिल दहला देने वाली है. अपराधी को सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने प्रदेश सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध में कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कहा कि BJP में मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और आजम खान से बड़े माफिया हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती.

बिहार में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) नेता असदुद्दीन ओवैसी, बहुजन समाज पार्टी (BSP) मुखिया मायावती और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के दल के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे पूर्व मंत्री राजभर ने कहा कि उनके गठबंधन से BJP का सर्वनाश हो रहा है. बिहार चुनाव में 18 सभा कर चुके राजभर ने दावा किया कि गठबंधन बिहार में ताकत के रूप में उभरेगा और गठबंधन के समर्थन के बगैर अगली सरकार नहीं बनेगी.

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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में महिला और बालिकाओं की सुरक्षा मिशन शक्ति की शुरूआत करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने शुक्रवार को प्रदेश के 1,535 थानों में महिला हेल्प डेस्क (Women Help Desk) का शुभारंभ किया. इस दौरान डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी (DGP Hitesh Chandra Awasthi) ने महिला अपराध पर अब तक हुई कार्रवाई का ब्यौरा पेश किया. योगी ने लखनऊ, नोएडा कमिश्नरेट के अफसरों से हेल्प डेस्क की कार्यशैली को समझा. इन थानों में महिलाओं से संबंधित समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था होगी. तय समय सीमा के भीतर फाइनल रिपोर्ट भी लगेगी. महिला और बालिकाओं की समस्या के निदान व सुरक्षा के संबंध में अलग से महिला कांस्टेबल और कक्ष की व्यवस्था की गई है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘प्रदेश के 1,535 थानों में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना से  (Mission Shakti) अभियान को नई ऊर्जा मिली है. मिशन शक्ति अभियान को शुरू हुए एक हफ्ते हो गए हैं, इन सात दिनों में समाज में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है.

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योगी ने कहा, ‘1535 थानों में महिला हेल्प डेस्क सभी बुनियादी सुविधाओं के साथ एक प्रशिक्षित महिला कर्मचारी की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए. वास्तविक पीड़ित को त्वरित न्याय मिले यह हमारी कोशिश होनी चाहिए. हमें इस अभियान को जनसहभागिता के माध्यम से सफल बनाना होगा, क्योंकि इसके बिना इसकी सफलता नहीं हो सकती है’.

उन्होंने कहा, ‘सरकार सभी बेटियों को सुरक्षा और सम्मान प्रदान करेगी, इसके लिए जो भी कदम उठाने पड़ेंगे वह उठाए जाएंगे’. उन्होंने कहा, ‘पुलिस के साथ अन्य विभाग इन सात दिनों में मिशन शक्ति अभियान के लिए क्या-क्या किया है, इसकी समीक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि यह मिशन एकांकी नहीं है’.

मुख्यमंत्री योगी को लखनऊ के पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने अवगत कराया कि कमिश्नरेट के सभी थाना क्षेत्रों में हेल्प डेस्क स्थापित कर दी गई है. हर जगह दो-दो महिला पुलिस कर्मियों को तैनाती की गई है. महिला अफसरों को शिकायतों के निस्तारण के लिए मॉनिटरिंग में लगाया गया है. इसके साथ ही थानेवार 15 केस की समीक्षा कर कार्रवाई की जा रही है. एनजीओ व अन्य संगठनों का भी महिला में जागरूकता व उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए सहयोग लिया जा रहा है.

प्रदेश के सभी जिलों के कमिश्नर, एसपी-डीएम समेत जिले के विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि इस कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े. मुख्यमंत्री ने कई जिलों के एसएसपी से उनके द्वारा महिला अपराध को लेकर हेल्प डेस्क स्थापित व अन्य कार्यो का विवरण जाना.

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उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग को किस तरह घाटे की चपेट में आया हुआ है इससे जुड़ा हैरान करनेवाला आंकड़ा सामने आया है. पता चला है कि यूपी में 38 प्रतिशत से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिन्होंने कनेक्शन लेनेवाले दिन से अबतक एक बार भी बिजली बिल नहीं भरा है. इसका सीधा मतलब है कि उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिन्होंने कनेक्शन होने के बाद भी आजतक कोई बिजली बिल नहीं भरा है.

उत्तर प्रदेश से जुड़ी यह बात ऐसे वक्त में सामने आई है जब 24 घंटे बिजली के वादे के साथ पूर्वांचल डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी की UPPCL का निजिकरण करने की बात चल रही है. इसका विभिन्न ट्रेड यूनियंस विरोध कर रही हैं. ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने पिछले महीने इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किया था.

यूपी में कुल 2.83 करोड़ बिजली कनेक्शन

अब बिजली विभाग को हो रहे घाटे के बारे में UPPCL के चेयरमैन ने गुरुवार को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यूपी में कुल 2.83 करोड़ बिजली कनेक्शन हैं. इसमें से 1.09 करोड़ ने आजतक बिजली बिल नहीं भरा है. बताया गया कि 90 प्रतिशत बिल ना देने वाले लोग या डिफॉल्टर ग्रामीण इलाकों के हैं. बताया गया ऐसे लोगों पर कुल 68 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है.

आंकड़ों में गौर करनेवाली बात यह भी है कि 1 करोड़ से ज्यादा इन लोगों में से सबसे ज्यादा 43 लाख पूर्वांचल डिस्कॉम के हैं. इसमें से 3.78 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने 1 लाख से ऊपर के बिल बकाया किए हुए हैं. कहा गया है कि इन हालातों के चलते ही निजिकरण पर जोर दिया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश की 8 विधानसभा सीटों पर अगले महीने उपचुनाव होने हैं, लेकिन देवरिया विधानसभा सीट को लेकर सूबे में अलग ही सियासी सरगर्मी देखने को मिल रही है. इस विधानसभा क्षेत्र में एक ही नारा गूंज रहा है ‘वोट किसी को दो, जितेगा इस बार ‘त्रिपाठी’ ही’. देवरिया के सियासी इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने ब्राह्मण प्रत्याशियों को उपचुनाव में यहां से चुनावी मैदान में उतारा है. देवरिया सदर की सीट पर इस बार मुकाबला त्रिपाठी बनाम त्रिपाठी है. ब्राह्मण बाहुल्य इस क्षेत्र से चार त्रिपाठी चुनावी ताल ठोक रहे हैं.

हाल के दिनों में यूपी में ब्राह्मण के खिलाफ हिंसा और अनदेखी के मुद्दे ने मौजूदा बीजेपी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया. इसे देखते हुए ही विपक्षी पार्टियों ने योगी सरकार के खिलाफ ब्राह्मण वोटबैंक को अपने पाले में गोलबंद करने के लिए यह दांव खेला है. देवरिया में कांग्रेस (Congress) से लेकर सपा (SP), बीएसपी (BSP) और बीजेपी (BJP) ने भी ब्राह्मण उम्मीदवार को उतारा है.

30 वर्षों का सूखा होगा खत्म!

ब्राह्मणों के दबदबे वाले इस क्षेत्र से 1991 के बाद कोई भी ब्राह्मण प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका है. निर्वाचन आयोग के आंकड़े अनुसार यहां से ब्राह्मण समाज से आखिरी चुनाव रामछबीला मिश्रा ने 1989 में जीता था. तब वो जनता दल के प्रत्याशी थे. 1991 के बाद से अब तक इस सीट पर किसी भी ब्राह्मण प्रत्याशी को जीत नहीं मिली है, लेकिन इस बार के उपचुनाव में यह इतिहास बदलने जा रहा है. क्योंकि जंग ब्राह्मण उम्मीदवारों के बीच है.

किस पार्टी ने किसे उतारा

सपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्मशंकर त्रिपाठी को मैदान में उतारा है तो वहीं बीजेपी ने सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी को यहां से टिकट दिया है. कांग्रेस ने मुकुंद भाष्कर मणि त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी बनाया है. वहीं, बीएसपी ने अभयनाथ त्रिपाठी को यहां से चुनावी रण में उतारा है. उपलब्ध आंकडों के मुताबिक देवरिया विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 50-55 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं. दूसरे नंबर पर वैश्य वोटर हैं, जिनकी संख्या यहां 45-50 हजार के आसपास हैं. वहीं, यादव मतदाता 25-30 हजार और मुस्लिम वोटरों की संख्या 20-25 हजार के करीब है.

14 चुनावों में चुने गए सिर्फ दो ब्राह्मण विधायक

साल 1967 में अस्त‍ित्व में आई देवरिया सदर सीट पर अब तक 14 बार हुए चुनाव में सिर्फ दो बार ही यहां से ब्राह्मण समाज के प्रत्याशी जीते हैं. साल 1969 में दीप नारायण मणि‍ यहां से पहले ब्राह्मण विधायक चुने गए थे. इसके बाद 1989 में जनता दल के टिकट पर रामछबीला मिश्र को यहां से जीत मिली थी.